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..दूसरों को चेताने वाले खुद फस गए
Updated Wed, 23 Aug 2017 10:35 PM IST
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सागर जोशी
हरिद्वार।
दूसरों को चेताने वाली पुलिस और मीडियाकर्मी भी खुद किट्टी कमेटी के जाल में फंस गए। करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मी अपने रुपये किट्टी कमेटी में इनवेस्ट किए हुए हैं। कमेटी संचालकों के खिलाफ कोतवाली में चल रहे हंगामे के दौरान मंगलवार रात को इसका खुलासा हुआ। पुलिसकर्मी फरार बताए जा रहे सविंदर सिंह की पत्नी से रुपये मांगने लगे। करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने किट्टी कमेटी डाल रखी है।
जीआईजी के नाम से चल रही दंपति की फर्म में 130 से अधिक ग्रुप बनाए जा रहे हैं। एक ग्रुप में 120 से 150 के बीच सदस्य हैं। सूत्रों ने 17 हजार से अधिक सदस्य इस फर्म से जुड़े होने का दावा किया है। करीब चार साल से चलने वाली इस कमेटी में करीब 50 ग्रुप के लोगों के रुपये वापस भी किए गए थे। वर्तमान में करीब 10 हजार सदस्य इस फर्म में लगातार रुपये जमा कर रहे थे। रुपये जमा करने वाले शहर के अलावा, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी के भी पुलिसकर्मी शामिल हैं। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की एक नहीं बल्कि पांच से सात कमेटी फर्म के पास डाली हुई थी। पुलिसकर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पत्नियों की जिद पर ही कमेटी में रुपये लगाए गए थे। अब कमेटी संचालक के लापता होने के बाद पुलिसकर्मियों के चेहरों पर सिकन पड़ने लगं हैं। मंगलवार रात कई पुलिसकर्मी किट्टी सचालिका निशि से बातचीत करने भी पहुंचे। हरिद्वार से बाहर तैनाती पर जा चुके पुलिसकर्मी भी लगातार कोतवाली पुलिस में अपने परिचित पुलिसकर्मियों से मोबाइल के माध्यम से पल पल की जानकारी लेते दिखेे। कमेटी में महिला पुलिसकर्मियों के रुपये भी फंसे हैं। एक बड़े अधिकारी के ऑफिस में तैनात सिपाही के तीन से चार लाख रुपये फंसे हुए है। जबकि ऋषिकुल निवासी सुमन ने कमेटी मेें 25 लाख रुपये फंसे होने का दावा किया है। शहर के कई मीडियाकर्मी भी इसमें रुपये फंसाए हुए हैं। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि अगर किसी ने पैसा लगाया है तो यह उसका व्यक्तिगत मामला है। लोगों इस तरह की कमेटियों से बचना चाहिए।
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पति से छुपाकर पत्नियों ने डाली कमेटी
कई महिलाओं ने अपने पति से छिपाकर कमेटी में पैसे डाले थे। पत्नियों ने सोचा था कि कुछ रुपये अपने पति से छिपाकर जमा हो जाएंगे। जब मामले का भंडाफोड़ हुआ तो पति- पत्नी आपस में ही उलझ गए। कोतवाली में कई पति- पत्नी आसपास में उलझते हुए दिखे।
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डीजीपी के कानों तक पहुंचा मामला
सड़कों पर उतरे हजारों लोगों की कहानी डीजीपी के कानों तक पहुंच गई। शुरुआत में पुलिस ने मामला हल्के में लिया और उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी नहीं दी। जब मामला बड़ा और आसपास की पुलिस बल को बुलाना पड़ा तो हरिद्वार के तमाम बड़े अधिकारियों को तत्काल जानकारी दी गई। लगातार सिटी कंट्रोल रूम के वायरलेस सेट पर चलता रहा। रात को मामले की जानकारी डीजीपी अनिल रतूडी को भी दी गई।