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अब आएंगे गणपति
Updated Tue, 22 Aug 2017 10:11 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शिव और कृष्ण के बाद अब भगवान गणेश धरती पर घर-घर आएंगे। पंचपुरी में अनेक स्थानों पर गणपति की प्रतिमाएं आसीन होंगी। 11 दिनों तक प्रतिमाओं की पूजा के बाद गंगा में विसर्जन किया जाएगा। इन दिनों गणपति महोत्सव की तैयारियां जोर शोर से शुरू हो गई हैं।
पंचपुरी के ज्वालापुर और मध्य हरिद्वार में कई जगह गणेश मूर्तियां तैयार करने का काम चल रहा है। प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां की जगह मिट्टी की मूर्तियों का बोल बाला हो चला है। ज्वालापुर के परंपरागत कुंभकार इन दिनों मिट्टी से बनाई गई मूर्तियों की रंगाई में जुटे हैं। बुधवार से बिक्री के लिए मूर्तियां बाजार में आ जाएंगी। मंगलवार को भी कई बाजारों में मूर्तियां बिकती नजर आई। साथ ही गणपति की बड़ी- बड़ी प्रतिमाएं भी स्थापना के लिए तैयार हैं। इन प्रतिमाओं को पूजा पंडालों में विधि विधान से स्थापित किया जाएगा। पंचपुरी में करीब 100 सार्वजनिक स्थानों पर श्रीगणेश विराजेंगे। इन सभी स्थलों पर सजावट का आकार शुरू हो चुका है। विघ्रविनाशक की प्रतिदिन चलने वाली पूजा की तैयारियां भी की जा रही हैं। प्रतिमाओं का विसर्जन चतुर्दर्शी के दिन हरकी पैड़ी सहित गंगा के अनेक घाटों पर किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र से निकलकर गणपति बप्पा का पर्व उत्तर भारत में व्याप्त हो गया है। पंचपुरी में यह पर्व प्राचीनकाल से गणेश चौथ के रूप में मनाया जाता है। घरों में मिट्टी के गणेश बनाकर गणपति जन्मोत्सव का एक दिवसीय पर्व चतुर्थी के दिन धूमधाम से मनाया जाता था। घरों में गणपति को लड्डू का भोग लगाकर गली मोहल्लों में वितरण किया जाता था। अब हजारों घरों में श्रीगणेश की छोटी-छोटी मूर्तियां स्थापना के लिए ले जाई जाती हैं। साथ ही गणपति भोज भी आयोजित किए जाएंगे।
हरिद्वार।
शिव और कृष्ण के बाद अब भगवान गणेश धरती पर घर-घर आएंगे। पंचपुरी में अनेक स्थानों पर गणपति की प्रतिमाएं आसीन होंगी। 11 दिनों तक प्रतिमाओं की पूजा के बाद गंगा में विसर्जन किया जाएगा। इन दिनों गणपति महोत्सव की तैयारियां जोर शोर से शुरू हो गई हैं।
पंचपुरी के ज्वालापुर और मध्य हरिद्वार में कई जगह गणेश मूर्तियां तैयार करने का काम चल रहा है। प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां की जगह मिट्टी की मूर्तियों का बोल बाला हो चला है। ज्वालापुर के परंपरागत कुंभकार इन दिनों मिट्टी से बनाई गई मूर्तियों की रंगाई में जुटे हैं। बुधवार से बिक्री के लिए मूर्तियां बाजार में आ जाएंगी। मंगलवार को भी कई बाजारों में मूर्तियां बिकती नजर आई। साथ ही गणपति की बड़ी- बड़ी प्रतिमाएं भी स्थापना के लिए तैयार हैं। इन प्रतिमाओं को पूजा पंडालों में विधि विधान से स्थापित किया जाएगा। पंचपुरी में करीब 100 सार्वजनिक स्थानों पर श्रीगणेश विराजेंगे। इन सभी स्थलों पर सजावट का आकार शुरू हो चुका है। विघ्रविनाशक की प्रतिदिन चलने वाली पूजा की तैयारियां भी की जा रही हैं। प्रतिमाओं का विसर्जन चतुर्दर्शी के दिन हरकी पैड़ी सहित गंगा के अनेक घाटों पर किया जाएगा।
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पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र से निकलकर गणपति बप्पा का पर्व उत्तर भारत में व्याप्त हो गया है। पंचपुरी में यह पर्व प्राचीनकाल से गणेश चौथ के रूप में मनाया जाता है। घरों में मिट्टी के गणेश बनाकर गणपति जन्मोत्सव का एक दिवसीय पर्व चतुर्थी के दिन धूमधाम से मनाया जाता था। घरों में गणपति को लड्डू का भोग लगाकर गली मोहल्लों में वितरण किया जाता था। अब हजारों घरों में श्रीगणेश की छोटी-छोटी मूर्तियां स्थापना के लिए ले जाई जाती हैं। साथ ही गणपति भोज भी आयोजित किए जाएंगे।
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