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जीजीआईसी जोशीमठ की प्रधानाचार्य सावित्री फोनिया को मिलेगा राष्ट्रपति पुरस्कार
Updated Mon, 21 Aug 2017 10:36 PM IST
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जोशीमठ। राजकीय बालिका इंटर कालेज जोशीमठ की प्रधानाचार्या सावित्री फोनिया को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर उन्हें यह सम्मान नई दिल्ली में दिया जाएगा। उन्होंने विद्यालय में छात्राओं को ऑनलाइन शिक्षा देने के साथ ही स्मार्ट कक्षाएं संचालित की हैं। अब छात्राएं किसी भी विषय की पढ़ाई करने के साथ ही कंप्यूटर शिक्षा भी ग्रहण कर रहे हैं।
18 जुलाई वर्ष 2007 को सावित्री फोनिया ने जीजीआईसी जोशीमठ में प्रधानाचार्या का कार्यभार ग्रहण किया था और विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयासों से विद्यालय में नवीं से लेकर बारहवीं कक्षा की छात्राओं को ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। उनके प्रयासों से ही वर्ष 2009 में विद्यालय में विज्ञान संकाय खुला। यही कारण है कि प्रतिवर्ष विद्यालय में छात्राओं की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2007 में जहां विद्यालय में 317 छात्राएं अध्ययनरत थीं, अब यहां 474 छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां छात्राओं को अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षा दी जा रही है। सावित्री फोनिया कहती हैं की शिक्षा व्यवस्था सुधारने में खंड शिक्षा अधिकारी विवेक पंवार ने पूरा सहयोग किया। कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए पठन-पाठन के तौर-तरीकों में परिवर्तन करना जरूरी है। नवीं की छात्रा रितिका, अवंतिका और करीना कहती हैं कि प्रधानाचार्य के पढ़ाने का तरीका बेहद सरल होता है, जो आसानी से समझ आ जाता है। प्रधानाचार्या के राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित होने पर छात्राएं भी खुश हैं।
18 जुलाई वर्ष 2007 को सावित्री फोनिया ने जीजीआईसी जोशीमठ में प्रधानाचार्या का कार्यभार ग्रहण किया था और विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयासों से विद्यालय में नवीं से लेकर बारहवीं कक्षा की छात्राओं को ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। उनके प्रयासों से ही वर्ष 2009 में विद्यालय में विज्ञान संकाय खुला। यही कारण है कि प्रतिवर्ष विद्यालय में छात्राओं की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2007 में जहां विद्यालय में 317 छात्राएं अध्ययनरत थीं, अब यहां 474 छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां छात्राओं को अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षा दी जा रही है। सावित्री फोनिया कहती हैं की शिक्षा व्यवस्था सुधारने में खंड शिक्षा अधिकारी विवेक पंवार ने पूरा सहयोग किया। कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए पठन-पाठन के तौर-तरीकों में परिवर्तन करना जरूरी है। नवीं की छात्रा रितिका, अवंतिका और करीना कहती हैं कि प्रधानाचार्य के पढ़ाने का तरीका बेहद सरल होता है, जो आसानी से समझ आ जाता है। प्रधानाचार्या के राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित होने पर छात्राएं भी खुश हैं।
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