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गौरीशा ने पहली तनख्वाह दी मेधावी गरीब बच्चों को
Updated Mon, 14 Aug 2017 10:11 PM IST
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श्रीनगर। अपनी पहली तनख्वाह जरूरतमंद बच्चों पर खर्च कर गौरीशा ने समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया है। गौरीशा की तनख्वाह से टिहरी जिले की भरपूर पट्टी के 10 बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। यह छात्रवृत्ति उन बच्चों को दी जा रही है जिनके माता पिता नहीं है और जो निर्धन परिवार से है।
मूल रुप से पौड़ी जिले के सबदरखाल के ढुगली गांव के रहने वाले कृष्णकांत सिंह बीएचईएल हरिद्वार में अधिकारी हैं। गौरीशा इन्हीं की पुत्री है। कृष्णकांत सिंह समय-समय पर आर्थिक रुप से कमजोर लोगों के लिए आगे आते रहते हैं। गौरीशा को भी अपने पिता से यह सीख मिली कि पैसे की कमी से अगर किसी बच्चे की पढ़ाई रुक रही है तो उसकी मदद की जाए। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब गौरीशा नौकरी लगी, तो वह सैलेरी का कुछ न कुछ हिस्सा दान करती थी। शादी के बाद उन्हें बीच में नौकरी छोड़नी पड़ी, लेकिन अब उन्होंने दोबारा से बंगलुरु के एक फर्म में ज्वाइन किया है। नौकरी लगते ही उन्होंने संकल्प लिया था कि वह पहली तनख्वाह ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को देंगी जो आर्थिक रुप से कमजोर है। उनके पिता समूण फाउंडेशन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने टिहरी जिले में ऐसे बच्चों के बारे में बताया तो गौरीशा ने तत्काल हामी भर ली। गौरीशा की पहली सैलरी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 10 जरूरतमंदों को सीधे दी जाएगी। गौरीशा कहती है कि अगर उनकी छोटी से मदद से किसी को भविष्य संवरता है, तो इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं होगी।
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मूल रुप से पौड़ी जिले के सबदरखाल के ढुगली गांव के रहने वाले कृष्णकांत सिंह बीएचईएल हरिद्वार में अधिकारी हैं। गौरीशा इन्हीं की पुत्री है। कृष्णकांत सिंह समय-समय पर आर्थिक रुप से कमजोर लोगों के लिए आगे आते रहते हैं। गौरीशा को भी अपने पिता से यह सीख मिली कि पैसे की कमी से अगर किसी बच्चे की पढ़ाई रुक रही है तो उसकी मदद की जाए। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब गौरीशा नौकरी लगी, तो वह सैलेरी का कुछ न कुछ हिस्सा दान करती थी। शादी के बाद उन्हें बीच में नौकरी छोड़नी पड़ी, लेकिन अब उन्होंने दोबारा से बंगलुरु के एक फर्म में ज्वाइन किया है। नौकरी लगते ही उन्होंने संकल्प लिया था कि वह पहली तनख्वाह ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को देंगी जो आर्थिक रुप से कमजोर है। उनके पिता समूण फाउंडेशन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने टिहरी जिले में ऐसे बच्चों के बारे में बताया तो गौरीशा ने तत्काल हामी भर ली। गौरीशा की पहली सैलरी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 10 जरूरतमंदों को सीधे दी जाएगी। गौरीशा कहती है कि अगर उनकी छोटी से मदद से किसी को भविष्य संवरता है, तो इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं होगी।
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