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फोटोरिसेप्टर से समय परिर्वतन का पता लगाते है पक्षी
Updated Mon, 07 Aug 2017 10:40 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस एरिया में फोटोरिसेप्टर से पक्षी साल भर में होने वाले दिनमान (डे लेंथ) के परिवर्तन को महसूस करते हैं। इसी के आधार पर पक्षी प्रजनन और बच्चों के लालन-पालन के लिए अनुकूल समय का निर्धारण करते हैं।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट के शोध कार्य में यह बात सामने आई है। प्रो. दिनेश भट्ट द्वारा जालीदार मुनिया नामक भारतीय पक्षी पर किए गए शोध कार्य से यह ज्ञात हुआ है कि पक्षियों के मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस एरिया में फोटोरिसेप्टर होते है, जो साल भर में होने वाले दिनमान (डे लेन्थ) के परिवर्तन को महसूस करते हैं। फोटोरिसेप्टर के आधार पर पक्षी गीत गातेे हुए प्रजनन उस समय करते है, तब शरद ऋतु के बाद दिनमान में बढ़ोतरी होती है। इस समय पक्षियों के बच्चों के लालन-पालन के लिए बसंत व ग्रीष्म ऋतु में पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध रहता है। साथ ही पक्षियों को अंडे सेकने के लिए अनुकूल तापमान भी मिलता है। प्रो. भट्ट ने बताया कि अधिकांश पक्षियों में प्रजनन से पहले जोड़ा बनाने के लिए गीत गाने की परंपरा है। नेचुरल सलेक्शन थ्योरी के अनुसार जितना बढ़िया गीत उतना ही प्यारा मीत मिलता है। बताया कि विदेशी वैज्ञानिकों के कार्य से यह ज्ञात हुआ है कि माईग्रेटरी पक्षियों की चोंच में जियोमैग्नेटिक सेन्सर होते हैं, जिनसे वे प्रवास जाने की दिशा निर्धारण करते हैं।
हरिद्वार।
मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस एरिया में फोटोरिसेप्टर से पक्षी साल भर में होने वाले दिनमान (डे लेंथ) के परिवर्तन को महसूस करते हैं। इसी के आधार पर पक्षी प्रजनन और बच्चों के लालन-पालन के लिए अनुकूल समय का निर्धारण करते हैं।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट के शोध कार्य में यह बात सामने आई है। प्रो. दिनेश भट्ट द्वारा जालीदार मुनिया नामक भारतीय पक्षी पर किए गए शोध कार्य से यह ज्ञात हुआ है कि पक्षियों के मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस एरिया में फोटोरिसेप्टर होते है, जो साल भर में होने वाले दिनमान (डे लेन्थ) के परिवर्तन को महसूस करते हैं। फोटोरिसेप्टर के आधार पर पक्षी गीत गातेे हुए प्रजनन उस समय करते है, तब शरद ऋतु के बाद दिनमान में बढ़ोतरी होती है। इस समय पक्षियों के बच्चों के लालन-पालन के लिए बसंत व ग्रीष्म ऋतु में पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध रहता है। साथ ही पक्षियों को अंडे सेकने के लिए अनुकूल तापमान भी मिलता है। प्रो. भट्ट ने बताया कि अधिकांश पक्षियों में प्रजनन से पहले जोड़ा बनाने के लिए गीत गाने की परंपरा है। नेचुरल सलेक्शन थ्योरी के अनुसार जितना बढ़िया गीत उतना ही प्यारा मीत मिलता है। बताया कि विदेशी वैज्ञानिकों के कार्य से यह ज्ञात हुआ है कि माईग्रेटरी पक्षियों की चोंच में जियोमैग्नेटिक सेन्सर होते हैं, जिनसे वे प्रवास जाने की दिशा निर्धारण करते हैं।
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