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बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर संवेदशील पहाडिय़ां चिंता का कारण
Updated Mon, 07 Aug 2017 10:40 PM IST
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श्रीनगर। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग जगह-जगह खतरनाक बना हुआ है। शिवपुरी से कीर्तिनगर के बीच पहाड़ी काफी संवेदनशील बनी हुई है। जहां-जहां रोड कटिंग चल रही है, वहां लगातार चट्टान खिसक रही हैं। इसके चलते आए दिन कई स्थानों पर यातायात अवरुद्ध हो जाता है। यहां सड़क के ऊपर-नीचे दोनों ओर भूस्खलन होने से सड़क संकरी हो गई है। भू-विज्ञानियों का कहना है कि इन स्थानों पर कोई भी काम कराने से पहले विशेषज्ञों की राय जरूर ली जानी चाहिए।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कौड़ियाला, निरगड्डू, मरीन ड्राइव, सकनीधार, मूल्यागांव, धर्मपुर, सौड़पानी, महादेव चट्टी, तोताघाटी और पाली पुलिया समेत कुछ अन्य स्थानों में भूस्खलन की समस्या बनी हुई है। मूल्यागांव का लगभग 100 मीटर पैच सबसे अधिक संवेदनशील बना हुआ है। यहां सड़क के ऊपर और नीचे दोनों ओर भूस्खलन हो रहा है। मलबा आने से यहां पर सड़क बाधित हो जाती है। पूर्व में कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।
केंद्रीय गढ़वाल विवि के भू-विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डा. एमपीएस बिष्ट कहते हैं कि राजमार्ग की पहाड़ियां संवेदनशील बनी हुई हैं। सड़क बनाने के लिए जब कटिंग की जाती है तो ढाल लगभग 90 डिग्री हो जाता है, जिससे ऊपर की ओर से दबाव बनता रहता है। हल्का सा डिस्टर्बेंस होने पर चट्टान खिसक जाती हैं। इन स्थानों पर कटिंग के साथ ही तत्काल ट्रीटमेंट वर्क होना चाहिए। कार्यदायी संस्था को किसी भी प्रकार का काम कराने से पहले भूविज्ञानियों की राय लेनी चाहिए। अनियोजित ढंग से मशीन से कटिंग कर नुकसान ज्यादा होगा।
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कोट
बदरीनाथ हाईवे का ऑलवेदर रोड प्रोजेक्ट में चौड़ीकरण के साथ ही ट्रीटमेंट काम भी होना है। जहां-जहां संवेदनशील स्थान हैं, वहां विशेष उपाय किए जाने का प्लान है।-जितेंद्र त्रिपाठी, ईई लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड श्रीनगर
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कौड़ियाला, निरगड्डू, मरीन ड्राइव, सकनीधार, मूल्यागांव, धर्मपुर, सौड़पानी, महादेव चट्टी, तोताघाटी और पाली पुलिया समेत कुछ अन्य स्थानों में भूस्खलन की समस्या बनी हुई है। मूल्यागांव का लगभग 100 मीटर पैच सबसे अधिक संवेदनशील बना हुआ है। यहां सड़क के ऊपर और नीचे दोनों ओर भूस्खलन हो रहा है। मलबा आने से यहां पर सड़क बाधित हो जाती है। पूर्व में कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।
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केंद्रीय गढ़वाल विवि के भू-विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डा. एमपीएस बिष्ट कहते हैं कि राजमार्ग की पहाड़ियां संवेदनशील बनी हुई हैं। सड़क बनाने के लिए जब कटिंग की जाती है तो ढाल लगभग 90 डिग्री हो जाता है, जिससे ऊपर की ओर से दबाव बनता रहता है। हल्का सा डिस्टर्बेंस होने पर चट्टान खिसक जाती हैं। इन स्थानों पर कटिंग के साथ ही तत्काल ट्रीटमेंट वर्क होना चाहिए। कार्यदायी संस्था को किसी भी प्रकार का काम कराने से पहले भूविज्ञानियों की राय लेनी चाहिए। अनियोजित ढंग से मशीन से कटिंग कर नुकसान ज्यादा होगा।
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बदरीनाथ हाईवे का ऑलवेदर रोड प्रोजेक्ट में चौड़ीकरण के साथ ही ट्रीटमेंट काम भी होना है। जहां-जहां संवेदनशील स्थान हैं, वहां विशेष उपाय किए जाने का प्लान है।-जितेंद्र त्रिपाठी, ईई लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड श्रीनगर