{"_id":"59889b454f1c1ba6718b45ff","slug":"150212487320-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उतमदास की शितांडव प्रस्तुति ने मन मोहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उतमदास की शितांडव प्रस्तुति ने मन मोहा
Updated Mon, 07 Aug 2017 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण और ढोल वादक उत्तम दास ने ढोल और दमाऊं वादकों को एक ताल में बजाना सिखाया। सुबह और शाम दो शिफ्ट में चली कार्यशाला में ढोल वादकों ने कई गुर सिखे।
हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में चल रही पांच दिवसीय ढोल- दमाऊं कार्यशाला नमो नाद के दूसरे दिन प्रीतम भरतवाण ने ढोल और दमाऊं पर एक साथ अभ्यास शुरू किया। देवी नृत्य ताल, धोहिल ताल, तांडव स्त्रोतम ताल, उतराई ताल, उकाल ताल, गढ़तरबी ताल, बारात ताल, स्वागत ताल समेत कई अन्य तालों का भी अभ्यास किया।
सोमवार को अभ्यास में काफी कमियां रही। कई वादक एक साथ ढोल पर हाथ नहीं मार पाए। कई वादक ताल से अलग चलते दिखे। बार- बार प्रीतम भरतवाण दोबारा अभ्यास कराते रहे। ढोल वादक उत्तम दास ने ढोल सागर विधा से परिचित किया गया। कार्यक्रम के अंत में उत्तम दास ने भगवान शंकर का शिवतांडव स्त्रोत्रम दो आवाज में गाया। इसके साथ ही उन्होंने एक साथ ढोल और दमाऊं बजाकर भी दिखाया। दोपहर बाद शाम को कलाकारों को दोबारा अभ्यास कराया गया। सोमवार को हरिद्वार के कई लोग भी कार्यशाला देखने पहुंचे, तो कुछ लोग अपने परिचित से मिलने आए। इस मौके पर केंद्र सरकार के संगीत नाटक अकादमी और संस्कृति विभाग के सदस्य नरेंद्र पांथरी भी पहुंचे। उन्होंने उत्तराखंड के कलाकारों को आगे बढ़ावा देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट, बलराज नेगी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
कलाकारों के लिए ड्रेस तैयार
कार्यशाला के समापन के लिए कलाकारों के लिए विशेष ड्रेस तैयार की जा रही है। इस ड्रेस को समापन कार्यक्रम के लिए बनाया जा रहा है। बुधवार को सभी कलाकार ड्रेस पहनकर कार्यक्रम में भाग लेंगे। समापन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आने की संभवना जताई जा रही है।
अब कार्यशाला चार दिन ही चलेगी
संस्कृति विभाग की ओर से जारी किया गया कार्यक्रम पांच दिवसीय था। सोमवार को अचानक कार्यक्रम में एक दिन कम कर दिया गया। अब समापन बुधवार को होगा जबकि जारी किए गए कार्यक्रम में समापन बृहस्पतिवार को होना था। संस्कृति विभाग की डायरेक्टर बीना भट्ट ने बताया कि पर्यटन मंत्री के बाहर जाने से कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।
विज्ञापन
हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण और ढोल वादक उत्तम दास ने ढोल और दमाऊं वादकों को एक ताल में बजाना सिखाया। सुबह और शाम दो शिफ्ट में चली कार्यशाला में ढोल वादकों ने कई गुर सिखे।
हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में चल रही पांच दिवसीय ढोल- दमाऊं कार्यशाला नमो नाद के दूसरे दिन प्रीतम भरतवाण ने ढोल और दमाऊं पर एक साथ अभ्यास शुरू किया। देवी नृत्य ताल, धोहिल ताल, तांडव स्त्रोतम ताल, उतराई ताल, उकाल ताल, गढ़तरबी ताल, बारात ताल, स्वागत ताल समेत कई अन्य तालों का भी अभ्यास किया।
विज्ञापन
सोमवार को अभ्यास में काफी कमियां रही। कई वादक एक साथ ढोल पर हाथ नहीं मार पाए। कई वादक ताल से अलग चलते दिखे। बार- बार प्रीतम भरतवाण दोबारा अभ्यास कराते रहे। ढोल वादक उत्तम दास ने ढोल सागर विधा से परिचित किया गया। कार्यक्रम के अंत में उत्तम दास ने भगवान शंकर का शिवतांडव स्त्रोत्रम दो आवाज में गाया। इसके साथ ही उन्होंने एक साथ ढोल और दमाऊं बजाकर भी दिखाया। दोपहर बाद शाम को कलाकारों को दोबारा अभ्यास कराया गया। सोमवार को हरिद्वार के कई लोग भी कार्यशाला देखने पहुंचे, तो कुछ लोग अपने परिचित से मिलने आए। इस मौके पर केंद्र सरकार के संगीत नाटक अकादमी और संस्कृति विभाग के सदस्य नरेंद्र पांथरी भी पहुंचे। उन्होंने उत्तराखंड के कलाकारों को आगे बढ़ावा देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट, बलराज नेगी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
कलाकारों के लिए ड्रेस तैयार
कार्यशाला के समापन के लिए कलाकारों के लिए विशेष ड्रेस तैयार की जा रही है। इस ड्रेस को समापन कार्यक्रम के लिए बनाया जा रहा है। बुधवार को सभी कलाकार ड्रेस पहनकर कार्यक्रम में भाग लेंगे। समापन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आने की संभवना जताई जा रही है।
अब कार्यशाला चार दिन ही चलेगी
संस्कृति विभाग की ओर से जारी किया गया कार्यक्रम पांच दिवसीय था। सोमवार को अचानक कार्यक्रम में एक दिन कम कर दिया गया। अब समापन बुधवार को होगा जबकि जारी किए गए कार्यक्रम में समापन बृहस्पतिवार को होना था। संस्कृति विभाग की डायरेक्टर बीना भट्ट ने बताया कि पर्यटन मंत्री के बाहर जाने से कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।