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प्रवक्ताओं की कमी से जूझ रहे चमोली के उच्च शिक्षण संस्थान
Updated Mon, 07 Aug 2017 10:15 PM IST
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गोपेश्वर। चमोली जिले के उच्च शिक्षण संस्थान प्रवक्ताओं की कमी से जूझ रहे हैं। जिले में सात राजकीय महाविद्यालय हैं। इन महाविद्यालयों में स्वीकृत 200 प्रवक्ता पदों के सापेक्ष 111 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह में महाविद्यालयों में गेस्ट और संविदा प्रवक्ताओं का भी अनुबंध होता है, लेकिन इस वर्ष अभी तक इन प्रवक्ताओं का अनुबंध नहीं हो पाया है।
चमोली जिले में राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ और गैरसैंण में आठ, गोपेश्वर में 34, घाट व नंदासैंण में छह-छह, कर्णप्रयाग में 16, पोखरी में 19 और तलवाड़ी में 14 प्रवक्ताओं के पद रिक्त चल रहे हैं। राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ, गैरसैंण, पोखरी और तलवाड़ी में स्थायी प्राचार्य भी नहीं है, जिससे शिक्षणेत्तर कार्य भी बाधित हो रहे हैं।
जिले में सबसे पुराने महाविद्यालय गोपेश्वर में प्रवक्ताओं के 82 पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष यहां 48 पदों पर प्रवक्ता तैनात हैं। यहां गणित, अर्थशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, संगीत, अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों में प्रवक्ताओं की कमी है। भौतिक विज्ञान, जंतु विज्ञान और रसायन विज्ञान के प्रयोगशालाओं में टेक्निशियन भी नहीं है। चालू शिक्षण सत्र शुरू होने से पहले अप्रैल माह में जोशीमठ महाविद्यालय में विज्ञान संकाय में प्रवक्ताओं के छह पदों की स्वीकृति शासन से मिली थी, लेकिन अभी तक मात्र तीन शिक्षकों ने ही यहां अपनी तैनाती दी है।
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राजकीय महाविद्यालयों में जल्द प्रवक्ताओं की कमी को पूरा कर लिया जाएगा। गेस्ट प्रवक्ताओं की तैनाती भी महाविद्यालयों में की जा रही है, जिन महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं की भारी कमी बनी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्रवक्ताओं की तैनाती कर ली जाएगी।
- धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड शासन।
चमोली जिले में राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ और गैरसैंण में आठ, गोपेश्वर में 34, घाट व नंदासैंण में छह-छह, कर्णप्रयाग में 16, पोखरी में 19 और तलवाड़ी में 14 प्रवक्ताओं के पद रिक्त चल रहे हैं। राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ, गैरसैंण, पोखरी और तलवाड़ी में स्थायी प्राचार्य भी नहीं है, जिससे शिक्षणेत्तर कार्य भी बाधित हो रहे हैं।
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जिले में सबसे पुराने महाविद्यालय गोपेश्वर में प्रवक्ताओं के 82 पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष यहां 48 पदों पर प्रवक्ता तैनात हैं। यहां गणित, अर्थशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, संगीत, अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों में प्रवक्ताओं की कमी है। भौतिक विज्ञान, जंतु विज्ञान और रसायन विज्ञान के प्रयोगशालाओं में टेक्निशियन भी नहीं है। चालू शिक्षण सत्र शुरू होने से पहले अप्रैल माह में जोशीमठ महाविद्यालय में विज्ञान संकाय में प्रवक्ताओं के छह पदों की स्वीकृति शासन से मिली थी, लेकिन अभी तक मात्र तीन शिक्षकों ने ही यहां अपनी तैनाती दी है।
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राजकीय महाविद्यालयों में जल्द प्रवक्ताओं की कमी को पूरा कर लिया जाएगा। गेस्ट प्रवक्ताओं की तैनाती भी महाविद्यालयों में की जा रही है, जिन महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं की भारी कमी बनी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्रवक्ताओं की तैनाती कर ली जाएगी।
- धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड शासन।