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रक्षाबंधन के समय को लेकर असमंजस बरकरार

Sat, 05 Aug 2017 10:48 PM IST
Updated Sat, 05 Aug 2017 10:48 PM IST
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रक्षाबंधन के समय को लेकर असमंजस बरकरार
रक्षाबंधन के समय को लेकर असमंजस बरकरार
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ज्योतिषियों और पंचांगों की अलग-अलग राय, निर्णय सिंधु को नहीं मान रहे ज्योतिषी
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
रक्षाबंधन का पर्व सोमवार को है। इस बार चंद्रग्रहण के कारण समय को लेकर असमंजस बना हुआ है। पंचांग अलग-अलग जानकारी दे रहे हैं और ज्योतिषी भी एकमत नहीं हो पा रहे हैं। इसके विपरीत धार्मिक पर्वों का आधार निर्णय सिंधु ग्रंथ की अवधारणा अलग है।
चंद्रग्रहण सोमवार की रात्रि 10:52 बजे से 12:48 बजे तक चलेगा। ज्योतिष ग्रंथों में व्यवस्था दी गई है कि चंद्रग्रहण शुरू होने से आठ घंटे पहले सूतक लग जाता है। इसके आधार पर रक्षाबंधन का पर्व दोपहर 1:52 बजे से पहले पड़ेगा। इस दिन भद्रा को लेकर भी दूसरा संकट है। गंगा सभा और मारतंड पंचांग के अनुसार भद्रा पूर्वाह्न में 11:06 बजे तक रहेगी। राखी बंधवाने का सही समय 11:06 बजे से दोपहर 1:52 बजे तक है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी भी इसी काल को उचित ठहराते है। इसके विपरीत गंगा सभा विद्वत परिषद के पंडित सूरज वशिष्ठ बताते हैं कि सूतक अथवा भद्रा का कोई दोष रक्षाबंधन के लिए नहीं है। ज्योतिषी उमाशंकर का भी यही कहना है। इसके अनुसार चंद्रग्रहण रात में है। जिसका सूतक पहले ही प्रारंभ हो जाता है। लेकिन प्रत्यके पर्व में सूतक अथवा भद्रा नहीं लिए जाते। भद्रा का वास देखा जाता है। भद्रा जिस लोक में वास करती है, वह उसी लोक को प्रभावित करती है। इस बार भद्रा का वास पाताल में है, जिस कारण पृथ्वी पर शुभ अशुभ का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। रक्षा बंधन का विशेष मूर्हत दोपहर 12:06 बजे से 12:59 बजे तक हैं। दिवा मूर्हत दोपहर 2:10 बजे से सायं 7:04 बजे तक बना रहेगा।
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उधर निर्णय सिंधु के परिच्छेद दो पृष्ठ 180 पर साफ लिखा है, कि जिस पर्व का काल नियत हो उस पर भद्रा नहीं ली जाती। रक्षाबंधन, दीपावली और होली पर्व हमेशा ही निर्धारित तिथि पर होते हैं। नियत पर्वों पर भद्रा का कोई असर नहीं होता। जहां तक रक्षाबंधन का सवाल है, यह हर वर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को बनाया जाता है। यह नियत पर्व है। न यह एक दिन पहले होता, न एक दिन बाद। नियत पर्व होने के कारण इस पर्व पर ग्रहण का कोई दोष नहीं लगेगा। रक्षाबंधन का पर्व सोमवार को पूरे दिन मनाया जा सकता है।
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