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श्रावण यात्रा बीच में छोड़ अफसर नीलकंठ से नदारद
Updated Tue, 01 Aug 2017 01:02 AM IST
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कांवड़ यात्रा बीच में छोड़ गायब हुए अधिकारी
-- आठ अगस्त तक देनी थी सेवाएं, अव्यवस्थाओं में चल रही श्रीनीलकंठ यात्रा
-- पैदल मार्ग पर जलापूर्ति की बड़ी समस्या यात्री दुकानों से खरीदकर पी रहे पानी
हेमवती नंदन भट्ट
ऋषिकेश। श्रावण मास की श्री नीलकंठ की कांवड़ यात्रा में अधिकारियाें की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यात्रा के लिए जिन अधिकारियाें की ड्यूटी लगाई गई थी, वह यात्रा को छोड़कर गायब हो गए हैं। ऐसे में मॉनिटरिंग के अभाव में मेला व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। हर रोज लगभग 50 हजार श्रद्धालु शिवालय के दर्शनों को पहुंच रहे हैं, जिन्हें पेयजल, शौचालय, यूरिनल, बिजली, दूरसंचार जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। मंदिर समिति की ओर से जिला प्रशासन से सात अगस्त तक व्यवस्थाएं जुटाने को कहा गया है, जबकि मेला क्षेत्र से बीती श्रावणी शिवरात्रि के बाद से लगभग सभी महकमों के जिम्मेदार अधिकारी नदारद चल रहे हैं।
बीती नौ जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर्व से शुरू हुई इस साल की श्रावण मास की कांवड़ यात्रा अगले माह सात अगस्त तक चलनी है। सोमवार को कांवड़ियों की आमद डेढ़ लाख के करीब हो जाती है। बावजूद इसके उन्हें नीलकंठ पैदल मार्ग और धाम के मेला क्षेत्र में मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। नीलकंठ से प्रशासन यानि राजस्व महकमे के अफसरों के नदारद होते ही अन्य विभागों के अफसर भी आधी यात्रा में मेला क्षेत्र को छोड़कर चलते बने। स्थानीय लोगों और नीलकंठ मंदिर समिति के सूत्रों की मानें तो विभिन्न विभागों के अधिकारी बीती 21 जुलाई श्रावणी शिवरात्रि के बाद नीलकंठ धाम से चलते बने, लिहाजा करीब सप्ताह भर से मेला क्षेत्र में विभिन्न विभागों के गिनेचुने फील्ड कर्मचारी ही रह गए हैं।
निगरानी के अभाव में नीलकंठ दर्शन को आ रहे हजारों यात्रियों को हर रोज मेला क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। मेला क्षेत्र में सबसे अधिक दिक्कत पेयजल और शौचालय, यूरिनल की है। जल संस्थान कोटद्वार डिवीजन की ओर से स्वर्गाश्रम-नीलकंठ पैदल मार्ग पर पेयजल आपूर्ति बंद कर दी गई है। वहीं स्टैंड पोस्टों पर से टोटियां हटा दी गई हैं। यही स्थिति नीलकंठ मंदिर के दो किमी. के दायरे में है। जलापूर्ति नहीं होने से लोगों को दुकानों से बोतल बंद पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। कांवड़ यात्रा के पहले पखवाड़े में भी नीलकंठ क्षेत्र में जलापूर्ति की यही स्थिति रही, तब जल संस्थान द्वारा यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं की आमद के बावजूद महज एक टैंकर से पानी की सप्लाई दी गई।
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कहीं पानी सप्लाई कम की तो कहीं कर दी बंद
जल संस्थान के जुड्डा पंपिंग स्टेशन पंप ऑपरेटर नंद किशोर का कहना है कि विभाग की ओर से हमें 25 जुलाई के बाद पेयजल पंपिंग 24 घंटे की बजाए आठ घंटे करने के लिखित निर्देश दिए गए हैं। जबकि जल संस्थान के लाइन फीटर प्यारे लाल जोशी ने बताया कि 25 जुलाई से विभाग के निर्देश पर पैदल मार्ग पर पेयजल लाइन पर सप्लाई बंद कर दी गई है। स्टैंड पोस्टों पर से टोटियां हटा दी गई हैं।
इन विभागों को देनी थी सात अगस्त तक व्यवस्था
यात्रा का जिम्मा एसडीएम यमकेश्वर, तहसीलदार, सीडीओ पौड़ी, जिला पंचायत, सीएमओ, ईई जलसंस्थान कोटद्वार, ईई ऊर्जा निगम, लोनिवि दुगड्डा, ईई गढ़वाल जल संस्थान ऋषिकेश, निदेशक राजाजी नेशनल पार्क, विधायक यमकेश्वर, प्रमुख क्षेत्र पंचायत और सदस्य जिला पंचायत को दी गई है।
ईई की सुनिए
पानी की सप्लाई बंद नहीं की गई है। बीते दिनों ऑपरेटर ने पैदल मार्ग पर सप्लाई सुचारु किए जाने की सूचना दी है। फिर भी इसे दिखवाया जाएगा।
ओमप्रकाश बहुगुणा, ईई जल संस्थान
मंदिर समिति की ओर से जिला प्रशासन व विभिन्न विभागों को नौ जुलाई से सात अगस्त तक श्रावण मेला व्यवस्थाओं के बाबत पत्र से सूचित किया गया है। मगर सभी विभागों के अधिकारी 21 जुलाई से नीलकंठ से गायब हैं। लिहाजा सभी व्यवस्थाएं लड़खड़ा गई हैं।
धन सिंह राणा, प्रतिनिधि नीलकंठ मंदिर समिति ।
डीएम की सुनिए
सभी विभागों से आठ अगस्त तक नीलकंठ में व्यवस्थाएं देने को कहा गया है। पेयजल और अन्य सभी दिक्कतों को दिखवाया जाएगा, उसे तत्काल बहाल कराया जाएगा। जिससे यात्रियों को परेशानी नहीं हो।
सुशील कुमार, डीएम पौड़ी।
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-- आठ अगस्त तक देनी थी सेवाएं, अव्यवस्थाओं में चल रही श्रीनीलकंठ यात्रा
-- पैदल मार्ग पर जलापूर्ति की बड़ी समस्या यात्री दुकानों से खरीदकर पी रहे पानी
हेमवती नंदन भट्ट
ऋषिकेश। श्रावण मास की श्री नीलकंठ की कांवड़ यात्रा में अधिकारियाें की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यात्रा के लिए जिन अधिकारियाें की ड्यूटी लगाई गई थी, वह यात्रा को छोड़कर गायब हो गए हैं। ऐसे में मॉनिटरिंग के अभाव में मेला व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। हर रोज लगभग 50 हजार श्रद्धालु शिवालय के दर्शनों को पहुंच रहे हैं, जिन्हें पेयजल, शौचालय, यूरिनल, बिजली, दूरसंचार जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। मंदिर समिति की ओर से जिला प्रशासन से सात अगस्त तक व्यवस्थाएं जुटाने को कहा गया है, जबकि मेला क्षेत्र से बीती श्रावणी शिवरात्रि के बाद से लगभग सभी महकमों के जिम्मेदार अधिकारी नदारद चल रहे हैं।
बीती नौ जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर्व से शुरू हुई इस साल की श्रावण मास की कांवड़ यात्रा अगले माह सात अगस्त तक चलनी है। सोमवार को कांवड़ियों की आमद डेढ़ लाख के करीब हो जाती है। बावजूद इसके उन्हें नीलकंठ पैदल मार्ग और धाम के मेला क्षेत्र में मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। नीलकंठ से प्रशासन यानि राजस्व महकमे के अफसरों के नदारद होते ही अन्य विभागों के अफसर भी आधी यात्रा में मेला क्षेत्र को छोड़कर चलते बने। स्थानीय लोगों और नीलकंठ मंदिर समिति के सूत्रों की मानें तो विभिन्न विभागों के अधिकारी बीती 21 जुलाई श्रावणी शिवरात्रि के बाद नीलकंठ धाम से चलते बने, लिहाजा करीब सप्ताह भर से मेला क्षेत्र में विभिन्न विभागों के गिनेचुने फील्ड कर्मचारी ही रह गए हैं।
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निगरानी के अभाव में नीलकंठ दर्शन को आ रहे हजारों यात्रियों को हर रोज मेला क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। मेला क्षेत्र में सबसे अधिक दिक्कत पेयजल और शौचालय, यूरिनल की है। जल संस्थान कोटद्वार डिवीजन की ओर से स्वर्गाश्रम-नीलकंठ पैदल मार्ग पर पेयजल आपूर्ति बंद कर दी गई है। वहीं स्टैंड पोस्टों पर से टोटियां हटा दी गई हैं। यही स्थिति नीलकंठ मंदिर के दो किमी. के दायरे में है। जलापूर्ति नहीं होने से लोगों को दुकानों से बोतल बंद पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। कांवड़ यात्रा के पहले पखवाड़े में भी नीलकंठ क्षेत्र में जलापूर्ति की यही स्थिति रही, तब जल संस्थान द्वारा यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं की आमद के बावजूद महज एक टैंकर से पानी की सप्लाई दी गई।
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कहीं पानी सप्लाई कम की तो कहीं कर दी बंद
जल संस्थान के जुड्डा पंपिंग स्टेशन पंप ऑपरेटर नंद किशोर का कहना है कि विभाग की ओर से हमें 25 जुलाई के बाद पेयजल पंपिंग 24 घंटे की बजाए आठ घंटे करने के लिखित निर्देश दिए गए हैं। जबकि जल संस्थान के लाइन फीटर प्यारे लाल जोशी ने बताया कि 25 जुलाई से विभाग के निर्देश पर पैदल मार्ग पर पेयजल लाइन पर सप्लाई बंद कर दी गई है। स्टैंड पोस्टों पर से टोटियां हटा दी गई हैं।
इन विभागों को देनी थी सात अगस्त तक व्यवस्था
यात्रा का जिम्मा एसडीएम यमकेश्वर, तहसीलदार, सीडीओ पौड़ी, जिला पंचायत, सीएमओ, ईई जलसंस्थान कोटद्वार, ईई ऊर्जा निगम, लोनिवि दुगड्डा, ईई गढ़वाल जल संस्थान ऋषिकेश, निदेशक राजाजी नेशनल पार्क, विधायक यमकेश्वर, प्रमुख क्षेत्र पंचायत और सदस्य जिला पंचायत को दी गई है।
ईई की सुनिए
पानी की सप्लाई बंद नहीं की गई है। बीते दिनों ऑपरेटर ने पैदल मार्ग पर सप्लाई सुचारु किए जाने की सूचना दी है। फिर भी इसे दिखवाया जाएगा।
ओमप्रकाश बहुगुणा, ईई जल संस्थान
मंदिर समिति की ओर से जिला प्रशासन व विभिन्न विभागों को नौ जुलाई से सात अगस्त तक श्रावण मेला व्यवस्थाओं के बाबत पत्र से सूचित किया गया है। मगर सभी विभागों के अधिकारी 21 जुलाई से नीलकंठ से गायब हैं। लिहाजा सभी व्यवस्थाएं लड़खड़ा गई हैं।
धन सिंह राणा, प्रतिनिधि नीलकंठ मंदिर समिति ।
डीएम की सुनिए
सभी विभागों से आठ अगस्त तक नीलकंठ में व्यवस्थाएं देने को कहा गया है। पेयजल और अन्य सभी दिक्कतों को दिखवाया जाएगा, उसे तत्काल बहाल कराया जाएगा। जिससे यात्रियों को परेशानी नहीं हो।
सुशील कुमार, डीएम पौड़ी।