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तिरोसी गांव के आठ परिवार पुर्नवास न होने के चलते खतरे के साये में जीने को मजबूर
Updated Wed, 26 Jul 2017 10:18 PM IST
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गोपेश्वर। जोशीमठ ब्लॉक में वर्ष 2013 से भूस्खलन की चपेट में आए तिरोसी गांव के आठ परिवारों का आज तक पुनर्वास नहीं हुआ है। पुनर्वास न होने पर प्रभावित परिवार खतरे के साए में रहने को मजबूर हैं।
जोशीमठ ब्लॉक की ग्राम पंचायत द्वींग-तपोंण के तिरोसी गांव के निचले हिस्से में वर्ष 2013 की आपदा के दौरान अलकनंदा के कटाव से भूस्खलन शुरू हुआ था। प्रशासन की ओर से गांव में हुए नुकसान का सर्वे कर गांव के आठ परिवारों को पुनर्वास के लिए चयनित किया गया, लेकिन प्रशासन की ओर से पुनर्वास को लेकर न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही भूस्खलन का ट्रीटमेंट किया गया। भूस्खलन क्षेत्र अब धीरे-धीरे गांव के प्राथमिक विद्यालय और भूमियाल मंदिर के समीप पहुंच गया है। ग्रामीणों के खेतों में भी दरारें पड़ने लगी हैं। ग्राम प्रधान द्विंग-तपौंण रीना देवी, अनिल राणा, मदन राणा, शिव सिंह राणा और दीपक राणा का कहना है कि कई बार शासन, प्रशासन और विधायकों से पुनर्वास की मांग की गई लेकिन आज भी स्थिति जस की तस बनी है। प्रभावित क्षतिग्रस्त मकानों में ही रहने को मजबूर हैं। इधर, जिला आपदा प्रबंध अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि तिरोसी गांव में हो रहे भूस्खलन जोन को शीघ्र दिखवाया जाएगा। आवश्यकता अनुसार सुधारीकरण अथवा पुनर्वास की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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