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एक महीने की बिजली की मीटर रीडिंग 2 यूनिट !
Updated Sat, 22 Jul 2017 10:38 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज/एचएनबी बेस अस्पताल के आवासीय परिसरों में रह रहे कतिपय कर्मचारियों की विद्युत मीटर रीडिंग प्रतिमाह 2 से 20 यूनिट आ रही है। इतनी कम रीडिंग आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर कोई कर्मचारी इतनी कम बिजली का उपभोग कैसे कर रहा है। कॉलेज के वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप ने भी मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच बैठा दी है।
मेडिकल कॉलेज/बेस अस्पताल का प्रतिमाह 10-12 लाख रुपये बिजली का बिल आता है। इसमें कॉलेज/अस्पताल के आवासीय परिसर का बिल भी शामिल है। गत वर्ष तक नियमविरुद्ध सरकारी खजाने से पूरे बिल का भुगतान होता था। मामला पकड़ में आने पर कॉलेज प्रशासन ने चिकित्सकों और अन्य स्टाफ को स्वयं बिजली बिल देने के आदेश जारी किए। इसके बाद आवासीय परिसरों में सब मीटर लगा दिए गए और मीटर रीडिंग के हिसाब से कॉलेज प्रशासन बिल वसूलने लगा। सब मीटरों की रीडिंग के अलावा कॉलेज के मुख्य विद्युत मीटर में जितनी रीडिंग दर्ज होती है, उसी के मुताबिक कॉलेज ऊर्जा निगम को भुगतान करता है, लेकिन बिजली खपत में ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। कॉलेेज प्रशासन को भी माजरा समझ में नहीं आ रहा था कि विद्युत बिल राशि में आवासीय कॉलोनी का हिस्सा इतना कम क्यों आ रहा हैं?
मामले की तह में जाने के लिए वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप ने कॉलेज के बिजली अनुभाग से सब मीटरों की रीडिंग संबंधी रजिस्टर तलब किया। रजिस्टर के पन्ने पलटते ही गड़बड़झाला सामने आ गया। कतिपय कर्मचारियों की एक माह की मीटर रीडिंग 2 से लेकर 20 यूनिट दर्ज थी। यही वजह है कि वह कॉलेज को मामूली बिल राशि का भुगतान कर रहे हैं, जिससे वित्तीयभार कॉलेज के ऊपर पड़ रहा है।
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कोट
यदि कोई टाइप-वन में रहने वाला व्यक्ति सामान्य रूप से बिजली का उपभोग करे, तब भी 80 से 100 यूनिट बिजली का उपभोग करेगा। बिजली अनुभाग के कर्मचारियों को संबंधित कर्मचारियों के मीटर और लाइन चेक करने के निर्देश दिए गए हैं। यह देखा जाएगा कि किसी फॉल्ट की वजह से ऐसा हो रहा है या बिल से बचने के लिए कोई छेड़छाड़ की गई है। विवेक स्वरूप, वित्त नियंत्रक राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर
मेडिकल कॉलेज/बेस अस्पताल का प्रतिमाह 10-12 लाख रुपये बिजली का बिल आता है। इसमें कॉलेज/अस्पताल के आवासीय परिसर का बिल भी शामिल है। गत वर्ष तक नियमविरुद्ध सरकारी खजाने से पूरे बिल का भुगतान होता था। मामला पकड़ में आने पर कॉलेज प्रशासन ने चिकित्सकों और अन्य स्टाफ को स्वयं बिजली बिल देने के आदेश जारी किए। इसके बाद आवासीय परिसरों में सब मीटर लगा दिए गए और मीटर रीडिंग के हिसाब से कॉलेज प्रशासन बिल वसूलने लगा। सब मीटरों की रीडिंग के अलावा कॉलेज के मुख्य विद्युत मीटर में जितनी रीडिंग दर्ज होती है, उसी के मुताबिक कॉलेज ऊर्जा निगम को भुगतान करता है, लेकिन बिजली खपत में ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। कॉलेेज प्रशासन को भी माजरा समझ में नहीं आ रहा था कि विद्युत बिल राशि में आवासीय कॉलोनी का हिस्सा इतना कम क्यों आ रहा हैं?
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मामले की तह में जाने के लिए वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप ने कॉलेज के बिजली अनुभाग से सब मीटरों की रीडिंग संबंधी रजिस्टर तलब किया। रजिस्टर के पन्ने पलटते ही गड़बड़झाला सामने आ गया। कतिपय कर्मचारियों की एक माह की मीटर रीडिंग 2 से लेकर 20 यूनिट दर्ज थी। यही वजह है कि वह कॉलेज को मामूली बिल राशि का भुगतान कर रहे हैं, जिससे वित्तीयभार कॉलेज के ऊपर पड़ रहा है।
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यदि कोई टाइप-वन में रहने वाला व्यक्ति सामान्य रूप से बिजली का उपभोग करे, तब भी 80 से 100 यूनिट बिजली का उपभोग करेगा। बिजली अनुभाग के कर्मचारियों को संबंधित कर्मचारियों के मीटर और लाइन चेक करने के निर्देश दिए गए हैं। यह देखा जाएगा कि किसी फॉल्ट की वजह से ऐसा हो रहा है या बिल से बचने के लिए कोई छेड़छाड़ की गई है। विवेक स्वरूप, वित्त नियंत्रक राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर