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हाईड्रो सीडिंग सिस्टम से सुधरेंगे बदरीनाथ हाईवे के भूस्खलन जोन

Mon, 10 Jul 2017 10:27 PM IST
Updated Mon, 10 Jul 2017 10:27 PM IST
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हाईड्रो सीडिंग सिस्टम से सुधरेंगे बदरीनाथ हाईवे के भूस्खलन जोन

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गोपेश्वर। बदरीनाथ हाईवे पर परेशानी का सबब बने भूस्खलन जोनों का ट्रीटमेंट अब हाइड्रो सीडिंग सिस्टम से किया जाएगा। पहले चरण में मैठाणा भूस्खलन जोन में इस सिस्टम से ट्रीटमेंट कार्य शुरू कर दिया गया है। यदि यह सिस्टम यहां सफल रहा तो हाइवे के अन्य 21 भूस्खलन क्षेत्रों में भी हाइड्रो सीडिंग सिस्टम से भूस्खलन की रोकथाम की जाएगी।
मैठाणा में वर्ष 2013 की आपदा के बाद से लगातार भूस्खलन हो रहा है। यहां करीब साढ़े तीन सौ मीटर तक हाईवे धंस चुका है। वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने भूस्खलन क्षेत्र के ट्रीटमेंट का कार्य बीआरओ से हटाकर लोक निर्माण विभाग (एनएच) को दे दिया था। बीते मई माह में एनएच की ओर से भूस्खलन का ट्रीटमेंट कार्य इटली की मेगा-फेरी कंपनी को दिया गया। कंपनी के इंजीनियरों ने भूस्खलन क्षेत्र में वायो इंजीनियरिंग सिस्टम के तहत हिल साइड तक करीब दो मीटर तक क्रेटवाल (जाली वाली दीवार) लगाई जा रही है। भूस्खलन से कमजोर पड़ी पहाड़ी पर हाइड्रो सीडिंग सिस्टम के जरिए हरी घास और विभिन्न प्रजाति के पौधों के बीजों का रोपण किया जा रहा है।
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क्या है हाइड्रो सीडिंग सिस्टम
परिवहन मंत्रालय देहरादून के इंजीनियर रजत पांडे का कहना है कि हाइड्रो सीडिंग सिस्टम के तहत पहाड़ी पर ऐसी प्रजाति के पौधों के बीजों को बोया जाता है, जिनकी जड़ें लंबी होती हैं, जिससे मिट्टी नीचे की ओर नहीं खिसकती है। उन्होंने बताया कि केमिकल के साथ स्थानीय प्रजाति के पौधों के बीज, खाद, फर्टिलाइजर और हरी घास मिलाकर एक मशीन में डाले जाते हैं। बाद में इस मिश्रण को स्प्रे से कमजोर पहाड़ी पर उड़ेला जाता है। करीब एक सप्ताह में तेजी से पौधे और हरी घास उगनी शुरू हो जाती है। एक माह में पहाड़ी पर हरियाली आ जाती है, जिसके बाद मिट्टी से भूस्खलन थम जाता है। साथ ही बारिश का पानी भूमिगत होने के बजाय सीधे नीचे की ओर बहना शुरू हो जाता है।
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बदरीनाथ हाईवे के भूस्खलन जोन
नगरासू, कमेड़ा, लंगासू, देवलीबगड़, प्रथाडीप, मैठाणा, बाजपुर, चमोली, भीमतला, कोड़िया, लंगसी, पागल नाला, पाताल गंगा, पैनी मोड़, हेलंग, झड़कुला, हाथी पहाड़, टैय्या पुल, बलदौड़ा, गोविंदघाट, लामबगड़, रड़ांग बैंड।


कोेट
मैठाणा में हाइड्रो सीडिंग सिस्टम से भूस्खलन रोकने का कार्य चल रहा है। इसे बदरीनाथ हाईवे पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया जा रहा है, यदि यह सिस्टम सफल रहा तो अन्य भूस्खलन क्षेत्रों में भी इसी विधि से भूस्खलन की रोकथाम की जाएगी। - पंकज मोर्य, परियोजना निदेशक, परिवहन मंत्रालय केंद्र सरकार।
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