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एनॉटमी विभाग में हुआ एमसीआई का दौरा
Updated Sat, 17 Jun 2017 09:03 PM IST
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एनॉटमी विभाग मेें एमसीआई का दौरा
एमसीआई से मिलनी है मान्यता, अभी मिली है एलओपी
राजकीय मेडिकल कॉलेज में सिर्फ एनॉटमी विभाग में है पीजी
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के एनॉटमी (शरीर रचना विज्ञान) विभाग में पीजी की मान्यता के लिए एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) ने निरीक्षण कर लिया है। एमसीआई के टीम (एसेसर) एसेसमेंट कर लौट गई हैं। टीम की रिपोर्ट कॉलेज में एनॉटमी विभाग में अध्ययन एकमात्र छात्रा के भविष्य का निर्धारण भी करेगी।
वर्ष 2008 में स्थापित श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय मेें सिर्फ एनॉटमी विभाग में पीजी कोर्स चल रहा है। वर्ष 2014 में निरीक्षण के बाद एमसीआई ने 4 सीट के लिए एलओपी (अनुमति पत्र) दिया था। हालांकि यहां वर्तमान में सिर्फ एक ही छात्रा पीजी कर रही है।
एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार एलओपी के तीन साल बाद मान्यता लेनी पड़ती है। नियमानुसार, मान्यता के लिए एमसीआई का निरीक्षण फाइनल ईअर की प्रयोगात्मक परीक्षा के दौरान होता है, जिसमें एमसीआई परीक्षा के तौर-तरीके परखती है। इसी क्रम में शुक्रवार को एमसीआई से प्रो. बीसी दत्ता के साथ ही पटना और बनारस से दो परीक्षक पहुंचे। प्रो. दत्ता ने प्रयोगात्मक परीक्षा देखने के साथ ही विभाग में उपलब्ध संसाधन और फैकल्टी का भी जायजा लिया। संस्थान के प्राचार्य प्रो. सीएमएस रावत ने बताया कि टीम आकलन कर लौट गए है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर एमसीआई मान्यता देगी।
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एमसीआई से मिलनी है मान्यता, अभी मिली है एलओपी
राजकीय मेडिकल कॉलेज में सिर्फ एनॉटमी विभाग में है पीजी
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के एनॉटमी (शरीर रचना विज्ञान) विभाग में पीजी की मान्यता के लिए एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) ने निरीक्षण कर लिया है। एमसीआई के टीम (एसेसर) एसेसमेंट कर लौट गई हैं। टीम की रिपोर्ट कॉलेज में एनॉटमी विभाग में अध्ययन एकमात्र छात्रा के भविष्य का निर्धारण भी करेगी।
वर्ष 2008 में स्थापित श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय मेें सिर्फ एनॉटमी विभाग में पीजी कोर्स चल रहा है। वर्ष 2014 में निरीक्षण के बाद एमसीआई ने 4 सीट के लिए एलओपी (अनुमति पत्र) दिया था। हालांकि यहां वर्तमान में सिर्फ एक ही छात्रा पीजी कर रही है।
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एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार एलओपी के तीन साल बाद मान्यता लेनी पड़ती है। नियमानुसार, मान्यता के लिए एमसीआई का निरीक्षण फाइनल ईअर की प्रयोगात्मक परीक्षा के दौरान होता है, जिसमें एमसीआई परीक्षा के तौर-तरीके परखती है। इसी क्रम में शुक्रवार को एमसीआई से प्रो. बीसी दत्ता के साथ ही पटना और बनारस से दो परीक्षक पहुंचे। प्रो. दत्ता ने प्रयोगात्मक परीक्षा देखने के साथ ही विभाग में उपलब्ध संसाधन और फैकल्टी का भी जायजा लिया। संस्थान के प्राचार्य प्रो. सीएमएस रावत ने बताया कि टीम आकलन कर लौट गए है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर एमसीआई मान्यता देगी।
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