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ग्रीष्मोत्सव में बही गीत, संगीत और नृत्य की त्रिवेणी
Updated Thu, 08 Jun 2017 10:19 PM IST
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जै जै हो बदरीनाथा...से बांधा समा
पौड़ी। पौड़ी ग्रीष्मोत्सव-2017 की प्रथम सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय सांस्कृतिक क्लबों के कलाकारों ने गीत, संगीत और नृत्य की त्रिवेणी बहा दी। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में लोक कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुति से दर्शक लोक संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए।
पौड़ी ग्रीष्मोत्सव के आगाज के साथ ही बुधवार देर शाम स्थानीय रामलीला मैदान में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। गढ़ श्रेष्ठ लोक कला सांस्कृतिक समिति के नरेंद्र धीमान ने भगवान बदरीनाथ, केदारनाथ की स्तुति ‘जै जै हो बदरीनाथा, जै काशी केदारा, जै, जै हिंवाला...’ से कार्यक्रम की शुरुआत की। युवा गायक दीपक द्वारा प्रस्तुत देवी जागर और गढ़वाली गीत ‘मैं जांदू दूर परदेशा, खुद लगली...’ की बेहतरीन प्रस्तुति पर दर्शक जमकर झूमे। इस संस्था ने ‘रानीखेता रामढोला’ की धुन पर सामूहिक नृत्य भी प्रस्तुत किया। युवा गायिका संपति ने गढ़वाली गीत ‘मुल-मुल कैकू हैंसणी छैं तू, हे कुलैं की डाली...’ गाकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। गढ़ ज्योति सांस्कृतिक कला मंच के कलाकारों ने गढ़वाली गीत ‘फ्ंयोली ज्वान ह्वैगे...’, ‘गीत लांदी तांदी बल...’ और ‘हमारा धारा, छुटा-बड़ा बुग्याल झुमैलो...’ की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। पार्श्व गायन में अंजलि और मीनाक्षी की प्रस्तुति शानदार रही। शैलजा सामाजिक संस्था के कलाकारों ने उत्तराखंड के पारंपरिक लोकगीत व लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। नंदा राजजात पर आधारित स्तुति नृत्य ‘नंदा तेरी जात, कैलाश लिजौला सज-धजी की...’ प्रस्तुत कर नंदा राजजात यात्रा के मंच पर साक्षात दर्शन कराए। इस संस्था के कलाकारों ने ‘स्याली बंपाली, त्वै मिलण ओलु हे स्याली नीती गमशाली...’ की बेहतरीन प्रस्तुतियां दी। युवा गायिका किरन ने ‘चंदना म्यारा पहाड़ एई...’ गाकर खूब तालियां बटोरीं। पार्श्व गायन में राकेश मंद्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर ग्रीष्मोत्सव के संयोजक नगर पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम, लोकगायक और निर्देशक अनिल बिष्ट, कमल किशोर, वीरेंद्र खंकरियाल, तपेश्वर प्रसाद, दीपक काला, सतेंद्र रावत, रमेश नेगी, परवेंद्र रावत, मनोज बिष्ट, रेवती डंगवाल, महावीर रावत और भरत रावत आदि मौजूद रहे।
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पौड़ी। पौड़ी ग्रीष्मोत्सव-2017 की प्रथम सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय सांस्कृतिक क्लबों के कलाकारों ने गीत, संगीत और नृत्य की त्रिवेणी बहा दी। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में लोक कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुति से दर्शक लोक संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए।
पौड़ी ग्रीष्मोत्सव के आगाज के साथ ही बुधवार देर शाम स्थानीय रामलीला मैदान में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। गढ़ श्रेष्ठ लोक कला सांस्कृतिक समिति के नरेंद्र धीमान ने भगवान बदरीनाथ, केदारनाथ की स्तुति ‘जै जै हो बदरीनाथा, जै काशी केदारा, जै, जै हिंवाला...’ से कार्यक्रम की शुरुआत की। युवा गायक दीपक द्वारा प्रस्तुत देवी जागर और गढ़वाली गीत ‘मैं जांदू दूर परदेशा, खुद लगली...’ की बेहतरीन प्रस्तुति पर दर्शक जमकर झूमे। इस संस्था ने ‘रानीखेता रामढोला’ की धुन पर सामूहिक नृत्य भी प्रस्तुत किया। युवा गायिका संपति ने गढ़वाली गीत ‘मुल-मुल कैकू हैंसणी छैं तू, हे कुलैं की डाली...’ गाकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। गढ़ ज्योति सांस्कृतिक कला मंच के कलाकारों ने गढ़वाली गीत ‘फ्ंयोली ज्वान ह्वैगे...’, ‘गीत लांदी तांदी बल...’ और ‘हमारा धारा, छुटा-बड़ा बुग्याल झुमैलो...’ की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। पार्श्व गायन में अंजलि और मीनाक्षी की प्रस्तुति शानदार रही। शैलजा सामाजिक संस्था के कलाकारों ने उत्तराखंड के पारंपरिक लोकगीत व लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। नंदा राजजात पर आधारित स्तुति नृत्य ‘नंदा तेरी जात, कैलाश लिजौला सज-धजी की...’ प्रस्तुत कर नंदा राजजात यात्रा के मंच पर साक्षात दर्शन कराए। इस संस्था के कलाकारों ने ‘स्याली बंपाली, त्वै मिलण ओलु हे स्याली नीती गमशाली...’ की बेहतरीन प्रस्तुतियां दी। युवा गायिका किरन ने ‘चंदना म्यारा पहाड़ एई...’ गाकर खूब तालियां बटोरीं। पार्श्व गायन में राकेश मंद्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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इस अवसर पर ग्रीष्मोत्सव के संयोजक नगर पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम, लोकगायक और निर्देशक अनिल बिष्ट, कमल किशोर, वीरेंद्र खंकरियाल, तपेश्वर प्रसाद, दीपक काला, सतेंद्र रावत, रमेश नेगी, परवेंद्र रावत, मनोज बिष्ट, रेवती डंगवाल, महावीर रावत और भरत रावत आदि मौजूद रहे।
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