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महिला एवं बाल गृहों का पंजीकरण अनिवार्य
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महिला एवं बाल गृहों का पंजीकरण अनिवार्य
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। सरकार और बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य में बिना पंजीकरण चल रहे नारी एवं बाल निकेतनों पर शिकंजा कस दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नए साल से प्रदेश में सिर्फ पंजीकरण बाल एवं नारी निकेतनों को ही संचालन की अनुमति दी जाएगी। जो बाल एवं नारी गृह पंजीकरण नहीं कराएंगे उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएंगी। इसके अलावा भी बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अन्य कई निर्णय लिए है।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कई बिंदुओं पर रूपरेखा तैयार करते हुए बताया कि उत्तराखंड बाल आयोग ने आईसीपीएस योजना के अंतर्गत स्पांसरशिप की आय 24 से बढ़ाकर 72 हजार कर दी गई है। साथ ही जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलेगा। वहीं पॉक्सो, यौन उत्पीड़न आदि मामलों के पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा दिलाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश के सभी महिला एवं बाल गृहों का पंजीकरण समाज कल्याण विभाग में अनिवार्य है और प्रदेश के सभी बोर्डिंग स्कूल व मदरसों का हर साल सत्यापन किया जाएगा। वहीं बालक उत्पीड़न के मामलों में शीघ्र सुनवाई की जाएगी। बताया कि अक्सर देखा गया है कि बालकों को न्याय मिलने में देरी होती है लेकिन अब उन्हें शीघ्र न्याय दिलाया जाएगा।
प्रदेश में सभी जिला में बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड अध्यक्ष एवं सदस्यों के पदों पर नियुक्ति लंबित चल रही है जिन पर शीघ्र भर्ती की जाएगी। महिला एवं बाल निकेतनों में रह रहे दूसरे राज्यों बच्चों एवं महिलाओं को चिन्हित करते हुए उन्हें उनके राज्यों में भेजा जाएगा। वहीं, ऐसे सरकारी स्कूल जो बंद हो चुके हैं, उनके खाली भवनों को ठीक कराकर वहां बाल गृह स्थापित किए जाएंगे। बताया कि नए साल में गरीब परिवारों के 25 प्रतिशत बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ना सुनिश्चित किया जाएगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। सरकार और बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य में बिना पंजीकरण चल रहे नारी एवं बाल निकेतनों पर शिकंजा कस दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नए साल से प्रदेश में सिर्फ पंजीकरण बाल एवं नारी निकेतनों को ही संचालन की अनुमति दी जाएगी। जो बाल एवं नारी गृह पंजीकरण नहीं कराएंगे उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएंगी। इसके अलावा भी बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अन्य कई निर्णय लिए है।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कई बिंदुओं पर रूपरेखा तैयार करते हुए बताया कि उत्तराखंड बाल आयोग ने आईसीपीएस योजना के अंतर्गत स्पांसरशिप की आय 24 से बढ़ाकर 72 हजार कर दी गई है। साथ ही जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलेगा। वहीं पॉक्सो, यौन उत्पीड़न आदि मामलों के पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा दिलाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश के सभी महिला एवं बाल गृहों का पंजीकरण समाज कल्याण विभाग में अनिवार्य है और प्रदेश के सभी बोर्डिंग स्कूल व मदरसों का हर साल सत्यापन किया जाएगा। वहीं बालक उत्पीड़न के मामलों में शीघ्र सुनवाई की जाएगी। बताया कि अक्सर देखा गया है कि बालकों को न्याय मिलने में देरी होती है लेकिन अब उन्हें शीघ्र न्याय दिलाया जाएगा।
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प्रदेश में सभी जिला में बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड अध्यक्ष एवं सदस्यों के पदों पर नियुक्ति लंबित चल रही है जिन पर शीघ्र भर्ती की जाएगी। महिला एवं बाल निकेतनों में रह रहे दूसरे राज्यों बच्चों एवं महिलाओं को चिन्हित करते हुए उन्हें उनके राज्यों में भेजा जाएगा। वहीं, ऐसे सरकारी स्कूल जो बंद हो चुके हैं, उनके खाली भवनों को ठीक कराकर वहां बाल गृह स्थापित किए जाएंगे। बताया कि नए साल में गरीब परिवारों के 25 प्रतिशत बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ना सुनिश्चित किया जाएगा।
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