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आज भी अनसुलझे हैं रामानुजम के कई सिद्धांत
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विकासनगर। श्रीनिवास रामानुजम की जयंती पर शनिवार को राष्ट्रीय गणित दिवस के तौर पर मनाई गई। इस अवसर पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर के बीएड विभाग में संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में वक्ताओं ने बताया कि ‘संख्याओं के जादूगर’ के कई सिद्धांत आज भी अनसुलझे हैं।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में प्रो. आरएस असवाल ने रामानुजम के जीवन व भारतीय वेद आधारित ज्ञान विज्ञान का आधुनिक शिक्षा दर्शन में उपयोगिता की जानकारी दी। डॉ. आरएल केष्टवाल ने गणित को जन सामान्य में रुचिपूर्ण बनाने पर जोर दिया। बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि बहुखंडी ने गणित की उपयोगिता और डॉ. बीएस रावत ने व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। इसके अलावा बीएड विभाग के छात्र-छात्राओं ने मॉडल के माध्यम से गणित के व्यावहारिक उपयोग को प्रदर्शित किया। इस अवसर पर प्रिंसी कर्णवाल, डॉ. सत्येंद्र कुमार, डॉ. विधि ढौंढियाल, कविता बडोला आदि मौजूद रहे।
दूसरी ओर प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा राजकीय प्राथमिक विद्यालय प्रतीतपुर में श्रीनिवास रामानुजम की जयंती मनाई गई। फाउंडेशन के अबरार हुसैन ने छात्र-छात्राओं को बताया कि रामानुजम के गणित पर लिखे लेख तत्कालीन समय की सर्वोत्तम विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित होते थे। अथक परिश्रम के कारण रामानुजन अस्वस्थ्य रहने लगे और मात्र 32 वर्ष की आयु में ही उनका निधन हो गया। उनके निधन के पश्चात उनकी 5000 से अधिक प्रमेयों को छपवाया गया और उनमें से अधिकतर को कई दशक बाद तक सुलझाया नहीं जा सका। रामानुजम की गणित में की गई अदभुत खोजें आज के आधुनिक गणित और विज्ञान की आधारशीला बनी। संख्या-सिद्धांत पर अद्भुत कार्य के लिए रामानुजम को ‘संख्याओं का जादूगर’ कहा जाता है। रामानुजन को ‘गणितज्ञों का गणितज्ञ’ भी कहा जाता है। संगोष्ठा में विद्यालय की प्रधानाध्यापक सुशीला बिंजोला, उमा शंकर, सपना सक्सेना, अशोक कुमार, प्रवीन कुमार, नासरा परवीन, विजय लक्ष्मी आदि मौजूद रहे।
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विकासनगर। श्रीनिवास रामानुजम की जयंती पर शनिवार को राष्ट्रीय गणित दिवस के तौर पर मनाई गई। इस अवसर पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर के बीएड विभाग में संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में वक्ताओं ने बताया कि ‘संख्याओं के जादूगर’ के कई सिद्धांत आज भी अनसुलझे हैं।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में प्रो. आरएस असवाल ने रामानुजम के जीवन व भारतीय वेद आधारित ज्ञान विज्ञान का आधुनिक शिक्षा दर्शन में उपयोगिता की जानकारी दी। डॉ. आरएल केष्टवाल ने गणित को जन सामान्य में रुचिपूर्ण बनाने पर जोर दिया। बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि बहुखंडी ने गणित की उपयोगिता और डॉ. बीएस रावत ने व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। इसके अलावा बीएड विभाग के छात्र-छात्राओं ने मॉडल के माध्यम से गणित के व्यावहारिक उपयोग को प्रदर्शित किया। इस अवसर पर प्रिंसी कर्णवाल, डॉ. सत्येंद्र कुमार, डॉ. विधि ढौंढियाल, कविता बडोला आदि मौजूद रहे।
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दूसरी ओर प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा राजकीय प्राथमिक विद्यालय प्रतीतपुर में श्रीनिवास रामानुजम की जयंती मनाई गई। फाउंडेशन के अबरार हुसैन ने छात्र-छात्राओं को बताया कि रामानुजम के गणित पर लिखे लेख तत्कालीन समय की सर्वोत्तम विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित होते थे। अथक परिश्रम के कारण रामानुजन अस्वस्थ्य रहने लगे और मात्र 32 वर्ष की आयु में ही उनका निधन हो गया। उनके निधन के पश्चात उनकी 5000 से अधिक प्रमेयों को छपवाया गया और उनमें से अधिकतर को कई दशक बाद तक सुलझाया नहीं जा सका। रामानुजम की गणित में की गई अदभुत खोजें आज के आधुनिक गणित और विज्ञान की आधारशीला बनी। संख्या-सिद्धांत पर अद्भुत कार्य के लिए रामानुजम को ‘संख्याओं का जादूगर’ कहा जाता है। रामानुजन को ‘गणितज्ञों का गणितज्ञ’ भी कहा जाता है। संगोष्ठा में विद्यालय की प्रधानाध्यापक सुशीला बिंजोला, उमा शंकर, सपना सक्सेना, अशोक कुमार, प्रवीन कुमार, नासरा परवीन, विजय लक्ष्मी आदि मौजूद रहे।
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