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हर्षोल्लास से मनाई गई हरियाली तीज
Updated Tue, 14 Aug 2018 02:28 AM IST
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हर्षोल्लास से मनाई गई हरियाली तीज
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। हरियाली तीज सोमवार को हर्षोल्लास से मनाई गई। सुहागिनों ने व्रत रखा और पार्वती की पूजा अर्चना कर पति की लंबी आयु की कामना की। घरों में पकवान बनाए गए। महिलाओं ने मिल कर सावन गीत गए और झूला झूला।
हरियाली तीज सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया की तिथि को मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है इस दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इससे पार्वती खुशी से झूम उठीं। तब से हर सावन महीने की शुक्ल तृतीया को हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है।
यह व्रत महिलाएं अपने लिए शिव और पार्वती जैसे पति पत्नी के रूप में कामना करने के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन नवविवाहिता अपने मायके आती हैं और अपने साथ नए कपड़े और मिठाइयां लाती हैं जिसे सिंधारा कहा जाता है। इस दिन महिलाएं मेहंदी लगाकर श्रृंगार करती हैं और झूला झूलती हैं। इस दिन विवाहित महिलाएं मिट्टी से पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजा के बाद इन मूर्तियों को किसी नदी में प्रवाहित कर देती हैं।
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महिलाओं ने पार्लरों में पहुंचकर मेहंदी लगवाई। सजने के लिए भी पार्लरों में खासी भीड़ नजर आई। कास्मेटिक और कपड़ों की दुकानों पर सुबह से शाम तक श्रृंगार व कपड़े खरीदने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। महिलाओं के साथ में बालिकाएं भी मेहंदी लगवाती नजर आईं। तीज पर दुकानदारों व पार्लर व मेहंदी लगाने वालों ने अच्छी खासी कमाई की।
शादी के बाद पहली तीज मनाने वालों के लिए ये खास मौका था। मायके से बुलावा भेज लड़कियों को बुलाया गया था। इससे पहले तीज पर मायके वालों ने बेटी के ससुराल सिंधारा भिजवाया।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। हरियाली तीज सोमवार को हर्षोल्लास से मनाई गई। सुहागिनों ने व्रत रखा और पार्वती की पूजा अर्चना कर पति की लंबी आयु की कामना की। घरों में पकवान बनाए गए। महिलाओं ने मिल कर सावन गीत गए और झूला झूला।
हरियाली तीज सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया की तिथि को मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है इस दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इससे पार्वती खुशी से झूम उठीं। तब से हर सावन महीने की शुक्ल तृतीया को हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है।
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यह व्रत महिलाएं अपने लिए शिव और पार्वती जैसे पति पत्नी के रूप में कामना करने के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन नवविवाहिता अपने मायके आती हैं और अपने साथ नए कपड़े और मिठाइयां लाती हैं जिसे सिंधारा कहा जाता है। इस दिन महिलाएं मेहंदी लगाकर श्रृंगार करती हैं और झूला झूलती हैं। इस दिन विवाहित महिलाएं मिट्टी से पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजा के बाद इन मूर्तियों को किसी नदी में प्रवाहित कर देती हैं।
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महिलाओं ने पार्लरों में पहुंचकर मेहंदी लगवाई। सजने के लिए भी पार्लरों में खासी भीड़ नजर आई। कास्मेटिक और कपड़ों की दुकानों पर सुबह से शाम तक श्रृंगार व कपड़े खरीदने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। महिलाओं के साथ में बालिकाएं भी मेहंदी लगवाती नजर आईं। तीज पर दुकानदारों व पार्लर व मेहंदी लगाने वालों ने अच्छी खासी कमाई की।
शादी के बाद पहली तीज मनाने वालों के लिए ये खास मौका था। मायके से बुलावा भेज लड़कियों को बुलाया गया था। इससे पहले तीज पर मायके वालों ने बेटी के ससुराल सिंधारा भिजवाया।