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कांवड़ पटरी

Sat, 14 Jul 2018 12:13 AM IST
Updated Sat, 14 Jul 2018 12:13 AM IST
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कांवड़ पटरी

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हरिद्वार। विश्व की सबसे बड़ी पैदल धार्मिक कांवड़ यात्रा शुरू होने में अब केवल 16 दिन बचे हैं और जटवाड़ा पुल से बहादराबाद तक गंगनहर पटरी की व्यवस्थाएं बेपटरी हैं। गंगनहर पटरी पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं। इन गड्ढों में बारिश के दौरान पानी भर जाता है। ऐसे में यात्रा के दौरान यहां से गुजरने वाले शिवभक्तों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान बाहरी प्रदेशों से करोड़ों शिवभक्त गंगाजल लेने आते हैं। शिवभक्त हरिद्वार तो रेल और बसों से आते हैं, लेकिन कांवड़ उठाने के बाद अधिकांश पैदल की वापसी करते हैं। यात्रा शुरू होने के कुछ दिन तक हाईवे पर यातायात सामान्य बना रहे इसके लिए पैदल जाने वाले कांवड़ियों को गंगनहर पटरी से भेजा जाता है। इस दौरान हर रोज हजारों कांवडिये डामकोठी, सिंहद्वार, पुल जटवाड़ा से होकर बहादराबाद, रुड़की और नारसन होते हुए भेजा जाता है। यात्रा शुरू होने में अब कम समय बचा है और प्रशासन ने पटरी की मरम्मत के लिए काम शुरू नहीं किया। हमेशा प्रशासन यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले ही गड्ढे भरने और पैचवर्क का काम करता है। यह पहली ही बारिश में बह जाता है। ऐसे में पैदल चलने वाले कांवड़ियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डामकोठी से पुल जटवाड़ा तक तो पटरी की हालत ठीक है। इसके बाद बहादराबाद तक बदहाल बनी है।
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छह किलोमीटर का सौंदर्यीकरण में अधर में
कांवड़ यात्रा सुगम और शहर के लोगों के लिए सुबह-शाम की सैर के लिए तैयार की जा रही छह किलोमीटर लंबी कांवड़ पटरी का काम पूरा नहीं हो पाया है। जटवाड़ा पुल से पूर्व पड़ने वाले विश्वकर्मा सेतु के समीप बनी रेलवे पटरी कांवड़ पटरी के निर्माण में बाधा बनी है। कांवड़ पटरी के समीप ही तीन करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा मल्टी फैसिलिटी सेंटर का निर्माण भी अभी पूरा नहीं हो पाया है।
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एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहायतित पर्यटन संरचना विकास निवेश कार्यक्रम के तहत 19 सितंबर वर्ष 2015 को सौंदर्यीकरण का काम शुरू कर दिया था। लगभग 22 करोड़ 38 लाख रुपये की इस योजना को 21 जुलाई 2017 पूर्ण होना था। निर्माण कार्य को लेकर कई बैठक हुई और कई बार अधिकारियों ने निरीक्षण कर जल्द काम पूरा करने के निर्देश भी दिए थे। योजना को शुरू हुए तीन वर्ष पूर्ण होने को हैं, लेकिन अभी तक आधा कार्य ही हो पाया है। इस छह किलोमीटर के दायरे में पटरी मार्ग पर रैलिंग लगाई जानी थी। यह काम भी नहीं हो पाया। बेंच बनाने और पौधरोपण का काम शुरू नहीं हो सका है। पथ प्रकाश की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। सबसे ज्यादा समस्या विश्वकर्मा सेतु के समीप है। यहां रेलवे पटरी होने से कांवड़ पटरी का कार्य रुका हुआ है। कांवड़ यात्रा के दौरान रेलवे ट्रैक को पार करना कांवडियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। वहीं तीन करोड़ की लागत से बन रहे मल्टी फैसिलिटी सेंटर का भी पूरा नहीं हो सका।

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किसी मार्ग से जाएंगे कांवडिये
कांवड़ पटरी का कार्य पूरा न होने के कारण कांवड़ियों के मार्ग को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यदि अधूरी कावंड़ पटरी के कारण कांवड़ियों को ज्वालापुर के रास्ते होकर निकाला जाएगा तो स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ सकता है।
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