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राजाजी में हाथियों के लिए मौत बनकर दौड़ रही तेज रफ्तार ट्रेन ते
Updated Wed, 21 Mar 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राजाजी टाइगर रिजर्व में तेज रफ्तार ट्रेनें हाथियों के लिए मौत बनकर दौड़ रही हैं। वन क्षेत्र में ट्रेन की टक्कर से अब तक 27 हाथियों की मौत हो चुकी है। वन विभाग के मुताबिक, नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की जो गति निर्धारित की है, चालक उससे तेज स्पीड से ट्रेन दौड़ा रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक वास स्थल है। नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने इस क्षेत्र से रेलवे को कुछ शर्तों के साथ ट्रेन चलाने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने रात में 30 से 35 और दिन में 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार निर्धारित की है, लेकिन अधिकतर ट्रेनें 50 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार से दौड़ रही हैं। जबकि, कुछ ट्रेनें तो 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक चलाई जा रही हैं।
इलेक्ट्रिक ट्रेन के लिए तो इस शर्त पर अनुमति दी गई कि रेलवे निर्धारित से अधिक गति से ट्रेन नहीं चलाएगा। इसके अलावा जगह-जगह इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाने सहित सुरक्षा के अन्य उपाय भी किए जाएंगे, लेकिन इनका पालन किए बगैर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाई जा रही हैं। वन्य जीव प्रतिपालक प्रदीप कुमार का कहना है कि जंगल में पानी के लिए भी कई बार हाथी रेलवे ट्रैक पार कर एक से दूसरे क्षेत्र में जाते हैं और कई बार ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं।
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राजाजी टाइगर रिजर्व में तेज रफ्तार ट्रेनें हाथियों के लिए मौत बनकर दौड़ रही हैं। वन क्षेत्र में ट्रेन की टक्कर से अब तक 27 हाथियों की मौत हो चुकी है। वन विभाग के मुताबिक, नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की जो गति निर्धारित की है, चालक उससे तेज स्पीड से ट्रेन दौड़ा रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक वास स्थल है। नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने इस क्षेत्र से रेलवे को कुछ शर्तों के साथ ट्रेन चलाने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने रात में 30 से 35 और दिन में 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार निर्धारित की है, लेकिन अधिकतर ट्रेनें 50 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार से दौड़ रही हैं। जबकि, कुछ ट्रेनें तो 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक चलाई जा रही हैं।
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इलेक्ट्रिक ट्रेन के लिए तो इस शर्त पर अनुमति दी गई कि रेलवे निर्धारित से अधिक गति से ट्रेन नहीं चलाएगा। इसके अलावा जगह-जगह इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाने सहित सुरक्षा के अन्य उपाय भी किए जाएंगे, लेकिन इनका पालन किए बगैर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाई जा रही हैं। वन्य जीव प्रतिपालक प्रदीप कुमार का कहना है कि जंगल में पानी के लिए भी कई बार हाथी रेलवे ट्रैक पार कर एक से दूसरे क्षेत्र में जाते हैं और कई बार ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं।
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