{"_id":"5957dce54f1c1b59448b49b9","slug":"141498930405-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लालपुल के पास मंदिर तोड़ने पर भड़के संगठन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लालपुल के पास मंदिर तोड़ने पर भड़के संगठन
Updated Sat, 01 Jul 2017 11:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटद्वार। बदरीनाथ मार्ग पर स्थित लालपुल के पास वन विभाग द्वारा वर्षों पुराने मंदिर को तोड़ने के मामले पर कई संगठन भड़के हुए हैं। नगर के सभासदों ने जहां एक ओर हिंदू संगठनों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग की है, वहीं श्रीसिद्धबली मंदिर समिति और युवा कांग्रेसियों ने तोड़े गए मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग शासन, प्रशासन और प्रदेश सरकार से की है।
शनिवार को नगर पालिका के सभासदों माया ध्यानी, विनय भाटिया, महेश भाटिया, विवेक अग्रवाल, प्रमोद भाटिया, ज्योति चौधरी और रमेश चौधरी ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर नायब तहसीलदार हरिमोहन खंडूड़ी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सभासदों ने लालपुल के पास वर्षों पूर्व बने मंदिर को तोड़ने और हिंदू संगठनों पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का विरोध किया। कहा कि उक्त मंदिर वन अधिनियम के बनने से पूर्व का बना है। डीएफओ लैंसडौन के तुगलकी फरमान से हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंची है। कहा कि मंदिर तोड़ने का विरोध करने पर उल्टे हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों पर मुकदमे ठोक दिए गए हैं। मंदिर तोड़ने वालों पर यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हिंदू समाज सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा।
उधर, श्री सिद्धबली मंदिर समिति की ओर से भी प्राचीन मंदिर को तोड़ने का विरोध दर्ज करवाते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। कहा गया कि डीएफओ लैंसडौन ने आजादी के पूर्व से निर्मित उस मंदिर को ध्वस्त किया है, जहां पर हिंदू समाज के लोगों की गहरी आस्था थी।
विज्ञापन
उधर, युवा कांग्रेस के विधानसभा क्षेत्र उपाध्यक्ष सूरज प्रसाद कांती की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में लालपुल मंदिर को तोड़ने की तीखी निंदा की गई। युवा कांग्रेसियों ने मंदिर के पुन: निर्माण कराने और हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग की है। बैठक में अरुण भारती, नमन रस्तोगी, नरेश कोटनाला, सुखवीर सिंह चौहान, रितिक नेगी, सौरव पांडे, आशीष चौधरी, मयंक राजपूत आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
शनिवार को नगर पालिका के सभासदों माया ध्यानी, विनय भाटिया, महेश भाटिया, विवेक अग्रवाल, प्रमोद भाटिया, ज्योति चौधरी और रमेश चौधरी ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर नायब तहसीलदार हरिमोहन खंडूड़ी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सभासदों ने लालपुल के पास वर्षों पूर्व बने मंदिर को तोड़ने और हिंदू संगठनों पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का विरोध किया। कहा कि उक्त मंदिर वन अधिनियम के बनने से पूर्व का बना है। डीएफओ लैंसडौन के तुगलकी फरमान से हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंची है। कहा कि मंदिर तोड़ने का विरोध करने पर उल्टे हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों पर मुकदमे ठोक दिए गए हैं। मंदिर तोड़ने वालों पर यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हिंदू समाज सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा।
विज्ञापन
उधर, श्री सिद्धबली मंदिर समिति की ओर से भी प्राचीन मंदिर को तोड़ने का विरोध दर्ज करवाते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। कहा गया कि डीएफओ लैंसडौन ने आजादी के पूर्व से निर्मित उस मंदिर को ध्वस्त किया है, जहां पर हिंदू समाज के लोगों की गहरी आस्था थी।
विज्ञापन
उधर, युवा कांग्रेस के विधानसभा क्षेत्र उपाध्यक्ष सूरज प्रसाद कांती की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में लालपुल मंदिर को तोड़ने की तीखी निंदा की गई। युवा कांग्रेसियों ने मंदिर के पुन: निर्माण कराने और हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग की है। बैठक में अरुण भारती, नमन रस्तोगी, नरेश कोटनाला, सुखवीर सिंह चौहान, रितिक नेगी, सौरव पांडे, आशीष चौधरी, मयंक राजपूत आदि मौजूद थे।