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युवाओं ने सीखे बांस से उत्पाद बनाने के गुर
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
केंद्र सरकार की ओर से संचालित हरित कौशल विकास कार्यक्रम के तहत युवाआें को वन अनुसंधान संस्थान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बांस से उत्पाद बनाने के गुर सिखाए गए। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान युवाओं को बांस की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी देने के साथ ही आकर्षक चीजें बनाना सिखाया गया। प्रशिक्षण में कई राज्योें के युवा शामिल हुए।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं को बांस का चयन, अगरबत्ती की पट्टियां, टोकरियां, सजावटी उत्पाद, फाइलों के फोल्डर, रेशों से बने छायाचित्र फ्रेम, रैक, कुर्सियां व मेज, बांस की परदा पट्टी, लैंप स्टैंड बनाने के गुर सिखाए। इसके अलावा बांस से घर बनाने, छोटे छप्पर बनाने की भी जानकारी दी गई। इस मौके पर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक डॉ. एएसी गैरोला ने कहा कि पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने युवाओं को रोजगार मुहैया कराने को लेकर अच्छी पहल की है। योजना के तहत भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् द्वारा बहुत से प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। समापन मौके पर निदेशक वन अनुसंधान संस्थान एएस रावत, डॉ. साधना त्रिपाठी, डॉ. डीपी खाली, डॉ. अजमल समानी, डॉ. अखातों सुमी, डॉ. मीना बख्शी, डॉ. राजेश भंडारी, डॉ. विकास राणा, डॉ. विनीत मदान, डॉ. एनके उप्रेती, डॉ. तोपवाल आदि उपस्थित रहे।
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केंद्र सरकार की ओर से संचालित हरित कौशल विकास कार्यक्रम के तहत युवाआें को वन अनुसंधान संस्थान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बांस से उत्पाद बनाने के गुर सिखाए गए। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान युवाओं को बांस की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी देने के साथ ही आकर्षक चीजें बनाना सिखाया गया। प्रशिक्षण में कई राज्योें के युवा शामिल हुए।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं को बांस का चयन, अगरबत्ती की पट्टियां, टोकरियां, सजावटी उत्पाद, फाइलों के फोल्डर, रेशों से बने छायाचित्र फ्रेम, रैक, कुर्सियां व मेज, बांस की परदा पट्टी, लैंप स्टैंड बनाने के गुर सिखाए। इसके अलावा बांस से घर बनाने, छोटे छप्पर बनाने की भी जानकारी दी गई। इस मौके पर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक डॉ. एएसी गैरोला ने कहा कि पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने युवाओं को रोजगार मुहैया कराने को लेकर अच्छी पहल की है। योजना के तहत भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् द्वारा बहुत से प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। समापन मौके पर निदेशक वन अनुसंधान संस्थान एएस रावत, डॉ. साधना त्रिपाठी, डॉ. डीपी खाली, डॉ. अजमल समानी, डॉ. अखातों सुमी, डॉ. मीना बख्शी, डॉ. राजेश भंडारी, डॉ. विकास राणा, डॉ. विनीत मदान, डॉ. एनके उप्रेती, डॉ. तोपवाल आदि उपस्थित रहे।
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