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घूसखोर क्लर्क को चार साल की कैद
Updated Thu, 01 Mar 2018 02:36 AM IST
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घूसखोर क्लर्क को चार साल की कैद
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
सीबीआई कोर्ट ने बुधवार को एक घूसखोर क्लर्क को चार साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 30 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। क्लर्क ने पेंशन चालू कराने की एवज में एक कर्मचारी से चार लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। रुपये लेते हुए सीबीआई ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
लैंसडौन स्थित गढ़वाल रेजिमेंट में मोहन सिंह लोहार था। उसकी सेवानिवृत्ति दिसंबर 2016 में होनी थी। इसे देखते हुए उसने वहां तैनात वरिष्ठ क्लर्क विष्णु विहार नेहरू कॉलोनी निवासी प्रताप सिंह रावत से संपर्क किया। प्रताप ने पेंशन बनाने की एवज में मोहन सिंह से चार लाख रुपये रिश्वत की मांगी। इस पर मोहन ने सीबीआई से शिकायत कर दी। मामले की पुष्टि करने के बाद सीबीआई ने पांच अक्टूबर 2016 को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट में सरकारी वकील सतीश कुमार ने पैरवी करते हुए प्रताप सिंह को सख्त सजा देने की मांग की। इस पर कोर्ट ने प्रताप को दोषी ठहराते हुए चार साल की कैद और 30 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
सीबीआई कोर्ट ने बुधवार को एक घूसखोर क्लर्क को चार साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 30 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। क्लर्क ने पेंशन चालू कराने की एवज में एक कर्मचारी से चार लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। रुपये लेते हुए सीबीआई ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
लैंसडौन स्थित गढ़वाल रेजिमेंट में मोहन सिंह लोहार था। उसकी सेवानिवृत्ति दिसंबर 2016 में होनी थी। इसे देखते हुए उसने वहां तैनात वरिष्ठ क्लर्क विष्णु विहार नेहरू कॉलोनी निवासी प्रताप सिंह रावत से संपर्क किया। प्रताप ने पेंशन बनाने की एवज में मोहन सिंह से चार लाख रुपये रिश्वत की मांगी। इस पर मोहन ने सीबीआई से शिकायत कर दी। मामले की पुष्टि करने के बाद सीबीआई ने पांच अक्टूबर 2016 को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट में सरकारी वकील सतीश कुमार ने पैरवी करते हुए प्रताप सिंह को सख्त सजा देने की मांग की। इस पर कोर्ट ने प्रताप को दोषी ठहराते हुए चार साल की कैद और 30 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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