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कहीं भारी न पड़ जाए लेबर सेस बचाने का लालच
Updated Thu, 14 Dec 2017 01:41 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
एक फीसदी सेस बचाने के लिए नक्शा स्वीकृत कराए बगैर आवासीय निर्माण करने वालों पर लालच भारी पड़ सकता है। एमडीडीए उपाध्यक्ष ने बगैर नक्शा स्वीकृत निर्माणाधीन मकानों की जांच के आदेश दे दिए हैं। पकड़े जाने पर कंपाउंडिंग और भूमि के सर्किल रेट का दस फीसदी तक जुर्माना वसूला जाएगा।
उत्तराखंड में सभी तरह के भवनों के निर्माण पर एक फीसदी लेबर सेस लागू है। पहले आवासीय मकान इससे बाहर थे। सरकार ने 10 लाख रुपये की लागत से नीचे के मकानों को ही लेबर सेस से मुक्त रखा गया है। आमतौर पर किसी भी मकान के निर्माण की लागत 10 लाख से अधिक पहुंच जाती है। लेबर सेस बचाने के लालच में लोग नक्शा स्वीकृत कराए ही निर्माण करा देते हैं। ग्रामीण इलाकों में इनकी संख्या काफी अधिक है। प्राधिकरण में बगैर नक्शा स्वीकृत कराए जाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। शहर और ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह आवासीय निर्माणकार्य होने के बाद भी प्राधिकरण में आवासीय नक्शों के आवेदन बढ़ने के बजाए कम हो रहे हैं। प्राधिकरण में प्रतिमाह औसतन नक्शा स्वीकृति के लिए तीन सौ आवेदन हो रहे हैं। लेबर सेस लागू होने से पहले इनकी संख्या साढ़े तीन सौ तक पहुंच जाती थी।
नक्शा स्वीकृति आवेदन के साथ ही लेबर सेस जमा करना अनिवार्य है। छोटी सी रकम बचाने के फेर में लोग अवैध मकान बना रहे हैं। प्राधिकरण उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव ने जेई, एई और सुपरवाइजरों को अपने अपने क्षेत्रों में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। उपाध्यक्ष ने कहा बगैर नक्शा स्वीकृत निर्माणाधीन मकानों पर कंपाउंडिंग और जुर्माना वसूला जाए।
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कोट
प्राधिकरण की व्यवस्थाएं पटरी पर लाई जा रही हैं। लोगों की सहूलियत के लिए एकल खिड़की व्यवस्था शुरू कर दी है। अब सभी तरह के अवैध निर्माण चिह्नित करने के आदेश दिए गए हैं।
- आशीष श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष
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नक्शा शुल्क
नक्शा स्वीकृति में सर्किल रेट के हिसाब से शुल्क वसूला जाता है। आबादी एरिया में एक फीसदी और खुले क्षेत्र में मकान बनाने पर सर्किल रेट का पांच फीसदी शुल्क लिया जाता है।
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क्या है बायलॉज
किसी व्यक्ति ने बगैर नक्शा स्वीकृति कराए मानकों पर अनुरूप निर्माण कराया है तो नक्शा स्वीकृति शुल्क से दोगुनी कंपाउंडिंग होती है। निर्माण में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है तो सर्किल रेट के हिसाब से भूमि की कीमत का दस फीसदी जुर्माना वसूला जाता है।
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लैंड यूज चेंज की झंझट से भी बचते हैं लोग
मास्टर और जोनल प्लान में हर क्षेत्र की भूमि का लेंड यूज निर्धारित है। यदि लेंड यूज कृषि भूमि है तो उसमें आवासीय नक्शा स्वीकृत नहीं हो सकता है। लेंड यूज बदलने की लंबी प्रक्रिया है। ग्रामीण इलाकों में यह बड़ी परेशानी है। इससे बचने के लिए भी लोग नक्शा स्वीकृति का आवेदन नहीं करते हैं।
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एक फीसदी सेस बचाने के लिए नक्शा स्वीकृत कराए बगैर आवासीय निर्माण करने वालों पर लालच भारी पड़ सकता है। एमडीडीए उपाध्यक्ष ने बगैर नक्शा स्वीकृत निर्माणाधीन मकानों की जांच के आदेश दे दिए हैं। पकड़े जाने पर कंपाउंडिंग और भूमि के सर्किल रेट का दस फीसदी तक जुर्माना वसूला जाएगा।
उत्तराखंड में सभी तरह के भवनों के निर्माण पर एक फीसदी लेबर सेस लागू है। पहले आवासीय मकान इससे बाहर थे। सरकार ने 10 लाख रुपये की लागत से नीचे के मकानों को ही लेबर सेस से मुक्त रखा गया है। आमतौर पर किसी भी मकान के निर्माण की लागत 10 लाख से अधिक पहुंच जाती है। लेबर सेस बचाने के लालच में लोग नक्शा स्वीकृत कराए ही निर्माण करा देते हैं। ग्रामीण इलाकों में इनकी संख्या काफी अधिक है। प्राधिकरण में बगैर नक्शा स्वीकृत कराए जाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। शहर और ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह आवासीय निर्माणकार्य होने के बाद भी प्राधिकरण में आवासीय नक्शों के आवेदन बढ़ने के बजाए कम हो रहे हैं। प्राधिकरण में प्रतिमाह औसतन नक्शा स्वीकृति के लिए तीन सौ आवेदन हो रहे हैं। लेबर सेस लागू होने से पहले इनकी संख्या साढ़े तीन सौ तक पहुंच जाती थी।
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नक्शा स्वीकृति आवेदन के साथ ही लेबर सेस जमा करना अनिवार्य है। छोटी सी रकम बचाने के फेर में लोग अवैध मकान बना रहे हैं। प्राधिकरण उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव ने जेई, एई और सुपरवाइजरों को अपने अपने क्षेत्रों में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। उपाध्यक्ष ने कहा बगैर नक्शा स्वीकृत निर्माणाधीन मकानों पर कंपाउंडिंग और जुर्माना वसूला जाए।
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कोट
प्राधिकरण की व्यवस्थाएं पटरी पर लाई जा रही हैं। लोगों की सहूलियत के लिए एकल खिड़की व्यवस्था शुरू कर दी है। अब सभी तरह के अवैध निर्माण चिह्नित करने के आदेश दिए गए हैं।
- आशीष श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष
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नक्शा शुल्क
नक्शा स्वीकृति में सर्किल रेट के हिसाब से शुल्क वसूला जाता है। आबादी एरिया में एक फीसदी और खुले क्षेत्र में मकान बनाने पर सर्किल रेट का पांच फीसदी शुल्क लिया जाता है।
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क्या है बायलॉज
किसी व्यक्ति ने बगैर नक्शा स्वीकृति कराए मानकों पर अनुरूप निर्माण कराया है तो नक्शा स्वीकृति शुल्क से दोगुनी कंपाउंडिंग होती है। निर्माण में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है तो सर्किल रेट के हिसाब से भूमि की कीमत का दस फीसदी जुर्माना वसूला जाता है।
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लैंड यूज चेंज की झंझट से भी बचते हैं लोग
मास्टर और जोनल प्लान में हर क्षेत्र की भूमि का लेंड यूज निर्धारित है। यदि लेंड यूज कृषि भूमि है तो उसमें आवासीय नक्शा स्वीकृत नहीं हो सकता है। लेंड यूज बदलने की लंबी प्रक्रिया है। ग्रामीण इलाकों में यह बड़ी परेशानी है। इससे बचने के लिए भी लोग नक्शा स्वीकृति का आवेदन नहीं करते हैं।