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10 ग्राम पंचायतों की सेहत एक फार्मासिस्ट के हवाले
Updated Tue, 27 Jun 2017 10:11 PM IST
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गुप्तकाशी। कालीमठ घाटी की 10 ग्राम पंचायतों की छह हजार से अधिक आबादी का स्वास्थ्य एक फार्मासिस्ट के भरोसे है। केंद्र में हालांकि एक वार्ड ब्वॉय भी तैनात है। ग्राम पंचायत कोटमा में 90 के दशक में स्थापित राजकीय आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए भी 8 से 20 किमी दूर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुप्तकाशी जाना पड़ता है।
ऊखीमठ विकासखंड का कालीमठ क्षेत्र अलग राज्य बनने के बाद भी विकास से कोसों दूर है। क्षेत्र के लोग स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं। इन 16 वर्षों में किसी ने यहां की सुध नहीं ली। हालात इस कदर दयनीय हो गए हैं कि क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों कालीमठ, कोटमा, ब्यूंखी, स्यांसू, खुन्नू, जाल तल्ला-मल्ला, चिलौंड, चौमासी, कविल्ठा और कुणजेठी के ग्रामीणों के लिए प्राथमिक उपचार तक की सुविधा नहीं हैं। अविभाजित यूपी के समय कोटमा में खोला गया आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक और अन्य संसाधनों के अभाव में शोपीश बना हुआ है। स्थापना के बाद से यहां शासन से स्थायी डॉक्टर तक कि नियुक्त नहीं की। जिला स्तर से आयुर्वेदिक चिकित्सक की तैनाती का प्रयास किया गया, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
तीन वर्ष से स्वास्थ्य केंद्र एक फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय के भरोसे चल रहा है। केंद्र में पर्याप्त दवा व संसाधन नहीं होने से कई बार क्षेत्र के जरूरतमंदों को बुखार की दवा तक भी नसीब नहीं हो पाती है। इस कारण उन्हें गुप्तकाशी की दौड़ लगानी पड़ती है। ग्राम प्रधान शिवदेई देवी, शाखा देवी, वचन सिंह, गीता देवी, ग्रामीण ओम प्रकाश भट्ट, संदीप भट्ट, डीपी भट्ट, जय प्रकाश गौड़, एमएस तिंदुरी का कहना है कि बीते एक दशक से स्वास्थ्य केंद्र में दो चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट और एएनएम की तैनाती की मांग की जा रही है, लेकिन ग्रामीणों की सुनवाई नहीं हो रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को लेकर ग्रामीणों को सबसे अधिक परेशान होना पड़ रहा है।
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कोट
जनपद में 33 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 16 केंद्रों में ही डॉक्टर तैनात हैं। कोटमा स्वास्थ्य केंद्र में शासन स्तर पर डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में वहां व्यवस्था बनाने में दिक्कत हो रही है। रिक्त पदों पर पूर्ति के लिए निदेशालय को पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया है।- डा. कृष्ण लाल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, रुद्रप्रयाग
ऊखीमठ विकासखंड का कालीमठ क्षेत्र अलग राज्य बनने के बाद भी विकास से कोसों दूर है। क्षेत्र के लोग स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं। इन 16 वर्षों में किसी ने यहां की सुध नहीं ली। हालात इस कदर दयनीय हो गए हैं कि क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों कालीमठ, कोटमा, ब्यूंखी, स्यांसू, खुन्नू, जाल तल्ला-मल्ला, चिलौंड, चौमासी, कविल्ठा और कुणजेठी के ग्रामीणों के लिए प्राथमिक उपचार तक की सुविधा नहीं हैं। अविभाजित यूपी के समय कोटमा में खोला गया आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक और अन्य संसाधनों के अभाव में शोपीश बना हुआ है। स्थापना के बाद से यहां शासन से स्थायी डॉक्टर तक कि नियुक्त नहीं की। जिला स्तर से आयुर्वेदिक चिकित्सक की तैनाती का प्रयास किया गया, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
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तीन वर्ष से स्वास्थ्य केंद्र एक फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय के भरोसे चल रहा है। केंद्र में पर्याप्त दवा व संसाधन नहीं होने से कई बार क्षेत्र के जरूरतमंदों को बुखार की दवा तक भी नसीब नहीं हो पाती है। इस कारण उन्हें गुप्तकाशी की दौड़ लगानी पड़ती है। ग्राम प्रधान शिवदेई देवी, शाखा देवी, वचन सिंह, गीता देवी, ग्रामीण ओम प्रकाश भट्ट, संदीप भट्ट, डीपी भट्ट, जय प्रकाश गौड़, एमएस तिंदुरी का कहना है कि बीते एक दशक से स्वास्थ्य केंद्र में दो चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट और एएनएम की तैनाती की मांग की जा रही है, लेकिन ग्रामीणों की सुनवाई नहीं हो रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को लेकर ग्रामीणों को सबसे अधिक परेशान होना पड़ रहा है।
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कोट
जनपद में 33 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 16 केंद्रों में ही डॉक्टर तैनात हैं। कोटमा स्वास्थ्य केंद्र में शासन स्तर पर डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में वहां व्यवस्था बनाने में दिक्कत हो रही है। रिक्त पदों पर पूर्ति के लिए निदेशालय को पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया है।- डा. कृष्ण लाल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, रुद्रप्रयाग