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13 हाईड्रम योजनाएं क्षतिग्रस्त, रबी फसल की बुवाई पर संकट
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जड़वाला में क्षतिग्रस्त पड़ा संयंत्र।
- फोटो : VIKAS NAGAR
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साहिया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बेरुखी जौनसार बावर क्षेत्र के काश्तकारों पर भारी पड़ रही हैै। क्षेत्र की 13 हाईड्रम योजनाएं बीते सात साल से क्षतिग्रस्त पड़ी हुई हैं। अगले माह से रबी की फसल की बुआई शुरू होने वाली है, लेकिन अब तक लघु सिंचाई विभाग ने क्षतिग्रस्त योजनाओं की कोई सुध नहीं ली है।
वर्ष 1986 में जौनसार बावर क्षेत्र में 13 हाईड्रम योजनाएं स्थापित की गई थीं। जो वर्ष 2013 तक ठीक चलीं। जून 2013 में आई भीषण आपदा में ये सभी योजनाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं। इन हाईड्रम योजनाओं से 1700 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती थी। लेकिन वर्तमान में सिंचाई के अभाव में आधे से अधिक कृषि भूमि बंजर पड़ी हुई है। इससे काश्तकारों का रुझान भी खेती-बाड़ी की तरफ घटने लगा है। जड़वाला के काश्तकार संतन सिंह राठौर, चापनू के राजेश का कहना है कि पूर्व में खेती-बाड़ी कर वह अपने परिवार का भरण पोषण करते थे, लेकिन वर्तमान में सिंचाई के अभाव में उनकी भूमि बंजर पड़ी है। कुछ यही कहानी कोटी निवासी चमन सिंह तोमर, टीकम सिंह तोमर, साहिया छानी निवासी गंगा सिंह राय, सतपाल राय, युवराज सिंह राय, धर्म सिंह राय आदि की है। काश्तकारों का कहना है कि सिंचाई के अभाव में वह महज मानसून में ही खेतीबाड़ी कर पाते हैं। एक आंकड़ों के अनुसार हाईड्रम योजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से जड़वाला में 30 परिवारों की 50 हेक्टेयर कृषि भूमि, साहिया छानी में 200 से अधिक परिवारों की 250 हेक्टेयर कृषि भूमि, कोटी गाड में 80 से अधिक परिवारों की 150 हेक्टेयर भूमि बंजर हो रही है।
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ये योजनाएं हैं क्षतिग्रस्त
जड़वाला, साहिया छानी के साथ ही कालसी और चकराता प्रखंड में चापनू, मलेथा, जड़वाला, साहिया छानी, बुहार खेड़ा, तारलीगाड, कोटीगाड प्रथम, कोटीगाड समेत 13 हाईड्रम योजनाएं बीते छह साल से क्षतिग्रस्त पड़ी हुई हैं।
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योजनाओं की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत कराई जाएगी।
-रविंद प्रसाद अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई विभाग
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वर्ष 1986 में जौनसार बावर क्षेत्र में 13 हाईड्रम योजनाएं स्थापित की गई थीं। जो वर्ष 2013 तक ठीक चलीं। जून 2013 में आई भीषण आपदा में ये सभी योजनाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं। इन हाईड्रम योजनाओं से 1700 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती थी। लेकिन वर्तमान में सिंचाई के अभाव में आधे से अधिक कृषि भूमि बंजर पड़ी हुई है। इससे काश्तकारों का रुझान भी खेती-बाड़ी की तरफ घटने लगा है। जड़वाला के काश्तकार संतन सिंह राठौर, चापनू के राजेश का कहना है कि पूर्व में खेती-बाड़ी कर वह अपने परिवार का भरण पोषण करते थे, लेकिन वर्तमान में सिंचाई के अभाव में उनकी भूमि बंजर पड़ी है। कुछ यही कहानी कोटी निवासी चमन सिंह तोमर, टीकम सिंह तोमर, साहिया छानी निवासी गंगा सिंह राय, सतपाल राय, युवराज सिंह राय, धर्म सिंह राय आदि की है। काश्तकारों का कहना है कि सिंचाई के अभाव में वह महज मानसून में ही खेतीबाड़ी कर पाते हैं। एक आंकड़ों के अनुसार हाईड्रम योजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से जड़वाला में 30 परिवारों की 50 हेक्टेयर कृषि भूमि, साहिया छानी में 200 से अधिक परिवारों की 250 हेक्टेयर कृषि भूमि, कोटी गाड में 80 से अधिक परिवारों की 150 हेक्टेयर भूमि बंजर हो रही है।
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ये योजनाएं हैं क्षतिग्रस्त
जड़वाला, साहिया छानी के साथ ही कालसी और चकराता प्रखंड में चापनू, मलेथा, जड़वाला, साहिया छानी, बुहार खेड़ा, तारलीगाड, कोटीगाड प्रथम, कोटीगाड समेत 13 हाईड्रम योजनाएं बीते छह साल से क्षतिग्रस्त पड़ी हुई हैं।
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योजनाओं की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत कराई जाएगी।
-रविंद प्रसाद अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई विभाग