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मैरी मां मैं जाण पड़िगे... गीत सुन भावुक हुए दर्शक
Updated Mon, 26 Nov 2018 01:51 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
पर्वतीय नाट्य मंच मुंबई की ओर से आयोजित दो दिवसीय वीर भड़ माधोसिंह की जीवंत गाथा को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा। दूसरे दिन मंचन में दर्शाया गया कि माधोसिंह भंडारी उन सूरवीर और महान किसान पुत्रों में से हैं, जिन्होंने 400 साल पहले किसानों की खुशहाली के लिए अपने इकलौते पुत्र की बलि तक दे दी थी। वह देश के पहले टनल इंजीनियर के रूप में भी जाने जाते हैं।
परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत, राजपुर विधायक खजान दास, अभिनेता बलदेव राणा, निर्मात्री ममता भट्ट और सच्चिदानंद जोशी ने टीम के साथ मां नंदा देवी की आरती कर किया। इस दौरान विधायक खजान दास ने मंच के कार्य की सराहना की। नाटक के अंतिम दृश्य में जब माधोसिंह अपने इकलौते पुत्र गजेसिंह की बलि देने के लिए अपनी पत्नी अदीना से बात करते हैं, तो यह सुनकर अदीना बेहोश हो जाती है और धरती पर दोबारा भड़ पैदा नहीं होने का श्राप देती है। माधोसिंह भंडारी अपने पुत्र का बलिदान करने लिए अदीना से गजे सिंह को ले जाता है। गजे सिंह अपनी मां को समझाते हुए गीत गाता है कि मैरी मां मैं जाण पड़िगे.., जिसे सुन दर्शक दीर्घा में बैठे लोग अपने आंसू नहीं रोक पाते हैं।
नाटक के मुख्य सूत्रधार प्रसिद्ध अभिनेता बलदेव राणा ने कहा कि यह नाटक कोई काल्पनिक गाथा नहीं है, बल्कि एक जीवंत कथा है। इसके साक्ष्य आज भी मलेथा गांव में मौजूद हैं। शौर्य, वीरता, प्रेम और पराक्रम की कहानी दिखाने का उद्देश्य है कि नई पीड़ी अपने पूर्वजों के इतिहास पर नाज करे और अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। नाटक से पहले सभी कलाकारों ने मलेथा स्थित वीरभड़ माधोसिंह भंडारी की सुरंग पर विधिविधान से पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में देवी प्रसाद सेमवाल, रामकृष्ण भट्ट सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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पर्वतीय नाट्य मंच मुंबई की ओर से आयोजित दो दिवसीय वीर भड़ माधोसिंह की जीवंत गाथा को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा। दूसरे दिन मंचन में दर्शाया गया कि माधोसिंह भंडारी उन सूरवीर और महान किसान पुत्रों में से हैं, जिन्होंने 400 साल पहले किसानों की खुशहाली के लिए अपने इकलौते पुत्र की बलि तक दे दी थी। वह देश के पहले टनल इंजीनियर के रूप में भी जाने जाते हैं।
परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत, राजपुर विधायक खजान दास, अभिनेता बलदेव राणा, निर्मात्री ममता भट्ट और सच्चिदानंद जोशी ने टीम के साथ मां नंदा देवी की आरती कर किया। इस दौरान विधायक खजान दास ने मंच के कार्य की सराहना की। नाटक के अंतिम दृश्य में जब माधोसिंह अपने इकलौते पुत्र गजेसिंह की बलि देने के लिए अपनी पत्नी अदीना से बात करते हैं, तो यह सुनकर अदीना बेहोश हो जाती है और धरती पर दोबारा भड़ पैदा नहीं होने का श्राप देती है। माधोसिंह भंडारी अपने पुत्र का बलिदान करने लिए अदीना से गजे सिंह को ले जाता है। गजे सिंह अपनी मां को समझाते हुए गीत गाता है कि मैरी मां मैं जाण पड़िगे.., जिसे सुन दर्शक दीर्घा में बैठे लोग अपने आंसू नहीं रोक पाते हैं।
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नाटक के मुख्य सूत्रधार प्रसिद्ध अभिनेता बलदेव राणा ने कहा कि यह नाटक कोई काल्पनिक गाथा नहीं है, बल्कि एक जीवंत कथा है। इसके साक्ष्य आज भी मलेथा गांव में मौजूद हैं। शौर्य, वीरता, प्रेम और पराक्रम की कहानी दिखाने का उद्देश्य है कि नई पीड़ी अपने पूर्वजों के इतिहास पर नाज करे और अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। नाटक से पहले सभी कलाकारों ने मलेथा स्थित वीरभड़ माधोसिंह भंडारी की सुरंग पर विधिविधान से पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में देवी प्रसाद सेमवाल, रामकृष्ण भट्ट सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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