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फोटो- एमकेपी में तोड़े गए ताले, पांच कक्ष हुए सील
Updated Wed, 27 Jun 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
एमकेपी पीजी कॉलेज में मंगलवार को ताले तोड़े गए और पांच कक्ष सील कर दिए गए। शासन के आदेश पर गठित उच्च शिक्षा विभाग की टीम एमकेपी में जांच करने पहुंची और यूजीसी से मिली 45 लाख रुपये की ग्रांट से खरीदे गए सामान का फिजिकल वेरिफिकेशन किया। अब टीम ने कॉलेज प्रशासन से सभी सामान के बिल मांगे हैं।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने शासन के निर्देश पर एमकेपी पीजी कॉलेज में यूजीसी से मिले 45 लाख रुपये ग्रांट से की गई खरीदारी की जांच बैठाई थी। निदेशालय ने इसके लिए उपनिदेशक स्तर के अधिकारी को जांच सौंपी थी। मंगलवार को एसडीएम सदर प्रत्यूष कुमार के नेतृत्व में टीम एमकेपी पहुंची। टीम में मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी, रायपुर पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अंजू अग्रवाल के अलावा अपर तहसीलदार भी शामिल थे। टीम ने यूजीसी ग्रांट से खरीदे गए सामान के कक्ष में पहुंचने के लिए ताले तोड़े। कॉलेज में इस सामान को कैद करने के लिए बनाई गई दीवार भी तोड़ी गई। पांच कक्षों में रखे हुए पूरे सामान की सूची बनाने के बाद टीम ने कक्षों को सील कर दिया। अब इस सामान के बिल मांगे गए हैं। जांच टीम बिलों से मिलान करने के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी।
दरअसल, कॉलेज को वर्ष 2012 में यूजीसी से 45 लाख रुपये की अतिरिक्त ग्रांट मिली थी। इस ग्रांट से कॉलेज में जेनरेटर और अन्य सामान खरीदे गए। खरीदारी तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. किरन सूद और एमकेपी सोसाइटी सचिव जितेंद्र नेगी के कार्यकाल में हुई थी। ऑडिट में खरीदारी में भारी अनियमितताएं प्रकाश में आईं। मामले में एक एफआईआर शहर कोतवाली में तत्कालीन प्राचार्य डॉ. किरन सूद और तत्कालीन सचिव जितेंद्र नेगी के खिलाफ दर्ज हुई थी, जिसकी जांच चल रही है। इस बीच, नौ अप्रैल को शासन में अपर मुख्य सचिव डॉ. रणबीर सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि अगर जरूरी हो तो स्टोर का ताला तोड़कर मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में खरीदे गए सामान की इन्वेंट्री तैयार की जाए। अपर मुख्य सचिव डॉ. रणबीर सिंह ने निर्देश पर निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. सविता मोहन ने जांच टीम बना दी थी।
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शासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि चूंकि ऑडिट की गड़बड़ियों में तत्कालीन प्राचार्य डॉ. किरन सूद और सचिव जितेंद्र सिंह नेगी को समान रूप से दोषी पाया गया है, लेकिन यह जांच का विषय है कि दोनों अधिकारियों का दोष किस सीमा तक है। लिहाजा इसकी भी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। ऑडिट में यह भी साफ नहीं हो पाया था कि कितनी धनराशि की हानि हुई है, इसकी वसूली की भी संस्तुति मांगी गई थी। दूसरी ओर, एमकेपी पीजी कॉलेज के हॉस्टल के खाते के मामले में भी तत्कालीन प्रबंधनकारिणी पदाधिकारियों को झटका लगा है। इस मामले में मुख्य सूचना आयुक्त के निर्देश पर कई पदाधिकारियों खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए एफआईआर को खत्म करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। अब मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
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शासन के निर्देश पर गठित जांच टीम मंगलवार को कॉलेज आई थी। कॉलेज प्रशासन की ओर से जांच में पूर्ण सहयोग किया जा रहा है। मांगे गए सभी दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराए दिए जाएंगे।
-डॉ. इंदु सिंह, प्राचार्य, एमकेपी
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एमकेपी पीजी कॉलेज में मंगलवार को ताले तोड़े गए और पांच कक्ष सील कर दिए गए। शासन के आदेश पर गठित उच्च शिक्षा विभाग की टीम एमकेपी में जांच करने पहुंची और यूजीसी से मिली 45 लाख रुपये की ग्रांट से खरीदे गए सामान का फिजिकल वेरिफिकेशन किया। अब टीम ने कॉलेज प्रशासन से सभी सामान के बिल मांगे हैं।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने शासन के निर्देश पर एमकेपी पीजी कॉलेज में यूजीसी से मिले 45 लाख रुपये ग्रांट से की गई खरीदारी की जांच बैठाई थी। निदेशालय ने इसके लिए उपनिदेशक स्तर के अधिकारी को जांच सौंपी थी। मंगलवार को एसडीएम सदर प्रत्यूष कुमार के नेतृत्व में टीम एमकेपी पहुंची। टीम में मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी, रायपुर पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अंजू अग्रवाल के अलावा अपर तहसीलदार भी शामिल थे। टीम ने यूजीसी ग्रांट से खरीदे गए सामान के कक्ष में पहुंचने के लिए ताले तोड़े। कॉलेज में इस सामान को कैद करने के लिए बनाई गई दीवार भी तोड़ी गई। पांच कक्षों में रखे हुए पूरे सामान की सूची बनाने के बाद टीम ने कक्षों को सील कर दिया। अब इस सामान के बिल मांगे गए हैं। जांच टीम बिलों से मिलान करने के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी।
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दरअसल, कॉलेज को वर्ष 2012 में यूजीसी से 45 लाख रुपये की अतिरिक्त ग्रांट मिली थी। इस ग्रांट से कॉलेज में जेनरेटर और अन्य सामान खरीदे गए। खरीदारी तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. किरन सूद और एमकेपी सोसाइटी सचिव जितेंद्र नेगी के कार्यकाल में हुई थी। ऑडिट में खरीदारी में भारी अनियमितताएं प्रकाश में आईं। मामले में एक एफआईआर शहर कोतवाली में तत्कालीन प्राचार्य डॉ. किरन सूद और तत्कालीन सचिव जितेंद्र नेगी के खिलाफ दर्ज हुई थी, जिसकी जांच चल रही है। इस बीच, नौ अप्रैल को शासन में अपर मुख्य सचिव डॉ. रणबीर सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि अगर जरूरी हो तो स्टोर का ताला तोड़कर मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में खरीदे गए सामान की इन्वेंट्री तैयार की जाए। अपर मुख्य सचिव डॉ. रणबीर सिंह ने निर्देश पर निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. सविता मोहन ने जांच टीम बना दी थी।
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शासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि चूंकि ऑडिट की गड़बड़ियों में तत्कालीन प्राचार्य डॉ. किरन सूद और सचिव जितेंद्र सिंह नेगी को समान रूप से दोषी पाया गया है, लेकिन यह जांच का विषय है कि दोनों अधिकारियों का दोष किस सीमा तक है। लिहाजा इसकी भी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। ऑडिट में यह भी साफ नहीं हो पाया था कि कितनी धनराशि की हानि हुई है, इसकी वसूली की भी संस्तुति मांगी गई थी। दूसरी ओर, एमकेपी पीजी कॉलेज के हॉस्टल के खाते के मामले में भी तत्कालीन प्रबंधनकारिणी पदाधिकारियों को झटका लगा है। इस मामले में मुख्य सूचना आयुक्त के निर्देश पर कई पदाधिकारियों खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए एफआईआर को खत्म करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। अब मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
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शासन के निर्देश पर गठित जांच टीम मंगलवार को कॉलेज आई थी। कॉलेज प्रशासन की ओर से जांच में पूर्ण सहयोग किया जा रहा है। मांगे गए सभी दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराए दिए जाएंगे।
-डॉ. इंदु सिंह, प्राचार्य, एमकेपी