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दून से मसूरी चली प्रदेश की पहली पैनिक बटन वाली बस
Updated Wed, 10 Oct 2018 01:44 AM IST
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दून से मसूरी चली प्रदेश की पहली पैनिक बटन वाली बस
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। प्रदेश की पहली पैनिक बटन वाली बस मंगलवार को ट्रायल के लिए मसूरी रवाना की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएम आवास से इलेक्ट्रिक बस को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि परीक्षण सफल रहने पर 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इनमें दून से मसूरी और हल्द्वानी से नैनीताल तक 25-25 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। जिसे देखते हुए इलेक्ट्रिक बस का परीक्षण किया जा रहा है। प्रयोग सफल रहने पर इन बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने बताया कि इसे लेकर रोडवेज ने बस कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे, जिसके बाद हैदराबाद की कंपनी ने करीब एक करोड़ कीमत की एक बस ट्रायल के लिए दून भेजी है। बताया कि बस में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बस में हर सीट पर पैनिक बटन भी लगा है। साथ ही सीसी कैमरे व जीपीएस भी लगे हुए हैं। इस मौके पर मसूरी विधायक गणेश जोशी, परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक बीके संत, महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन, डीजीएम क्रांति सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं, पहले दिन 30-30 यात्रियों ने बस में सफर किया। यात्री इलेक्ट्रिक बस में सफर को लेकर उत्साहित दिखाई दिए।
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इलेक्ट्रिक बस से तीन गुनी होगी बचत
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। इलेक्ट्रिक बस में प्रति किलोमीटर एक यूनिट से भी कम खर्च आ रहा है। साधारण बस में जहां 18 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आता है। वहीं, इलेक्ट्रिक बस में महज छह रुपये प्रति किलोमीटर बिजली खर्च हो रही है।
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साधारण बस भले ही 25 लाख रुपये में आती हो, लेकिन उस पर आने वाला खर्च काफी है। इसकी तुलना में इलेक्ट्रिक बस की कीमत एक करोड़ रुपये है, लेकिन इसमें तमाम आधुनिक सुविधाएं हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता है। साधारण बस की वारंटी पांच वर्ष की है जबकि इलेक्ट्रिक बस की वारंटी 15 साल है। इलेक्ट्रिक बस में ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन के चलते ऑटो गियर की सुविधा है। ऐसे में चालक को बार-बार गियर नहीं बदलना पड़ेगा। ऑटोमेटिक स्लाइडिंग डोर का कंट्रोल बस चालक के पास होने। लो फ्लोर होने के चलते बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को बस में चढ़ने और उतरने में आसानी होगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक डिस्प्ले लगा है, जिसके जरिये यात्रियों को रूट की जानकारी मिलती रहेगी।
दोनों बसों की मेंटीनेंस की बात करें तो डीजल से चलने वाली बसों में हर चार महीने में क्लच, गियर बॉक्स आदि को बदलना पड़ता है, जबकि इलेक्ट्रिक बस में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बस में लीथियमऑयन बैटरी लगी है। इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्ज होने के बाद बस 200 से 250 किलोमीटर का सफर तय करेगी। साथ ही 20 प्रतिशत बैकअप भी बना रहेगा। इसकी अधिकतम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। ऐसे में पहाड़ चढ़ने पर भी बस में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी।
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रोडवेज के लिए फायदेमंद हो सकती हैं ई बसें
परिवहन निगम करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहा है। ऐसे में निगम के लिए इलेक्ट्रिक बसें फायदे का सौदा साबित हो सकती हैं, क्योंकि इलेक्ट्रिक बस में साधारण बस की तुलना में मेंटीनेंस बहुत कम है।
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ऐसे समझें दोनों बसों मेें अंतर
इलेक्ट्रिक बस साधारण बस
व्हीलबेस 9 मीटर 8.5 मीटर
सीट 30 35
टैंक - 160 लीटर
एवरेज 6 रुपये प्रति किमी 18 रुपये प्रति किमी
वारंटी 15 साल 6 साल
कीमत एक करोड़ रुपये 25 लाख रुपये
अधिकतम गति 80 किमी प्रतिघंटा 80 किमी प्रतिघंटा
मेंटीनेंस दो रुपये प्रति किमी पांच रुपये प्रति किमी
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ओलेक्ट्रा ने 700 करोड़ का एमओयू किया
ओलेक्ट्रा ग्रीनटैक लि. हैदराबाद ने उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए 700 करोड़ रुपये का एमओयू किया है। मौजूदा समय में एक बस परीक्षण के लिए यहां भेजी गई है। जिसका देहरादून-मसूरी और हल्द्वानी-नैनीताल रोड पर परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल होने पर बसों को पीपीपी मोड पर चलाया जाएगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। प्रदेश की पहली पैनिक बटन वाली बस मंगलवार को ट्रायल के लिए मसूरी रवाना की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएम आवास से इलेक्ट्रिक बस को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि परीक्षण सफल रहने पर 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इनमें दून से मसूरी और हल्द्वानी से नैनीताल तक 25-25 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। जिसे देखते हुए इलेक्ट्रिक बस का परीक्षण किया जा रहा है। प्रयोग सफल रहने पर इन बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने बताया कि इसे लेकर रोडवेज ने बस कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे, जिसके बाद हैदराबाद की कंपनी ने करीब एक करोड़ कीमत की एक बस ट्रायल के लिए दून भेजी है। बताया कि बस में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बस में हर सीट पर पैनिक बटन भी लगा है। साथ ही सीसी कैमरे व जीपीएस भी लगे हुए हैं। इस मौके पर मसूरी विधायक गणेश जोशी, परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक बीके संत, महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन, डीजीएम क्रांति सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं, पहले दिन 30-30 यात्रियों ने बस में सफर किया। यात्री इलेक्ट्रिक बस में सफर को लेकर उत्साहित दिखाई दिए।
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इलेक्ट्रिक बस से तीन गुनी होगी बचत
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। इलेक्ट्रिक बस में प्रति किलोमीटर एक यूनिट से भी कम खर्च आ रहा है। साधारण बस में जहां 18 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आता है। वहीं, इलेक्ट्रिक बस में महज छह रुपये प्रति किलोमीटर बिजली खर्च हो रही है।
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साधारण बस भले ही 25 लाख रुपये में आती हो, लेकिन उस पर आने वाला खर्च काफी है। इसकी तुलना में इलेक्ट्रिक बस की कीमत एक करोड़ रुपये है, लेकिन इसमें तमाम आधुनिक सुविधाएं हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता है। साधारण बस की वारंटी पांच वर्ष की है जबकि इलेक्ट्रिक बस की वारंटी 15 साल है। इलेक्ट्रिक बस में ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन के चलते ऑटो गियर की सुविधा है। ऐसे में चालक को बार-बार गियर नहीं बदलना पड़ेगा। ऑटोमेटिक स्लाइडिंग डोर का कंट्रोल बस चालक के पास होने। लो फ्लोर होने के चलते बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को बस में चढ़ने और उतरने में आसानी होगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक डिस्प्ले लगा है, जिसके जरिये यात्रियों को रूट की जानकारी मिलती रहेगी।
दोनों बसों की मेंटीनेंस की बात करें तो डीजल से चलने वाली बसों में हर चार महीने में क्लच, गियर बॉक्स आदि को बदलना पड़ता है, जबकि इलेक्ट्रिक बस में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बस में लीथियमऑयन बैटरी लगी है। इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्ज होने के बाद बस 200 से 250 किलोमीटर का सफर तय करेगी। साथ ही 20 प्रतिशत बैकअप भी बना रहेगा। इसकी अधिकतम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। ऐसे में पहाड़ चढ़ने पर भी बस में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी।
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रोडवेज के लिए फायदेमंद हो सकती हैं ई बसें
परिवहन निगम करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहा है। ऐसे में निगम के लिए इलेक्ट्रिक बसें फायदे का सौदा साबित हो सकती हैं, क्योंकि इलेक्ट्रिक बस में साधारण बस की तुलना में मेंटीनेंस बहुत कम है।
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ऐसे समझें दोनों बसों मेें अंतर
इलेक्ट्रिक बस साधारण बस
व्हीलबेस 9 मीटर 8.5 मीटर
सीट 30 35
टैंक - 160 लीटर
एवरेज 6 रुपये प्रति किमी 18 रुपये प्रति किमी
वारंटी 15 साल 6 साल
कीमत एक करोड़ रुपये 25 लाख रुपये
अधिकतम गति 80 किमी प्रतिघंटा 80 किमी प्रतिघंटा
मेंटीनेंस दो रुपये प्रति किमी पांच रुपये प्रति किमी
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ओलेक्ट्रा ने 700 करोड़ का एमओयू किया
ओलेक्ट्रा ग्रीनटैक लि. हैदराबाद ने उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए 700 करोड़ रुपये का एमओयू किया है। मौजूदा समय में एक बस परीक्षण के लिए यहां भेजी गई है। जिसका देहरादून-मसूरी और हल्द्वानी-नैनीताल रोड पर परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल होने पर बसों को पीपीपी मोड पर चलाया जाएगा।