{"_id":"5ba0147f867a55013b110a0d","slug":"11537217663-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईएमए के प्रस्तावित नर्सिंगहोम एक्टको सचिव ने किया खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईएमए के प्रस्तावित नर्सिंगहोम एक्टको सचिव ने किया खारिज
Updated Tue, 18 Sep 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। ‘क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ की जगह प्रस्तावित ‘उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट’ के प्रस्ताव को फिलहाल सचिव चिकित्सा नितेश कुमार झा ने खारिज कर दिया है। सचिव चिकित्सा ने प्रस्ताव पर चर्चा के बाद आईएमए पदाधिकारियों से कहा कि ‘क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ की पूरी तरह अनदेखी नहीं की जा सकती। ऐसे में वह संशोधित प्रस्ताव तैयार करें। ताकि उस पर शासन स्तर पर विचार विमर्श किया जा सके।
पिछले दिनों हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देशित किया था कि वह राज्य में बिना पंजीकरण के संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकोें को बंद करें। इसके बाद आईएमए पदाधिकारियों की अगुवाई में नर्सिंगहोम संचालकों व निजी डाक्टरों ने एक्ट का विरोध करते हुए 15 सितंबर से अस्पतालों में तालाबंदी का ऐलान कर दिया था। मामले को तूल पकड़ता देख मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आईएमए पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें सहमति बनी थी कि आईएमए पदाधिकारी प्रस्तावित ‘उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट’ का मसौदा तैयार करें। उस पर विचार विमर्श करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आईएमए पदाधिकारियों ने डॉक्टरों की टीम गठित कर उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट का प्रस्ताव तैयार कराया। इसी प्रस्ताव को लेकर आईएमए पदाधिकारी सोमवार को सचिवालय मेें सचिव चिकित्सा नितेश कुमार झा से मिलने पहुंचे, लेकिन सचिव ने वार्ता के बाद प्रस्तावित ‘उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट’ में कई खामियां गिनाते हुए इसे खारिज कर दिया। उनका कहना है कि केंद्र की ओर से लागू किए गए एक्ट की अनदेखी नहीं की जा सकती। दूसरी ओर इस संबंध में आईएमए सचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि जल्द आईएमए की बैठक बुलाई जाएगी।
विज्ञापन
देहरादून। ‘क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ की जगह प्रस्तावित ‘उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट’ के प्रस्ताव को फिलहाल सचिव चिकित्सा नितेश कुमार झा ने खारिज कर दिया है। सचिव चिकित्सा ने प्रस्ताव पर चर्चा के बाद आईएमए पदाधिकारियों से कहा कि ‘क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ की पूरी तरह अनदेखी नहीं की जा सकती। ऐसे में वह संशोधित प्रस्ताव तैयार करें। ताकि उस पर शासन स्तर पर विचार विमर्श किया जा सके।
पिछले दिनों हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देशित किया था कि वह राज्य में बिना पंजीकरण के संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकोें को बंद करें। इसके बाद आईएमए पदाधिकारियों की अगुवाई में नर्सिंगहोम संचालकों व निजी डाक्टरों ने एक्ट का विरोध करते हुए 15 सितंबर से अस्पतालों में तालाबंदी का ऐलान कर दिया था। मामले को तूल पकड़ता देख मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आईएमए पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें सहमति बनी थी कि आईएमए पदाधिकारी प्रस्तावित ‘उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट’ का मसौदा तैयार करें। उस पर विचार विमर्श करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आईएमए पदाधिकारियों ने डॉक्टरों की टीम गठित कर उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट का प्रस्ताव तैयार कराया। इसी प्रस्ताव को लेकर आईएमए पदाधिकारी सोमवार को सचिवालय मेें सचिव चिकित्सा नितेश कुमार झा से मिलने पहुंचे, लेकिन सचिव ने वार्ता के बाद प्रस्तावित ‘उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट’ में कई खामियां गिनाते हुए इसे खारिज कर दिया। उनका कहना है कि केंद्र की ओर से लागू किए गए एक्ट की अनदेखी नहीं की जा सकती। दूसरी ओर इस संबंध में आईएमए सचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि जल्द आईएमए की बैठक बुलाई जाएगी।
विज्ञापन