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उतराखंड की परंपरा है प्रकृति प्रेम

Thu, 02 Aug 2018 02:16 AM IST
Updated Thu, 02 Aug 2018 02:16 AM IST
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उतराखंड की परंपरा है प्रकृति प्रेम
उत्तराखंड की परंपरा है प्रकृति प्रेम
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। प्रकृति से प्रेम उत्तराखंड की परंपरा है। यहां के लोक जीवन में पेड़-पौधों, वन्य जीवों और प्रकृति को समाज का हिस्सा माना गया है। यही कारण है कि हमारे त्योहारों और दैनिक जीवन में इनकी समान रूप से भागीदारी है। बुधवार को सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में धाद की ओर से आयोजित हरेला कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोक गायक रजनीकांत सेमवाल ने यह विचार व्यक्त किए। अमर उजाला इस आयोजन का मीडिया पार्टनर है।
धाद की ओर से आयोजित किए जा रहे एक माह के महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को यह आयोजन किया गया। लोक गायक रजनीकांत सेमवाल ने हरेला को वैश्विक पहचान दिलाने के धाद के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रकृति से प्रेम का यह पर्व अपने आप में अलग है। उन्होंने लोकगीतों में प्रकृति के चित्रण के संबंध में जानकारी दी। कथा-साहित्य और कविताओं व गीतों में प्रकृति के विभिन्न आयामों को अधिक महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के अलग अलग क्षेत्रों में लोकगीतों और नृत्य में बहुत अधिक समानता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं के बीच ‘पोस्तु का छुमा मेरी भाग्यानी बौ, आज की चौपती मेरी भाग्यानी बौ’ और ‘हमारा दयारा छोटा-बड़ा बुग्याल झुमैलो, हमारा पहाड़ा छोटा बड़ा ताल झुमैलो’ गीतों की प्रस्तुति भी दी। छात्राओं ने रीता भंडारी के निर्देशन में सुंदर झुमैलो नृत्य प्रस्तुत किया।
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धाद के उपाध्यक्ष डीसी नौटियाल ने कहा कि प्रकृति से प्रेम के प्रतीक इस पर्व को बड़े स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए संस्था की ओर से ‘हरेला अंबेसडर’, ‘हरेला साथी’ और ‘हरेला क्लब’ बनाए जा रहे हैं। साथ ही आने वाली पीढ़ी को लोक संस्कृति से परिचित कराने के लिए लोक गीत, लोक नृत्य, बोली भाषा, पहनावा और खानपान की जानकारी भी दी जा रही है।
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विद्यालय परिसर में रजनीकांत सेमवाल, प्रधानाचार्य अलका राणा, कविलास नेगी, पंकज नौटियाल, साकेत रावत समेत अन्य ने पौधे लगाए और उनकी रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन अपूर्व आनंद ने किया। इस अवसर पर गिरीश चमोली, विकास बहुगुणा, प्रमोद पांडे, शिमौना, विमला नेगी, तन्मय ममगाईं, किरन पोखरियाल आदि मौजूद रहे।
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