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गोवा की तर्ज पर उतराखंड में होगा भी कॉर्निवाल
Updated Tue, 17 Jul 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
गोवा की तर्ज पर उत्तराखंड में भी बहुत जल्द कॉर्निवाल आयोजित किया जाएगा। इसमें राज्य के वाद्य यंत्रों, आभूषणों, वेशभूषा और लोकगीतों के साथ सांस्कृतिक झलकियों वाली रैली निकाली जाएगी। धाद के हरेला महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए बड़े-बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। देश-दुनिया में पौधे लगाने और उनकी देखभाल पर अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जबकि, हमारी संस्कृति में यह एक पर्व है। हरेला उत्तराखंड के प्रतिनिधि पर्व की तरह है। महाराज ने कहा कि हरिद्वार में उन्होंने कई ढोल वादकों को एक साथ लाकर वाद्य यंत्रों को नई पहचान देने की शुरुआत की है। जल्द ही तीन हजार ढोल एक साथ बजवाकर गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने धाद की ओर से उत्तराखंड की बोली-भाषा के पक्ष में चलाए जा रहे अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि गढ़वाली और कुमाऊंनी संपूर्ण भाषा हैं। दोनों किसी समय राजकीय भाषाएं रह चुकी हैं।
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गोवा की तर्ज पर उत्तराखंड में भी बहुत जल्द कॉर्निवाल आयोजित किया जाएगा। इसमें राज्य के वाद्य यंत्रों, आभूषणों, वेशभूषा और लोकगीतों के साथ सांस्कृतिक झलकियों वाली रैली निकाली जाएगी। धाद के हरेला महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए बड़े-बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। देश-दुनिया में पौधे लगाने और उनकी देखभाल पर अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जबकि, हमारी संस्कृति में यह एक पर्व है। हरेला उत्तराखंड के प्रतिनिधि पर्व की तरह है। महाराज ने कहा कि हरिद्वार में उन्होंने कई ढोल वादकों को एक साथ लाकर वाद्य यंत्रों को नई पहचान देने की शुरुआत की है। जल्द ही तीन हजार ढोल एक साथ बजवाकर गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने धाद की ओर से उत्तराखंड की बोली-भाषा के पक्ष में चलाए जा रहे अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि गढ़वाली और कुमाऊंनी संपूर्ण भाषा हैं। दोनों किसी समय राजकीय भाषाएं रह चुकी हैं।
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