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पर्वतीय क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति घटती आय पर चिंता जताई
Updated Sun, 15 Jul 2018 02:16 AM IST
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पर्वतीय क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति घटती आय पर चिंता जताई
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य के मैदानी जिलों की अपेक्षा पर्वतीय इलाकों में प्रति व्यक्ति घटती आय पर चिंता जताते हुए पूर्व मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल ने कहा है कि बिना सुनियोजित विकास के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन नहीं रोका जा सकता है। वे उत्तराखंड डेवलपमेंट एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से नैनसिंह सभागार में आयोजित पहले अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
मुख्य अतिथि नपलच्याल ने राज्य के पर्वतीय इलाकों से हो रहे पलायन पर चिंता जताते हुए कहा कि ग्राम विकास योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन कर पलायन पर रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं देकर पलायन रोका जा सकता है।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर सुभाष धूलिया ने कहा कि उत्कृष्ट उत्तराखंड के लिए राजनैतिक एवं विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों का आपस में सामंजस्य और विचार विमर्श जरूरी है। देवभूमि को विकसित राज्य बनाने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है वरन इसके लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा। अधिवेशन में संस्था के अध्यक्ष एवं विधायक खटीमा पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप यहां पर प्रत्येक जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचें, यह राज्य सरकार समेत तमाम संस्थाओं का प्रयास होना चाहिए। धामी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति घटती आय चिंता का विषय है, जिस पर मंथन की जरूरत है।
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अधिवेशन के दौरान उत्तराखंड के विकास में अतुलनीय योगदान देने वाले पांच अतिथियों को सम्मानित भी किया गया। इनमें प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं मैत्री आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अन्वेषक डॉ. एसके खन्ना, समाजसेवी एवं हिमालयन ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट, शिक्षाविद् व पहल संस्था की अध्यक्ष कमला पंत और चित्रांश कल्याण समिति के निदेशक इंदूभूषण कोचगवे को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सुभाष धूलिया ने की। अधिवेशन में संस्था अध्यक्ष सचिव गिरजा शंकर जोशी आदि मौजूद थे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य के मैदानी जिलों की अपेक्षा पर्वतीय इलाकों में प्रति व्यक्ति घटती आय पर चिंता जताते हुए पूर्व मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल ने कहा है कि बिना सुनियोजित विकास के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन नहीं रोका जा सकता है। वे उत्तराखंड डेवलपमेंट एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से नैनसिंह सभागार में आयोजित पहले अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
मुख्य अतिथि नपलच्याल ने राज्य के पर्वतीय इलाकों से हो रहे पलायन पर चिंता जताते हुए कहा कि ग्राम विकास योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन कर पलायन पर रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं देकर पलायन रोका जा सकता है।
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सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर सुभाष धूलिया ने कहा कि उत्कृष्ट उत्तराखंड के लिए राजनैतिक एवं विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों का आपस में सामंजस्य और विचार विमर्श जरूरी है। देवभूमि को विकसित राज्य बनाने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है वरन इसके लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा। अधिवेशन में संस्था के अध्यक्ष एवं विधायक खटीमा पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप यहां पर प्रत्येक जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचें, यह राज्य सरकार समेत तमाम संस्थाओं का प्रयास होना चाहिए। धामी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति घटती आय चिंता का विषय है, जिस पर मंथन की जरूरत है।
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अधिवेशन के दौरान उत्तराखंड के विकास में अतुलनीय योगदान देने वाले पांच अतिथियों को सम्मानित भी किया गया। इनमें प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं मैत्री आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अन्वेषक डॉ. एसके खन्ना, समाजसेवी एवं हिमालयन ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट, शिक्षाविद् व पहल संस्था की अध्यक्ष कमला पंत और चित्रांश कल्याण समिति के निदेशक इंदूभूषण कोचगवे को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सुभाष धूलिया ने की। अधिवेशन में संस्था अध्यक्ष सचिव गिरजा शंकर जोशी आदि मौजूद थे।