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पार्लियामेंट्री उिबेट 2018 का समापन, दिल्ली विवि विजेता
Updated Mon, 16 Apr 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून में रविवार को ‘वाग्युद्ध’ राष्ट्रीय पार्लियामेंट्री डिबेट-2018 का समापन हो गया। तीन दिन तक चले कार्यक्रम में देश-विदेश के समकालीन विषयों पर अर्थपूर्ण एवं जीवंत बहस देखने को मिली।
डिबेट में युवा, धर्म, अल्पसंख्यक, विश्वविद्यालयों में धार्मिक शिक्षा, सोशल मीडिया, संरक्षणात्मक भेदभाव, महिला कर्मियों पर गर्भधारण का प्रतिबंध, नारीवादी प्रवचन, पितृत्व अवकाश, जजों की नियुक्ति एवं संसद का कम से कम तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण न होने की स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहस हुई। जिसमें तुर्की राज्य का स्टेटस, इंग्लैड द्वारा फीफा वर्ल्डकप का बहिष्कार एवं मानवता विरुद्ध अपराध जैसे विषय शामिल थे। डिबेट के अंतिम मुकाबले में संसदीय क्षेत्रों की हदबंदी को लेकर आए प्रस्ताव पर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। एक पक्ष ने भारतीय संविधान के संसदीय क्षेत्रों को जनसंख्या के अनुपात में समायोजित करने और संविधान के अनुच्छेद 81 व 82 के हवाले से पक्ष रखा। वहीं दूसरे पक्ष ने हदबंदी के लिए जनसंख्या का आधार अव्यवहारिक होने की बात कही। वक्ताओं का तर्क था कि जनसंख्या आधार पर संसदीय क्षेत्रों का बंटवारा पर्वतीय राज्यों के साथ सरासर अन्याय है। पर्वतीय क्षेत्रों में क्षेत्रफल तथा मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या के आधार पर संसदीय क्षेत्रों का बंटवारा होना चाहिए। डिबेट में जाकिर हुसैन एवं श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की टीम विजेता रही और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की टीम उपविजेता रही। उत्तरांचल विवि के निदेशक डॉ. अभिषेक जोशी व प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा ने विजेताओं को ट्रॉफी एवं 2,74,000 का नकद पुरस्कार दिया। जागृत नेगी को सर्वश्रेष्ठ निर्णायक का पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर बतौर निर्णायक सिद्धार्थ थ्यागराजन, दिव्यज्योति मेनक, अनुपम धर के अलावा डॉ. अभिषेक जोशी, प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा, डॉ. पूनम रावत, बी भुवनेश्वरी, रजित शर्मा, डॉ. अनिल दीक्षित, विजय श्रीवास्तव, अभिरंजन दीक्षित, पूनम भगत समेत बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
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उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून में रविवार को ‘वाग्युद्ध’ राष्ट्रीय पार्लियामेंट्री डिबेट-2018 का समापन हो गया। तीन दिन तक चले कार्यक्रम में देश-विदेश के समकालीन विषयों पर अर्थपूर्ण एवं जीवंत बहस देखने को मिली।
डिबेट में युवा, धर्म, अल्पसंख्यक, विश्वविद्यालयों में धार्मिक शिक्षा, सोशल मीडिया, संरक्षणात्मक भेदभाव, महिला कर्मियों पर गर्भधारण का प्रतिबंध, नारीवादी प्रवचन, पितृत्व अवकाश, जजों की नियुक्ति एवं संसद का कम से कम तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण न होने की स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहस हुई। जिसमें तुर्की राज्य का स्टेटस, इंग्लैड द्वारा फीफा वर्ल्डकप का बहिष्कार एवं मानवता विरुद्ध अपराध जैसे विषय शामिल थे। डिबेट के अंतिम मुकाबले में संसदीय क्षेत्रों की हदबंदी को लेकर आए प्रस्ताव पर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। एक पक्ष ने भारतीय संविधान के संसदीय क्षेत्रों को जनसंख्या के अनुपात में समायोजित करने और संविधान के अनुच्छेद 81 व 82 के हवाले से पक्ष रखा। वहीं दूसरे पक्ष ने हदबंदी के लिए जनसंख्या का आधार अव्यवहारिक होने की बात कही। वक्ताओं का तर्क था कि जनसंख्या आधार पर संसदीय क्षेत्रों का बंटवारा पर्वतीय राज्यों के साथ सरासर अन्याय है। पर्वतीय क्षेत्रों में क्षेत्रफल तथा मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या के आधार पर संसदीय क्षेत्रों का बंटवारा होना चाहिए। डिबेट में जाकिर हुसैन एवं श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की टीम विजेता रही और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की टीम उपविजेता रही। उत्तरांचल विवि के निदेशक डॉ. अभिषेक जोशी व प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा ने विजेताओं को ट्रॉफी एवं 2,74,000 का नकद पुरस्कार दिया। जागृत नेगी को सर्वश्रेष्ठ निर्णायक का पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर बतौर निर्णायक सिद्धार्थ थ्यागराजन, दिव्यज्योति मेनक, अनुपम धर के अलावा डॉ. अभिषेक जोशी, प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा, डॉ. पूनम रावत, बी भुवनेश्वरी, रजित शर्मा, डॉ. अनिल दीक्षित, विजय श्रीवास्तव, अभिरंजन दीक्षित, पूनम भगत समेत बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
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