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16 से प्रदेशव्यापी हड़ताल करेंगे उपनलकर्मी
Updated Sun, 08 Apr 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
प्रदेशभर के उपनल कर्मचारी अपनी दो सूत्री मांगों पर कार्रवाई न होने के विरोध में 16 अप्रैल से हड़ताल करेंगे। उपनल कर्मचारी महासंघ ने ठोस आश्वासन के बिना शासन से वार्ता से भी इनकार किया है। यह निर्णय उपनल कर्मचारी महासंघ की शनिवार को प्रदेश कार्यालय में हुई आपात बैठक में लिया गया।
उपनल कर्मचारियों ने कहा कि कर्मियों की तनख्वाह बढ़ाते वक्त सरकार हमेशा वित्तीय बोझ बढ़ने का रोना रोती है। वहीं, दूसरी तरफ मंत्रियों और विधायकों के वेतन में कई गुना बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार का हजारों युवाओं से कोई सरोकार नहीं है। उपनल कर्मचारी प्रत्येक विभाग में ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद सरकार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रही है। उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपक चौहान ने कहा कि 10 से 12 साल की नियमित सेवा के बावजूद कर्मियों के नियमितीकरण का कोई स्पष्ट नियम नहीं बन पाया है। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन अथवा 21 हजार रुपये न्यूनतम वेतन प्रतिमाह देने की मांग की। साथ ही नियमावली बनाने और किसी भी कर्मी को विभाग से न हटाने का शासनादेश जारी करने की मांग की। बैठक में हरीश कोठारी, भावेश जगूड़ी, विनोद गोदियाल, विद्यासागर धस्माना, रोहित वर्मा, नरेश शाह, हेमंत रावत, अभिनव जोशी, महेश भट्ट, दिनेश रावत समेत अन्य मौजूद रहे।
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प्रदेशभर के उपनल कर्मचारी अपनी दो सूत्री मांगों पर कार्रवाई न होने के विरोध में 16 अप्रैल से हड़ताल करेंगे। उपनल कर्मचारी महासंघ ने ठोस आश्वासन के बिना शासन से वार्ता से भी इनकार किया है। यह निर्णय उपनल कर्मचारी महासंघ की शनिवार को प्रदेश कार्यालय में हुई आपात बैठक में लिया गया।
उपनल कर्मचारियों ने कहा कि कर्मियों की तनख्वाह बढ़ाते वक्त सरकार हमेशा वित्तीय बोझ बढ़ने का रोना रोती है। वहीं, दूसरी तरफ मंत्रियों और विधायकों के वेतन में कई गुना बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार का हजारों युवाओं से कोई सरोकार नहीं है। उपनल कर्मचारी प्रत्येक विभाग में ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद सरकार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रही है। उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपक चौहान ने कहा कि 10 से 12 साल की नियमित सेवा के बावजूद कर्मियों के नियमितीकरण का कोई स्पष्ट नियम नहीं बन पाया है। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन अथवा 21 हजार रुपये न्यूनतम वेतन प्रतिमाह देने की मांग की। साथ ही नियमावली बनाने और किसी भी कर्मी को विभाग से न हटाने का शासनादेश जारी करने की मांग की। बैठक में हरीश कोठारी, भावेश जगूड़ी, विनोद गोदियाल, विद्यासागर धस्माना, रोहित वर्मा, नरेश शाह, हेमंत रावत, अभिनव जोशी, महेश भट्ट, दिनेश रावत समेत अन्य मौजूद रहे।
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