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तीन लाख की आबादी न शहर की, न गांव की

Sat, 03 Feb 2018 01:32 AM IST
Updated Sat, 03 Feb 2018 01:32 AM IST
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तीन लाख की आबादी न शहर की, न गांव की
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
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नगर निगम के सीमा विस्तार में शामिल हुए 72 गांवों के करीब तीन लाख लोगों की हालत ऐसी हो गई है कि वह न गांव के रहे और न ही शहर के। सीमा विस्तार के बाद प्रधानों के बस्ते जमा न करने और पंचायत अधिकारियों के गायब होने की वजह से लोगों के काम नहीं हो रहे हैं। न तो उनके जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बन रहे हैं और न ही आधार कार्ड या वोटर कार्ड बन पा रहे हैं। बुजुर्गों की पेंशन अटक गई है।
नगर निगम में शामिल गांवों के लोग परेशान हैं। डीपीआरओ ने बस्ते जमा कराने के निर्देश तो दे दिए लेकिन अभी तक बस्ते जमा करने की व्यवस्था नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्र निगम में शामिल होने के बाद से अब उन्हें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में दिक्कत हो रही है। नत्थनपुर की प्रधान करुणा सिंह बताती हैं कि जब से उनका गांव नगर निगम में शामिल हुआ है, समस्याएं बढ़ती ही जा रही हैं। वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन आदि को प्रधान सत्यापित करते थे और पेंशन शुरू हो जाती थी। लेकिन, निगम में शामिल होने के बाद अब इन सब कार्यों के लिए दून जाना पड़ रहा है। आधार कार्ड, वोटर आई कार्ड भी आसानी से बन जाता था। मियांवाला की प्रधान पूजा नेगी, मोहकमपुर के प्रधान राम सिंह रावत, लाडपुर के प्रधान घनश्याम पाल ने भी जन्म-मुत्यु प्रमाणपत्र व अन्य कार्य न होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि प्रधान तमाम समस्याएं खुली बैठक के माध्यम से निपटा लेते थे, जो अब खत्म हो जाएगा।
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14वें वित्त आयोग का भी नहीं मिलेगा लाभ
वर्तमान में निगम में शामिल 72 गांवों में विकास कार्य के लिए 14वें वित्त आयोग का काफी लाभ मिलता था। लेकिन, निगम में शामिल होने के बाद अब उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।
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चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के तहत होगा विकास
अब नगर निगम में शामिल गांवों का विकास कार्य चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से जारी धनराशि से होगा। 14वें वित्त आयोग के सापेक्ष इसमें काफी कम धनराशि मिलती है।
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अभी तक ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है। शिकायत आने पर जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- जफर खान, जिला पंचायत राज अधिकारी
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