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सीएम आवास कूच कर रहे ठेकेदारों पर फटकारी लाठियां
Updated Wed, 31 Jan 2018 02:09 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
आठ सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास कूच कर रहे ठेकेदारों को पुलिस के एस्ले हॉल चौक पर रोकने पर ठेकेदार भड़क गए। ठेकेदार जाम लगाकर सड़क पर ही धरना देकर बैठ गए। पुलिस ने लाठियां फटकार ठेकेदारों को खदेड़ दिया। इस दौरान करीब 60 ठेकेदारों ने गिरफ्तारी दी। देर शाम उन्हें पुलिस लाइन से रिहा कर दिया गया। ठेकेदारों ने मांगें पूरी न होने पर एक फरवरी से प्रदेशभर में काम बंद करने की चेतावनी दी है।
मंगलवार को ठेकेदार कल्याण समिति अध्यक्ष गोविंद सिंह पुंडीर व महासचिव राजेंद्र सिंह कुंवर के नेतृत्व में प्रदेशभर के सैकड़ों ठेकेदार परेड ग्राउंड में एकत्र हुए। यहां से ठेकेदार मुख्यमंत्री आवास कूच के लिए निकले। जैसे ही ठेकेदार एस्ले हॉल चौक पहुंचे, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। जिस पर ठेकेदार भड़क गए और प्रदेश सरकार व पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्होंने जाम लगा दिया। जाम लगाकर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें लाठी फटकार खदेड़ दिया। इस दौरान अफरातफरी मच गई। पुलिस और ठेकेदारों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस ने करीब 60 ठेकेदारों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया। जिन्हें देर शाम रिहा कर दिया गया। वहीं, ठेकेदारों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट मनुज गोयल, असिस्टेंट सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पेटवाल, सीओ सिटी चंद्रमोहन नेगी को सौंपा। ठेकेदारों ने उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर एक फरवरी से प्रदेशभर में काम बंद करने की चेतावनी दी।
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ये ठेकेदार रहे शामिल
राजीव मेहरा, राजेंद्र नेगी, नरेंद्र रावत, अनुराग गुप्ता, सुरेश पुंडीर, गजेंद्र नेगी, सुरेंद्र पुंडीर, अशोक खंडूड़ी, संजय अग्रवाल, धर्मपाल, कमल शर्मा, अशोक चौधरी, अनुराग गुप्ता, मनोज पंवार, केशव, रणवीर पुंडीर, उपेंद्र आदि मौजूद रहे।
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यह है मामला
ठेकेदार कल्याण समिति अध्यक्ष गोविंद सिंह पुंडीर के मुताबिक पिछले साल नौ अगस्त को प्रदेश सरकार और ठेकेदारों के बीच वार्ता हुई थी। जिसमें कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, विधायक मुन्ना सिंह चौहान और ठेकेदारों के बीच 10 बिंदुओं पर सहमति बनी थी। जिस पर ठेकेदारों ने धरना खत्म कर दिया था। लेकिन, कई महीने बीतने के बाद भी उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया। जिसे लेकर ठेकेदारों में आक्रोश है।
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ये हैं ठेकेदारों की मांगें
1. बड़े टेंडरों को छोटे-छोटे टुकड़ों में लगाया जाए, जिससे स्थानीय ठेकेदारों को काम मिले।
2. एक करोड़ से अधिक के कार्यों की ही ई-टेंडरिंग हो।
3. सभी विभागों के सभी मदों का लंबित भुगतान जल्द किया जाए, सिंचाई विभाग के वर्ष 2013-14 के स्वीकृत कार्यों का लंबित भुगतान हो।
4. पंजीकरण के वर्गीकरण के मानकों को पूर्ववत रखा जाए व इसकी वैद्यता पांच वर्ष होनी चाहिए।
5. एसओआर की दरें की बढ़ाई जाए, विभागीय कमेटी में ठेकेदारों के प्रतिनिधि मंडल को साथ बैठाकर इसे संशोधित किया जाए।
6. आफलाइन भुगतान के समय का जमानती राशि का करोड़ों रुपये ठेकेदारों को शीघ्र वापस होना चाहिए।
7. समय वृद्धि, एक्सट्रा आइटम तथा वरिएशन पूर्व की जीपीडब्ल्यू 9 के अनुसार होनी चाहिए।
8. जीएसटी लागू होने से पूर्व में हुए अनुबंध का भुगतान अनुबंध के मुताबिक ही होना चाहिए, उसमें जीएसटी नहीं काटी जानी चाहिए।
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एक्शन में सरकार: टुकड़ों में बंटेगा काम, पेमेंट भी होगी
देहरादून। ठेकेदारों के सड़क पर उतरने के बाद प्रदेश सरकार भी हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर शासन ने आधा किमी रोड कटिंग का कार्य टुकड़ों में देने का फैसला किया है। बकाया भुगतान के लिए भी 160 करोड़ रुपये कंटीजेंसी फंड से मांगे गए। अपर मुख्य सचिव (लोनिवि) ओम प्रकाश ने इस संबंध में लोनिवि के अधिकारियों के साथ बैठक की जिसमें उक्त निर्णय लिए गए। ठेकेदार अधिप्राप्ति नियमावली में संशोधन कर बड़ी राशि के कार्यों को ई टेंडर की व्यवस्था से बाहर रखने की मांग कर रहे हैं। उनकी इस मांग के संबंध में अपर मुख्य सचिव ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि आधा किमी सड़क के कार्य को टुकड़ों में आवंटित करने पर निर्णय हो गया है, जिसका शासनादेश बुधवार को जारी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए कंटीजेंसी से 160 करोड़ रुपये भी जारी हो जाएंगे। उधर, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया कर्मियों द्वारा पूछे जाने पर कहा कि ठेकेदारों ने मांग की थी, सरकार अनुकूल निर्णय लेगी। इस बारे में कोई गफलत नहीं है।
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आठ सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास कूच कर रहे ठेकेदारों को पुलिस के एस्ले हॉल चौक पर रोकने पर ठेकेदार भड़क गए। ठेकेदार जाम लगाकर सड़क पर ही धरना देकर बैठ गए। पुलिस ने लाठियां फटकार ठेकेदारों को खदेड़ दिया। इस दौरान करीब 60 ठेकेदारों ने गिरफ्तारी दी। देर शाम उन्हें पुलिस लाइन से रिहा कर दिया गया। ठेकेदारों ने मांगें पूरी न होने पर एक फरवरी से प्रदेशभर में काम बंद करने की चेतावनी दी है।
मंगलवार को ठेकेदार कल्याण समिति अध्यक्ष गोविंद सिंह पुंडीर व महासचिव राजेंद्र सिंह कुंवर के नेतृत्व में प्रदेशभर के सैकड़ों ठेकेदार परेड ग्राउंड में एकत्र हुए। यहां से ठेकेदार मुख्यमंत्री आवास कूच के लिए निकले। जैसे ही ठेकेदार एस्ले हॉल चौक पहुंचे, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। जिस पर ठेकेदार भड़क गए और प्रदेश सरकार व पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्होंने जाम लगा दिया। जाम लगाकर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें लाठी फटकार खदेड़ दिया। इस दौरान अफरातफरी मच गई। पुलिस और ठेकेदारों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस ने करीब 60 ठेकेदारों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया। जिन्हें देर शाम रिहा कर दिया गया। वहीं, ठेकेदारों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट मनुज गोयल, असिस्टेंट सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पेटवाल, सीओ सिटी चंद्रमोहन नेगी को सौंपा। ठेकेदारों ने उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर एक फरवरी से प्रदेशभर में काम बंद करने की चेतावनी दी।
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ये ठेकेदार रहे शामिल
राजीव मेहरा, राजेंद्र नेगी, नरेंद्र रावत, अनुराग गुप्ता, सुरेश पुंडीर, गजेंद्र नेगी, सुरेंद्र पुंडीर, अशोक खंडूड़ी, संजय अग्रवाल, धर्मपाल, कमल शर्मा, अशोक चौधरी, अनुराग गुप्ता, मनोज पंवार, केशव, रणवीर पुंडीर, उपेंद्र आदि मौजूद रहे।
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यह है मामला
ठेकेदार कल्याण समिति अध्यक्ष गोविंद सिंह पुंडीर के मुताबिक पिछले साल नौ अगस्त को प्रदेश सरकार और ठेकेदारों के बीच वार्ता हुई थी। जिसमें कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, विधायक मुन्ना सिंह चौहान और ठेकेदारों के बीच 10 बिंदुओं पर सहमति बनी थी। जिस पर ठेकेदारों ने धरना खत्म कर दिया था। लेकिन, कई महीने बीतने के बाद भी उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया। जिसे लेकर ठेकेदारों में आक्रोश है।
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ये हैं ठेकेदारों की मांगें
1. बड़े टेंडरों को छोटे-छोटे टुकड़ों में लगाया जाए, जिससे स्थानीय ठेकेदारों को काम मिले।
2. एक करोड़ से अधिक के कार्यों की ही ई-टेंडरिंग हो।
3. सभी विभागों के सभी मदों का लंबित भुगतान जल्द किया जाए, सिंचाई विभाग के वर्ष 2013-14 के स्वीकृत कार्यों का लंबित भुगतान हो।
4. पंजीकरण के वर्गीकरण के मानकों को पूर्ववत रखा जाए व इसकी वैद्यता पांच वर्ष होनी चाहिए।
5. एसओआर की दरें की बढ़ाई जाए, विभागीय कमेटी में ठेकेदारों के प्रतिनिधि मंडल को साथ बैठाकर इसे संशोधित किया जाए।
6. आफलाइन भुगतान के समय का जमानती राशि का करोड़ों रुपये ठेकेदारों को शीघ्र वापस होना चाहिए।
7. समय वृद्धि, एक्सट्रा आइटम तथा वरिएशन पूर्व की जीपीडब्ल्यू 9 के अनुसार होनी चाहिए।
8. जीएसटी लागू होने से पूर्व में हुए अनुबंध का भुगतान अनुबंध के मुताबिक ही होना चाहिए, उसमें जीएसटी नहीं काटी जानी चाहिए।
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एक्शन में सरकार: टुकड़ों में बंटेगा काम, पेमेंट भी होगी
देहरादून। ठेकेदारों के सड़क पर उतरने के बाद प्रदेश सरकार भी हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर शासन ने आधा किमी रोड कटिंग का कार्य टुकड़ों में देने का फैसला किया है। बकाया भुगतान के लिए भी 160 करोड़ रुपये कंटीजेंसी फंड से मांगे गए। अपर मुख्य सचिव (लोनिवि) ओम प्रकाश ने इस संबंध में लोनिवि के अधिकारियों के साथ बैठक की जिसमें उक्त निर्णय लिए गए। ठेकेदार अधिप्राप्ति नियमावली में संशोधन कर बड़ी राशि के कार्यों को ई टेंडर की व्यवस्था से बाहर रखने की मांग कर रहे हैं। उनकी इस मांग के संबंध में अपर मुख्य सचिव ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि आधा किमी सड़क के कार्य को टुकड़ों में आवंटित करने पर निर्णय हो गया है, जिसका शासनादेश बुधवार को जारी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए कंटीजेंसी से 160 करोड़ रुपये भी जारी हो जाएंगे। उधर, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया कर्मियों द्वारा पूछे जाने पर कहा कि ठेकेदारों ने मांग की थी, सरकार अनुकूल निर्णय लेगी। इस बारे में कोई गफलत नहीं है।