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युवती की कुल्हाड़ी से हत्या करने वाले को आजीवन कैद
Updated Sat, 06 Jan 2018 01:17 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
एक तरफा प्रेम में युवती को कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतारने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकासनगर मोहम्मद सुल्तान की अदालत ने आरोपी युवक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा 25 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है।
अभियोजन द्वारा घटना को महिला जाति के प्रति सामाजिक अपराध बताते हुए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की गई थी। कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष को सुनने के बाद इसे रियरेस्ट ऑफ द रियरेस्ट नहीं माना। अभियुक्त की 22 वर्ष की कम उम्र और उसके पहले अपराध को देखते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश बहुगुणा ने बताया कि मामले में कुल 26 गवाह थे, जिनमें से 12 की गवाही हुई। विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष एएसपी मंजूनाथ टीसी और फिर थानाध्यक्ष मुकेश त्यागी ने की। सोनू राम टांकिया ने कोर्ट में पुलिस की ओर से पैरवी करते हुए समय पर गवाही कराई।
बता दें कि 28 मई 2016 को प्रियंका चौहान (22) पुत्री पचपन सिंह निवासी सेलाकुई थाना सहसपुर की हत्या पंकज सिंह लटवाल पुत्र मदन सिंह ग्राम देवली, अल्मोड़ा ने कुल्हाड़ी से कर दी थी। प्रियंका सेलाकुई में किराये के कमरे में रह रही थी। हत्या के दौरान पंकज सिंह ने खुद को भी घायल कर लिया था। दूसरे दिन सुबह पड़ोसियों ने कमरे से कराहने की आवाजें सुनीं तो उन्होंने फोन से इसकी जानकारी प्रियंका के पिता और पुलिस को दी। इसके बाद मौके पर पहुंचे पिता और पुलिस ने खिड़की तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। जहां प्रियंका और पंकज लहूलुहान पड़े थे। आननफानन दोनों को दून अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्रियंका की मौत हो गई थी।
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एक तरफा प्रेम में युवती को कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतारने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकासनगर मोहम्मद सुल्तान की अदालत ने आरोपी युवक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा 25 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है।
अभियोजन द्वारा घटना को महिला जाति के प्रति सामाजिक अपराध बताते हुए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की गई थी। कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष को सुनने के बाद इसे रियरेस्ट ऑफ द रियरेस्ट नहीं माना। अभियुक्त की 22 वर्ष की कम उम्र और उसके पहले अपराध को देखते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश बहुगुणा ने बताया कि मामले में कुल 26 गवाह थे, जिनमें से 12 की गवाही हुई। विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष एएसपी मंजूनाथ टीसी और फिर थानाध्यक्ष मुकेश त्यागी ने की। सोनू राम टांकिया ने कोर्ट में पुलिस की ओर से पैरवी करते हुए समय पर गवाही कराई।
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बता दें कि 28 मई 2016 को प्रियंका चौहान (22) पुत्री पचपन सिंह निवासी सेलाकुई थाना सहसपुर की हत्या पंकज सिंह लटवाल पुत्र मदन सिंह ग्राम देवली, अल्मोड़ा ने कुल्हाड़ी से कर दी थी। प्रियंका सेलाकुई में किराये के कमरे में रह रही थी। हत्या के दौरान पंकज सिंह ने खुद को भी घायल कर लिया था। दूसरे दिन सुबह पड़ोसियों ने कमरे से कराहने की आवाजें सुनीं तो उन्होंने फोन से इसकी जानकारी प्रियंका के पिता और पुलिस को दी। इसके बाद मौके पर पहुंचे पिता और पुलिस ने खिड़की तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। जहां प्रियंका और पंकज लहूलुहान पड़े थे। आननफानन दोनों को दून अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्रियंका की मौत हो गई थी।
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