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रियल एस्टेट कारोबारियों ने रेरा में मांगी छूट
Updated Thu, 21 Dec 2017 02:17 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
दून रियल एस्टेट एसोसिएशन ने रेरा कानून में संशोधन करने की मांग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद रमेश चंद्र पोखरियाल को ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि रेरा कानून से भूमि की खरीद फरोख्त करने वालों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
एसोसिएशन अध्यक्ष रणबीर सिंह चौधरी ने कहा कि भूमि के कारोबार से हजारों युवाओं की रोजी रोटी जुड़ी है। कोई भवन निर्माण से जुड़ा है तो कोई प्रापर्टी की खरीद फरोख्त करता है। उन्होंने कहा कि रेरा कानून में भूमि की रियल एस्टेट कारोबारियों को राहत दी जाए। व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि प्रापर्टी से जुड़े अधिकांश कारोबारियों की साइट आधी अधूरी है। 30 से 30 फीसदी भूखंड बिकने बाकी हैं। पुरानी साइटों को पूरा करने के लिए एक साल तक उन्हें रेरा से मुक्त रखा जाए। एसोसिएशन सचिव केवल सिंह पुंडीर ने कहा कि प्राधिकरण से ले आउट पास कराने के नियम सरल बनाए जाएं। सड़क की चौड़ाई और पार्क के लिए ले आउट के मानकों में संशोधन किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में एक एकड़ तक भूमि पर प्राधिकरण से ले आउट पास कराने की बाध्यता को खत्म किया जाए। आर-तीन की भूमि का रकबा विस्तार किया जाए।
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दून रियल एस्टेट एसोसिएशन ने रेरा कानून में संशोधन करने की मांग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद रमेश चंद्र पोखरियाल को ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि रेरा कानून से भूमि की खरीद फरोख्त करने वालों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
एसोसिएशन अध्यक्ष रणबीर सिंह चौधरी ने कहा कि भूमि के कारोबार से हजारों युवाओं की रोजी रोटी जुड़ी है। कोई भवन निर्माण से जुड़ा है तो कोई प्रापर्टी की खरीद फरोख्त करता है। उन्होंने कहा कि रेरा कानून में भूमि की रियल एस्टेट कारोबारियों को राहत दी जाए। व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि प्रापर्टी से जुड़े अधिकांश कारोबारियों की साइट आधी अधूरी है। 30 से 30 फीसदी भूखंड बिकने बाकी हैं। पुरानी साइटों को पूरा करने के लिए एक साल तक उन्हें रेरा से मुक्त रखा जाए। एसोसिएशन सचिव केवल सिंह पुंडीर ने कहा कि प्राधिकरण से ले आउट पास कराने के नियम सरल बनाए जाएं। सड़क की चौड़ाई और पार्क के लिए ले आउट के मानकों में संशोधन किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में एक एकड़ तक भूमि पर प्राधिकरण से ले आउट पास कराने की बाध्यता को खत्म किया जाए। आर-तीन की भूमि का रकबा विस्तार किया जाए।
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