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रोजगार के अभाव में बंजर हो गए गांव के गांव
Updated Sat, 10 Nov 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। राज्य स्थापना दिवस पर देवभूमि महासभा की ओर से आयोजित बैठक में राज्य के लिए शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए पहाड़ से हो रहे पलायन पर चिंता जताई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सभी मुख्यमंत्रियों ने खनन और शराब नीतियों को अपने-अपने हिसाब से बनाया, लेकिन पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार देने के लिए कोई नीति नहीं बनाई। जिन उद्देश्यों के लिए राज्य का निर्माण हुआ था आज वह मुद्दे भी हाशिए पर चले गए हैं।
शुक्रवार को महासभा के कार्यालय में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष प्रमोद कपरूवाण शास्त्री ने कहा कि 18 साल बाद भी रोजगार के अभाव में प्रदेश के गांव के गांव विरान और बंजर होते जा रहे हैं। जिसके चलते प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। आरोप लगाया कि सरकार ने पलायन आयोग बनाकर अपने चहेतों को पद पर बैठाने का काम किया है।
कार्यक्रम के संचालक संजय सिंह चौहान ने कहा कि वर्षों से महासभा सामाजिक क्षेत्र में काम रही है। समय-समय पर स्वच्छता कार्यक्रम और संस्कृति का बचाने के लिए कई कार्यक्रम किए जा चुके हैं। इस अवसर पर महासभा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि प्रदेश के पाठ्यक्रमों में संस्कृत विषय को अनिवार्य किया जाए। बैठक में गिरिजेश बहुगुणा, शूरवीर सिंह कठैत, ममता नेगी, शांति रावत, जिया शर्मा, दीपक नेगी, राजवीर सिंह रावत, वीएस पंवार, हुकुम चौहान, लक्ष्मी नेगी, पार्वती यादव आदि मौजूद रहे।
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देहरादून। राज्य स्थापना दिवस पर देवभूमि महासभा की ओर से आयोजित बैठक में राज्य के लिए शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए पहाड़ से हो रहे पलायन पर चिंता जताई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सभी मुख्यमंत्रियों ने खनन और शराब नीतियों को अपने-अपने हिसाब से बनाया, लेकिन पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार देने के लिए कोई नीति नहीं बनाई। जिन उद्देश्यों के लिए राज्य का निर्माण हुआ था आज वह मुद्दे भी हाशिए पर चले गए हैं।
शुक्रवार को महासभा के कार्यालय में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष प्रमोद कपरूवाण शास्त्री ने कहा कि 18 साल बाद भी रोजगार के अभाव में प्रदेश के गांव के गांव विरान और बंजर होते जा रहे हैं। जिसके चलते प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। आरोप लगाया कि सरकार ने पलायन आयोग बनाकर अपने चहेतों को पद पर बैठाने का काम किया है।
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कार्यक्रम के संचालक संजय सिंह चौहान ने कहा कि वर्षों से महासभा सामाजिक क्षेत्र में काम रही है। समय-समय पर स्वच्छता कार्यक्रम और संस्कृति का बचाने के लिए कई कार्यक्रम किए जा चुके हैं। इस अवसर पर महासभा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि प्रदेश के पाठ्यक्रमों में संस्कृत विषय को अनिवार्य किया जाए। बैठक में गिरिजेश बहुगुणा, शूरवीर सिंह कठैत, ममता नेगी, शांति रावत, जिया शर्मा, दीपक नेगी, राजवीर सिंह रावत, वीएस पंवार, हुकुम चौहान, लक्ष्मी नेगी, पार्वती यादव आदि मौजूद रहे।
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