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25 तक देनी होगी आश्रमों, धर्मशालाओं, होटलों की सूची
Updated Sat, 20 Oct 2018 01:40 AM IST
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25 तक देनी होगी आश्रमों, धर्मशालाओं, होटलों की सूची
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से राज्य प्रदूषण बोर्ड से सभी जिलों में संचालित होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं की सूची तलब किए जाने से शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप की स्थिति है। जिलाधिकारियों की ओर से सूची मुहैया कराने में हो रही देरी पर नाराजगी सचिव वन एवं पर्यावरण ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि वे हर हाल में 25 अक्तूबर तक सूची मुहैया कराएं।
उल्लेखनीय है कि राज्य के सभी जिलों में ऐसे होटल, धर्मशाला और आश्रम संचालित हैं, जो गंगा समेत सभी नदियों को प्रदूषित कर रहे हैं। इनसे निकलने वाले प्रदूषित पानी के संशोधन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मामला एनजीटी तक पहुंचा तो एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से राज्य में संचालित सभी होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं की सूची तलब की लेकिन इसकी एजेंसियों से जांच कराई जा सके। खास बात यह है कि राज्य प्रदूषण बोर्ड और जिला प्रशासन के पास इसकी कोई सूची नहीं है।
राज्य प्रदूषण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने जानकारी मांगी तो अधिकारियों ने जानकारी नहीं मुहैया कराई। ऐसे में अब सचिव वन अरविंद सिंह हयांकी ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि किसी भी सूरत में 25 अक्तूबर तक सूची मुहैया कराई जाए। दूसरी ओर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने स्तर पर निजी कंपनी से सर्वे कराने की योजना बनाई तो सर्वे कंपनी ने एक करोड़ रुपये की मांग रख दी है। बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। शासन से मंजूरी मिलने के साथ ही सर्वे कंपनी को टेंडर जारी कर दिया जाएगा।
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देहरादून। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से राज्य प्रदूषण बोर्ड से सभी जिलों में संचालित होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं की सूची तलब किए जाने से शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप की स्थिति है। जिलाधिकारियों की ओर से सूची मुहैया कराने में हो रही देरी पर नाराजगी सचिव वन एवं पर्यावरण ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि वे हर हाल में 25 अक्तूबर तक सूची मुहैया कराएं।
उल्लेखनीय है कि राज्य के सभी जिलों में ऐसे होटल, धर्मशाला और आश्रम संचालित हैं, जो गंगा समेत सभी नदियों को प्रदूषित कर रहे हैं। इनसे निकलने वाले प्रदूषित पानी के संशोधन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मामला एनजीटी तक पहुंचा तो एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से राज्य में संचालित सभी होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं की सूची तलब की लेकिन इसकी एजेंसियों से जांच कराई जा सके। खास बात यह है कि राज्य प्रदूषण बोर्ड और जिला प्रशासन के पास इसकी कोई सूची नहीं है।
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राज्य प्रदूषण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने जानकारी मांगी तो अधिकारियों ने जानकारी नहीं मुहैया कराई। ऐसे में अब सचिव वन अरविंद सिंह हयांकी ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि किसी भी सूरत में 25 अक्तूबर तक सूची मुहैया कराई जाए। दूसरी ओर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने स्तर पर निजी कंपनी से सर्वे कराने की योजना बनाई तो सर्वे कंपनी ने एक करोड़ रुपये की मांग रख दी है। बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। शासन से मंजूरी मिलने के साथ ही सर्वे कंपनी को टेंडर जारी कर दिया जाएगा।
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