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फोटो समाचार- भांगड़ा-गिद्दा से बांधा लोहड़ी मेले में समां
Updated Mon, 15 Jan 2018 01:49 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
उत्तरांचल पंजाबी महासभा की ओर से आयोजित लोहड़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने भांगड़ा और गिद्दा से समां बांध दिया। पंजाबी सत्य कला केंद्र चंडीगढ़ और सांस्कृतिक निदेशालय उत्तराखंड के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में देर तक लोग ढोल की थाप पर थिरकते रहे। इस दौरान पंजाबी महासभा ने सीएम से अपनी भाषा को राज्य की दूसरी भाषा का दर्जा देने की मांग की।
रविवार की शाम को रेसकोर्स में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लोहड़ी पर्व सुख-समृद्धि का पर्व है। मूल रूप से यह पंजाबी समुदाय का त्योहार जरूर है, लेकिन अन्य समुदाय के लोगों ने इसे अपनाया है। आज हर कोई लोहड़ी पर्व बड़े उल्लास के साथ मनाता है। इसके बाद पंजाबी लोक कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियों से माहौल को रंगीन बनाया। सुंदर-मुंदरिए, तेरा की विचारा, शावा बई लोहड़ी आइया, पा नि माई पाथी, तेरा पुत्त चढे़गा हाथी, साडे पैरा हेठ रोड, सानूं छेती-छेती तोर जैसे पारंपरिक पंजाबी गीतों पर कलाकारों ने अपने भांगड़ा और गिद्दा से समां बांध दिया। कार्यक्रम में पंजाबी अंदाज में हास्य कलाकारों ने भी एक से एक प्रस्तुतियों से लोगों को खूब गुदगुदाया। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव घई ने कहा कि लोहड़ी पर्व आपसी भाईचारे, प्रेम-सद्भाव का त्योहार है। इस मौके पर लोहड़ी कमेटी के चेयरमैन पीएस कोचर, को चेयरमैन हरपाल सिंह सेठी, कार्यक्रम संयोजक गुरदीप सिंह सहोता, महानगर अध्यक्ष राजीव सच्चर, महानगर महामंत्री जीएस आनंद सहित भारी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे। महासभा ने सीएम को एक ज्ञापन दिया। उन्होंने पंजाबी भाषा को उत्तराखंड की दूसरी राजकीय भाषा घोषित करने की मांग की। महासभा ने पंजाबी अकादमी के संचालन की जिम्मेदारी उत्तरांचल पंजाबी महासभा को सौंपने की मांग भी की।
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उत्तरांचल पंजाबी महासभा की ओर से आयोजित लोहड़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने भांगड़ा और गिद्दा से समां बांध दिया। पंजाबी सत्य कला केंद्र चंडीगढ़ और सांस्कृतिक निदेशालय उत्तराखंड के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में देर तक लोग ढोल की थाप पर थिरकते रहे। इस दौरान पंजाबी महासभा ने सीएम से अपनी भाषा को राज्य की दूसरी भाषा का दर्जा देने की मांग की।
रविवार की शाम को रेसकोर्स में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लोहड़ी पर्व सुख-समृद्धि का पर्व है। मूल रूप से यह पंजाबी समुदाय का त्योहार जरूर है, लेकिन अन्य समुदाय के लोगों ने इसे अपनाया है। आज हर कोई लोहड़ी पर्व बड़े उल्लास के साथ मनाता है। इसके बाद पंजाबी लोक कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियों से माहौल को रंगीन बनाया। सुंदर-मुंदरिए, तेरा की विचारा, शावा बई लोहड़ी आइया, पा नि माई पाथी, तेरा पुत्त चढे़गा हाथी, साडे पैरा हेठ रोड, सानूं छेती-छेती तोर जैसे पारंपरिक पंजाबी गीतों पर कलाकारों ने अपने भांगड़ा और गिद्दा से समां बांध दिया। कार्यक्रम में पंजाबी अंदाज में हास्य कलाकारों ने भी एक से एक प्रस्तुतियों से लोगों को खूब गुदगुदाया। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव घई ने कहा कि लोहड़ी पर्व आपसी भाईचारे, प्रेम-सद्भाव का त्योहार है। इस मौके पर लोहड़ी कमेटी के चेयरमैन पीएस कोचर, को चेयरमैन हरपाल सिंह सेठी, कार्यक्रम संयोजक गुरदीप सिंह सहोता, महानगर अध्यक्ष राजीव सच्चर, महानगर महामंत्री जीएस आनंद सहित भारी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे। महासभा ने सीएम को एक ज्ञापन दिया। उन्होंने पंजाबी भाषा को उत्तराखंड की दूसरी राजकीय भाषा घोषित करने की मांग की। महासभा ने पंजाबी अकादमी के संचालन की जिम्मेदारी उत्तरांचल पंजाबी महासभा को सौंपने की मांग भी की।
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