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बैंकों के विलय के विरोध में प्रदर्शन
Updated Wed, 19 Sep 2018 02:28 AM IST
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ब्यूरोे/अमर उजाला, देहरादून
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने मंगलवार को केंद्र सरकार के बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के आपसी विलय की घोषणा के विरोध में प्रदर्शन किया। केनरा बैंक प्रादेशिक कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए जल्द निर्णय वापस लेने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
संगठन के संयोजक जगमोहन मेंदीरता के नेतृत्व में दर्जनों लोग केनरा बैंक प्रादेशिक कार्यालय के बाहर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदर्शन कर आक्रोश जताया। मेंदीरता ने कहा कि हाल ही में स्टेट बैंक में पांच सहयोगी बैंकों का विलय किया गया है। इस कारण तमाम बैंक शाखाओं को बंद करना पड़ा था। बैंकों में बढ़ते एनपीए के लिए सरकार जिम्मेदार है। कहा कि 31 मार्च तक सभी बैंकों का लाभ 155000 करोड़ रुपये था। लेकिन, खराब ऋणों के समायोजन के लिए 270000 करोड़ का प्रावधान करने से बैंकों को 85000 करोड़ का नुकसान हुआ। बड़े पूंजीपतियों के ऋणों का पुनर्गठन कर उन्हें दोबारा ऋण दिया गया। सरकार की नीतियों के चलते विजय माल्या, ललित मोदी समेत तमाम लोग बैंकों का पैसा लेकर विदेश भाग गए। इस मौके पर हरिओम, पीआर कुकरेती, वीके जोशी, सुधीर रावत, बीपी सुंदरियाल, मयंक शर्मा, आरके गैरोला, आरपी शर्मा, सुधीर रावत, मुरारी लाल नौटियाल, सीके जोशी, विनय कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने मंगलवार को केंद्र सरकार के बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के आपसी विलय की घोषणा के विरोध में प्रदर्शन किया। केनरा बैंक प्रादेशिक कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए जल्द निर्णय वापस लेने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
संगठन के संयोजक जगमोहन मेंदीरता के नेतृत्व में दर्जनों लोग केनरा बैंक प्रादेशिक कार्यालय के बाहर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदर्शन कर आक्रोश जताया। मेंदीरता ने कहा कि हाल ही में स्टेट बैंक में पांच सहयोगी बैंकों का विलय किया गया है। इस कारण तमाम बैंक शाखाओं को बंद करना पड़ा था। बैंकों में बढ़ते एनपीए के लिए सरकार जिम्मेदार है। कहा कि 31 मार्च तक सभी बैंकों का लाभ 155000 करोड़ रुपये था। लेकिन, खराब ऋणों के समायोजन के लिए 270000 करोड़ का प्रावधान करने से बैंकों को 85000 करोड़ का नुकसान हुआ। बड़े पूंजीपतियों के ऋणों का पुनर्गठन कर उन्हें दोबारा ऋण दिया गया। सरकार की नीतियों के चलते विजय माल्या, ललित मोदी समेत तमाम लोग बैंकों का पैसा लेकर विदेश भाग गए। इस मौके पर हरिओम, पीआर कुकरेती, वीके जोशी, सुधीर रावत, बीपी सुंदरियाल, मयंक शर्मा, आरके गैरोला, आरपी शर्मा, सुधीर रावत, मुरारी लाल नौटियाल, सीके जोशी, विनय कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।
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