{"_id":"5b942e8e867a557f0256681e","slug":"101536437902-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्रसंघ चुनाव- समीक्षा- एमकेपी, एसजीआरआर में एबीवीपी को भारी पड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्रसंघ चुनाव- समीक्षा- एमकेपी, एसजीआरआर में एबीवीपी को भारी पड़े
Updated Sun, 09 Sep 2018 01:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एमकेपी, एसजीआरआर में एबीवीपी को भारी पड़े गलत फैसले
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर इस साल एमकेपी और एसजीआरआर कॉलेज में गलत फैसले भारी पड़े। संगठन को दो कॉलेजों में मुंह की खानी पड़ी है। हालांकि डीबीएस कॉलेज ने संगठन की लाज बचा ली है।
माना जा रहा कि एमकेपी कॉलेज में टिकट के प्रबल दावेदारों को टिकट नहीं मिलने पर बगावत हो गई। जो छात्राएं हर साल एबीवीपी के लिए जी जान से मेहनत करती थीं, उन्हें संगठन ने दरकिनार किया तो उन्होंने बागी रुख अपना लिया। संगठन के उसूलों के बाहर जाकर बागी छात्राओं ने पूरा पैनल ही अलग से उतार दिया। एबीवीपी के लिए हालात ऐसे बन गए कि वह अध्यक्ष पद के अलावा किसी भी पद पर भी प्रत्याशी ही नहीं उतार पाई। बात यहीं नहीं थमी, बागी गुट ने एबीवीपी को नुकसान पहुंचाना शुरू किया तो इसका नतीजा बुरी हार के तौर पर सामने आया।
एसजीआरआर पीजी कॉलेज में भी एबीवीपी का फैसला गलत साबित हुआ। कॉलेज में एबीवीपी के प्रबल दावेदारों को दरकिनार कर दिया गया। जिस गुट को नकारा गया, वह हर साल चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता रहा। लिहाजा, बागी गुट ने प्रविंद गुप्ता को प्रत्याशी घोषित करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा। नतीजे के तौर पर एसजीआरआर में भी अध्यक्ष सहित सभी पदों पर हार का मुंह देखना पड़ा। छात्रसंघ चुनाव से एक दिन पहले एबीवीपी के मजबूत पदाधिकारी सोनू सरदार सहित कई कार्यकर्ताओं को निष्कासित संगठन के लिए मुसीबत भरा कदम साबित हुआ। हालांकि डीबीएस कॉलेज और डीएवी कॉलेज में एबीवीपी ने इस साल गुटबाजी पर रोक लगाई। दोनों ही कॉलेजों में प्रत्याशियों ने एकजुटता के साथ प्रचार किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर इस साल एमकेपी और एसजीआरआर कॉलेज में गलत फैसले भारी पड़े। संगठन को दो कॉलेजों में मुंह की खानी पड़ी है। हालांकि डीबीएस कॉलेज ने संगठन की लाज बचा ली है।
माना जा रहा कि एमकेपी कॉलेज में टिकट के प्रबल दावेदारों को टिकट नहीं मिलने पर बगावत हो गई। जो छात्राएं हर साल एबीवीपी के लिए जी जान से मेहनत करती थीं, उन्हें संगठन ने दरकिनार किया तो उन्होंने बागी रुख अपना लिया। संगठन के उसूलों के बाहर जाकर बागी छात्राओं ने पूरा पैनल ही अलग से उतार दिया। एबीवीपी के लिए हालात ऐसे बन गए कि वह अध्यक्ष पद के अलावा किसी भी पद पर भी प्रत्याशी ही नहीं उतार पाई। बात यहीं नहीं थमी, बागी गुट ने एबीवीपी को नुकसान पहुंचाना शुरू किया तो इसका नतीजा बुरी हार के तौर पर सामने आया।
विज्ञापन
एसजीआरआर पीजी कॉलेज में भी एबीवीपी का फैसला गलत साबित हुआ। कॉलेज में एबीवीपी के प्रबल दावेदारों को दरकिनार कर दिया गया। जिस गुट को नकारा गया, वह हर साल चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता रहा। लिहाजा, बागी गुट ने प्रविंद गुप्ता को प्रत्याशी घोषित करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा। नतीजे के तौर पर एसजीआरआर में भी अध्यक्ष सहित सभी पदों पर हार का मुंह देखना पड़ा। छात्रसंघ चुनाव से एक दिन पहले एबीवीपी के मजबूत पदाधिकारी सोनू सरदार सहित कई कार्यकर्ताओं को निष्कासित संगठन के लिए मुसीबत भरा कदम साबित हुआ। हालांकि डीबीएस कॉलेज और डीएवी कॉलेज में एबीवीपी ने इस साल गुटबाजी पर रोक लगाई। दोनों ही कॉलेजों में प्रत्याशियों ने एकजुटता के साथ प्रचार किया।
विज्ञापन