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60 प्रतिशत सत्यापन पर ही अटकी सूई
Updated Wed, 05 Sep 2018 02:04 AM IST
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नहीं हो पाया पेंशन सत्यापन का कार्य पूरा
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। चार माह से चल रहा पेंशनरों के भौतिक सत्यापन का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। स्थिति ये है तमाम कवायद के बाद बावजूद निर्धारित तिथि तक सत्यापन का करीब 60 प्रतिशत कार्य ही हो पाया है।
जिले में 79800 पेंशनर हैं। पेंशन फर्जीवाड़ा रोकने के लिए समाज कल्याण विभाग प्रतिवर्ष दिव्यांग, वृद्धावस्था व विधवा पेंशनरों का सत्यापन कराता है। गत 30 मई से पेंशन सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके बाद सत्यापन के लिए तहसील परिसर में पेंशनरों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। सत्यापन कराने के लिए दिव्यांग और बुजुर्ग सीढ़ियां चढ़कर चौथे माले पर पहुंच रहे थे। जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उनकी इस फजीहत को देखते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर ने घोषणा की थी कि पेंशनरों को तहसील आने की जरूरत नहीं है। सभी का सत्यापन घर-घर जाकर होगा, लेकिन यह दावा भी हवाई साबित हुआ। तीसरी बार इसकी अंतिम तिथि 15 अगस्त तय की गई थी।
अब न तो पेंशनर सत्यापन कराने आ रहे है और न ही कोई उनके घर तक ही पहुंच पा रहा है। तीन बार इसी का नतीजा है कि तिथि बढ़ाने के बावजूद अभी भी लगभग 40 प्रतिशत पेंशन ऐसे हैं जिनका सत्यापन नहीं हो पाया। अब निर्धारित की गई तिथि भी बीत चुकी है। इससे पेंशनर परेशान हैं। कई बुजुर्ग पेंशनर ने पेंशन रुकने की आशंका जताई है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। चार माह से चल रहा पेंशनरों के भौतिक सत्यापन का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। स्थिति ये है तमाम कवायद के बाद बावजूद निर्धारित तिथि तक सत्यापन का करीब 60 प्रतिशत कार्य ही हो पाया है।
जिले में 79800 पेंशनर हैं। पेंशन फर्जीवाड़ा रोकने के लिए समाज कल्याण विभाग प्रतिवर्ष दिव्यांग, वृद्धावस्था व विधवा पेंशनरों का सत्यापन कराता है। गत 30 मई से पेंशन सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके बाद सत्यापन के लिए तहसील परिसर में पेंशनरों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। सत्यापन कराने के लिए दिव्यांग और बुजुर्ग सीढ़ियां चढ़कर चौथे माले पर पहुंच रहे थे। जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उनकी इस फजीहत को देखते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर ने घोषणा की थी कि पेंशनरों को तहसील आने की जरूरत नहीं है। सभी का सत्यापन घर-घर जाकर होगा, लेकिन यह दावा भी हवाई साबित हुआ। तीसरी बार इसकी अंतिम तिथि 15 अगस्त तय की गई थी।
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अब न तो पेंशनर सत्यापन कराने आ रहे है और न ही कोई उनके घर तक ही पहुंच पा रहा है। तीन बार इसी का नतीजा है कि तिथि बढ़ाने के बावजूद अभी भी लगभग 40 प्रतिशत पेंशन ऐसे हैं जिनका सत्यापन नहीं हो पाया। अब निर्धारित की गई तिथि भी बीत चुकी है। इससे पेंशनर परेशान हैं। कई बुजुर्ग पेंशनर ने पेंशन रुकने की आशंका जताई है।
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