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सरकारों की बेरुखी, उद्योगों के लिए मुश्किल
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
उत्तराखंड बनने के बाद सरकारों की बेरुखी आज भी उद्योगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। सूक्ष्म उद्योग लगाने के लिए भी इतने सख्त और पुराने नियम हैं कि प्रक्रिया पूरी करने में ही एक-एक साल तक का समय लग जाता है। अब उद्योगपति इन नियमों में सरकार से बदलाव की मांग करने का निर्णय लिया है। ऐसे ही कुछ नियम उत्तराखंड इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन की कारपोरेट मीट में सामने आए, जिनमें बदलाव की दरकार है।
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दून वैली नोटिफिकेशन
यह एक्ट 1989 से लागू है। देहरादून में उद्योग स्थापित करने के लिए एनवॉयरमेंट की एनओसी लेने में ही आठ-आठ तक माह का समय लग जाता है। उद्योगपतियों के मुताबिक, इस एक्ट की जद में ऑरेंज कैटेगरी के नॉन पॉल्यूटेड उद्योग भी आते हैं। यानी पॉल्यूशन वाले और बिना पॉल्यूशन वाले सभी उद्योगों के लिए एक ही एक्ट लागू है। 28 साल पुराने इस एक्ट को अब संशोधित करने की मांग पुरजोर तरीके से उठने लगी है।
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फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएआईआई) से किसी भी फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को लगाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य होता है। उत्तराखंड में यह परमिट लेने के लिए शुल्क का भुगतान केवल ऑफलाइन होता है। इसके लिए पहले चालान फार्म लाने पड़ते हैं, फिर चक्कर काट-काटकर शुल्क जमा होता है। इसके बाद कहीं जाकर लाइसेंस मिलता है। जबकि, देश के बाकी सभी राज्यों में यह शुल्क ऑनलाइन जमा होता है।
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परचेजिंग पॉलिसी की लापरवाही
प्रदेश में यूं तो प्राइज एंड परचेज प्रेफरेंस पॉलिसी लागू है, लेकिन इसका सख्ती से अनुपालन नहीं हो रहा है। हालात यह हैं कि प्रदेश के ज्यादातर सरकारी विभाग, दूसरे राज्यों से माल खरीदते हैं। जबकि, वही माल उत्तराखंड में भी तैयार होता है। दूसरे राज्य यहां से माल खरीदते हैं। उद्योगपतियों के अनुसार, इस पॉलिसी के सख्ती से लागू होने पर निश्चित तौर पर उद्योगों को लाभ होगा।
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उत्तराखंड बनने के बाद सरकारों की बेरुखी आज भी उद्योगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। सूक्ष्म उद्योग लगाने के लिए भी इतने सख्त और पुराने नियम हैं कि प्रक्रिया पूरी करने में ही एक-एक साल तक का समय लग जाता है। अब उद्योगपति इन नियमों में सरकार से बदलाव की मांग करने का निर्णय लिया है। ऐसे ही कुछ नियम उत्तराखंड इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन की कारपोरेट मीट में सामने आए, जिनमें बदलाव की दरकार है।
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दून वैली नोटिफिकेशन
यह एक्ट 1989 से लागू है। देहरादून में उद्योग स्थापित करने के लिए एनवॉयरमेंट की एनओसी लेने में ही आठ-आठ तक माह का समय लग जाता है। उद्योगपतियों के मुताबिक, इस एक्ट की जद में ऑरेंज कैटेगरी के नॉन पॉल्यूटेड उद्योग भी आते हैं। यानी पॉल्यूशन वाले और बिना पॉल्यूशन वाले सभी उद्योगों के लिए एक ही एक्ट लागू है। 28 साल पुराने इस एक्ट को अब संशोधित करने की मांग पुरजोर तरीके से उठने लगी है।
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फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएआईआई) से किसी भी फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को लगाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य होता है। उत्तराखंड में यह परमिट लेने के लिए शुल्क का भुगतान केवल ऑफलाइन होता है। इसके लिए पहले चालान फार्म लाने पड़ते हैं, फिर चक्कर काट-काटकर शुल्क जमा होता है। इसके बाद कहीं जाकर लाइसेंस मिलता है। जबकि, देश के बाकी सभी राज्यों में यह शुल्क ऑनलाइन जमा होता है।
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परचेजिंग पॉलिसी की लापरवाही
प्रदेश में यूं तो प्राइज एंड परचेज प्रेफरेंस पॉलिसी लागू है, लेकिन इसका सख्ती से अनुपालन नहीं हो रहा है। हालात यह हैं कि प्रदेश के ज्यादातर सरकारी विभाग, दूसरे राज्यों से माल खरीदते हैं। जबकि, वही माल उत्तराखंड में भी तैयार होता है। दूसरे राज्य यहां से माल खरीदते हैं। उद्योगपतियों के अनुसार, इस पॉलिसी के सख्ती से लागू होने पर निश्चित तौर पर उद्योगों को लाभ होगा।