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सभी क्रांति बिना पढे लिखे हुई : वेद प्रताप
Updated Tue, 10 Jul 2018 01:08 AM IST
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हरिद्वार। जयराम आश्रम में देश के कवियों का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू हुआ। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार वेद प्रताप वैदिक ने कहा कि जितनी भी क्रांति हुई हैं बिना लिखे हुए हुई। कवियों को करोड़ों लोग सुनते हैं और लिखने-पढ़ने वाले कितने होते हैं। बोले शब्द का महत्व बड़ा है। इसलिए कवि की समाज पर बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कवियों का सम्मेलन होना बड़ा बात कही।
उन्होंने कहा कि कवि ईमान की बात करते हैं, वह हमेशा सत्य की बात करते हैं और नेता से ज्यादा प्रमाणिक उनकी बातें होती हैं। कवि की बातें सीधी उतरती हैं। उनके लिखे और बोले शब्द में अंतर है। कवि युगद्रष्टा होता है और समाज का आइना भी। यदि आइना साफ होगा तो वह समाज का असली चित्र दिखा सकेगा। समिति के अध्यक्ष अरुण जैमिनी ने कहा कि कवि सम्मेलन समिति का उद्देश्य श्रेष्ठ है और इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए संगठनात्मक रूप से शक्तिशाली होना आवश्यक है। जब कवि सचेत होगा तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन होंगे। रमेश मुस्कान ने कवियों का संगठन होना चाहिए, ताकि एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल हो सके। सत्र के अध्यक्ष एवं जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप, समिति के संरक्षक सुरेंद्र शर्मा, डॉ. अशोक चक्रधर, डॉ. हरिओम पवार, डॉ. कुंवर बेचैन साहित उपस्थित कवियों ने दिवंगत कवियों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। सचिव रमेश मुस्कान ने समिति के उद्देश्यों और कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। वहीं,
दूसरे सत्र में डॉ. प्रवीण शुक्ल ने संचालन किया। मुख्य वक्ता डॉ. अशोक चक्रधर ने %कविता के इर्दगिर्द% विषय पर प्रभावपूर्ण संबोधन किया। उन्होंने कविता के भाव और अभिव्यक्ति को प्रभावित करने वाले तत्वों और वातावरण पर वास्तविकता के अलोक में महत्वपूर्ण बातें भी बताईं। अधिवेशन में दिल्ली, हरियाणा,राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, बुदेलखंड समेत पूरे देश से 80 कवि शामिल हुए। समिति के उपाध्यक्ष सर्वेश अस्थाना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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अधिवेशन में ये कवि हुए शामिल
इस मौके पर पंकज प्रसून, विनय शुक्ल विनम्र, मास्टर महेंद्र, जैनेंद्र कर्दम, अशोक चारण, पार्थ नवीन, अनुज त्यागी, शंभू शिखर, अनुज त्यागी, सचिन दीक्षित, चतन चर्चित, देवदत्त देव, अभिराज पंकज, सुशांत राय, बाबू घोपल, पंकज अंगार, मनीष मधुकर, सौरभ जैन सुमन, धर्मेँद्र सोलंकी, मुकुल हासन, पीके धुत्त, डॉ. विष्णु सक्सेना, रास बिहारी गिरि, शशिकांत यादव, अज्ञात शत्रु, अशोक भाटी, डॉ. सरिता शर्मा, मनोहर मनोज, राजेंद्र मालवीय, संदीप शर्मा, शालिनी सरगम, सुभाष मलिक, डॉ. विजय मित्तल, विनोद राजयोगी, मानक शाह, शरीफ भारती, मधुप मेहता आदि शामिल हुए।
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उन्होंने कहा कि कवि ईमान की बात करते हैं, वह हमेशा सत्य की बात करते हैं और नेता से ज्यादा प्रमाणिक उनकी बातें होती हैं। कवि की बातें सीधी उतरती हैं। उनके लिखे और बोले शब्द में अंतर है। कवि युगद्रष्टा होता है और समाज का आइना भी। यदि आइना साफ होगा तो वह समाज का असली चित्र दिखा सकेगा। समिति के अध्यक्ष अरुण जैमिनी ने कहा कि कवि सम्मेलन समिति का उद्देश्य श्रेष्ठ है और इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए संगठनात्मक रूप से शक्तिशाली होना आवश्यक है। जब कवि सचेत होगा तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन होंगे। रमेश मुस्कान ने कवियों का संगठन होना चाहिए, ताकि एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल हो सके। सत्र के अध्यक्ष एवं जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप, समिति के संरक्षक सुरेंद्र शर्मा, डॉ. अशोक चक्रधर, डॉ. हरिओम पवार, डॉ. कुंवर बेचैन साहित उपस्थित कवियों ने दिवंगत कवियों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। सचिव रमेश मुस्कान ने समिति के उद्देश्यों और कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। वहीं,
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दूसरे सत्र में डॉ. प्रवीण शुक्ल ने संचालन किया। मुख्य वक्ता डॉ. अशोक चक्रधर ने %कविता के इर्दगिर्द% विषय पर प्रभावपूर्ण संबोधन किया। उन्होंने कविता के भाव और अभिव्यक्ति को प्रभावित करने वाले तत्वों और वातावरण पर वास्तविकता के अलोक में महत्वपूर्ण बातें भी बताईं। अधिवेशन में दिल्ली, हरियाणा,राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, बुदेलखंड समेत पूरे देश से 80 कवि शामिल हुए। समिति के उपाध्यक्ष सर्वेश अस्थाना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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अधिवेशन में ये कवि हुए शामिल
इस मौके पर पंकज प्रसून, विनय शुक्ल विनम्र, मास्टर महेंद्र, जैनेंद्र कर्दम, अशोक चारण, पार्थ नवीन, अनुज त्यागी, शंभू शिखर, अनुज त्यागी, सचिन दीक्षित, चतन चर्चित, देवदत्त देव, अभिराज पंकज, सुशांत राय, बाबू घोपल, पंकज अंगार, मनीष मधुकर, सौरभ जैन सुमन, धर्मेँद्र सोलंकी, मुकुल हासन, पीके धुत्त, डॉ. विष्णु सक्सेना, रास बिहारी गिरि, शशिकांत यादव, अज्ञात शत्रु, अशोक भाटी, डॉ. सरिता शर्मा, मनोहर मनोज, राजेंद्र मालवीय, संदीप शर्मा, शालिनी सरगम, सुभाष मलिक, डॉ. विजय मित्तल, विनोद राजयोगी, मानक शाह, शरीफ भारती, मधुप मेहता आदि शामिल हुए।