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संस्कृति निखारने में कलाकारों का अहम योगदान : बीना भट्ट
Updated Mon, 21 May 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
दून घाटी रंगमंच की ओर से चार दिवसीय 16वां भारत संस्कृति दर्पण नाट्य महोत्सव का शुभारंभ रविवार को नगर निगम प्रेक्षागृह में हुआ। पहले दिन तीन नाटकों का मंचन हुआ। इन नाटकों के जरिये समाज के विभिन्न स्वरूपों को मंचित किया गया।
महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर बीना भट्ट ने कहा कि राष्ट्र की संस्कृति निखारने में कला और कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्होंने समस्त कलाकारों का स्वागत किया और संस्कृति विभाग से हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। इस मौके पर आकाश शारदा नाटक मंच धनबाद झारखंड के कलाकारों ने ‘कथा एक कंस की’ नाटक का मंचन किया। इसमें एक प्रेमी द्वारा अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सामाजिक एवं पारिवारिक संबंधों को त्यागने और अंत में घुट-घुट कर मरने के भावों को दिखाया गया। कला शिक्षक संस्था आगरा के कलाकारों ने ‘आठवां स्वर्ग’ का मंचन कर महाकवि कालिदास के जीवन पर आधारित सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य की पुत्री के विवाह आदि के दृश्य मंचित किए। इस अवसर दून घाटी रंगमंच के मुख्य संरक्षक सुभाष चंद्र विरमानी, कार्यक्रम संयोजक नीनू सहगल, महासचिव महेश नारायण, उपाध्यक्ष तेज सिंह राठौर, सोम प्रकाश वाल्मीकि आदि मौजूद रहे। दून घाटी रंगमंच के संस्थापक अध्यक्ष नाट्य भूषण लक्ष्मी नारायण ने बताया कि पहले दिन तीन नाटकों का मंचन हुआ। सोमवार को नाटकों के अलावा लोक नृत्यों की प्रतियोगिता भी होगी।
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दून घाटी रंगमंच की ओर से चार दिवसीय 16वां भारत संस्कृति दर्पण नाट्य महोत्सव का शुभारंभ रविवार को नगर निगम प्रेक्षागृह में हुआ। पहले दिन तीन नाटकों का मंचन हुआ। इन नाटकों के जरिये समाज के विभिन्न स्वरूपों को मंचित किया गया।
महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर बीना भट्ट ने कहा कि राष्ट्र की संस्कृति निखारने में कला और कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्होंने समस्त कलाकारों का स्वागत किया और संस्कृति विभाग से हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। इस मौके पर आकाश शारदा नाटक मंच धनबाद झारखंड के कलाकारों ने ‘कथा एक कंस की’ नाटक का मंचन किया। इसमें एक प्रेमी द्वारा अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सामाजिक एवं पारिवारिक संबंधों को त्यागने और अंत में घुट-घुट कर मरने के भावों को दिखाया गया। कला शिक्षक संस्था आगरा के कलाकारों ने ‘आठवां स्वर्ग’ का मंचन कर महाकवि कालिदास के जीवन पर आधारित सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य की पुत्री के विवाह आदि के दृश्य मंचित किए। इस अवसर दून घाटी रंगमंच के मुख्य संरक्षक सुभाष चंद्र विरमानी, कार्यक्रम संयोजक नीनू सहगल, महासचिव महेश नारायण, उपाध्यक्ष तेज सिंह राठौर, सोम प्रकाश वाल्मीकि आदि मौजूद रहे। दून घाटी रंगमंच के संस्थापक अध्यक्ष नाट्य भूषण लक्ष्मी नारायण ने बताया कि पहले दिन तीन नाटकों का मंचन हुआ। सोमवार को नाटकों के अलावा लोक नृत्यों की प्रतियोगिता भी होगी।
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