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टाइगर के प्राकृतिक वास की स्थिति पर मंथन करेंगे विशेषज्ञ
Updated Tue, 24 Apr 2018 02:44 AM IST
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टाइगर के प्राकृतिक वास की स्थिति पर मंथन करेंगे विशेषज्ञ
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
भारत, नेपाल और भूटान के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में टाइगर के प्राकृतिक वास की स्थिति और उसमें आ रहे बदलाव पर मंथन के लिए तीनों देशों के टाइगर रिजर्व के निदेशक और विशेषज्ञ 27 अप्रैल को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यशाला में शामिल होंगे।
टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में पूरी दुनिया में काम करने वाली संस्था ग्लोबल टाइगर फोरम की ओर से इसका आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क और जिम कार्बेट नेशनल पार्क के निर्देशकों समेत कई विशेषज्ञ शामिल होंगे हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण में हो रहे बदलाव के चलते वन्य जीवोें के प्राकृतिक वास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। मैदान से लेकर पहाड़ तक के वन्य जीव इससे प्रभावित हो रहे हैं। मध्य एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले वन्य जीव भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली ग्लोबल टाइगर फोरम समेत कई सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं इस पर निगरानी रखे हुए हैं। इसी के मद्देनजर 27 अप्रैल को कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारत के सभी टाइगर रिजर्व पार्कों के निदेशकों के साथ ही भूटान और नेपाल के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि पूरी दुनिया में टाइगर्स की संख्या तेजी से घटी है। जिनके संरक्षण के लिए कई देशों की सरकारों की ओर कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इस योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
भारत, नेपाल और भूटान के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में टाइगर के प्राकृतिक वास की स्थिति और उसमें आ रहे बदलाव पर मंथन के लिए तीनों देशों के टाइगर रिजर्व के निदेशक और विशेषज्ञ 27 अप्रैल को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यशाला में शामिल होंगे।
टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में पूरी दुनिया में काम करने वाली संस्था ग्लोबल टाइगर फोरम की ओर से इसका आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क और जिम कार्बेट नेशनल पार्क के निर्देशकों समेत कई विशेषज्ञ शामिल होंगे हैं।
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राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण में हो रहे बदलाव के चलते वन्य जीवोें के प्राकृतिक वास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। मैदान से लेकर पहाड़ तक के वन्य जीव इससे प्रभावित हो रहे हैं। मध्य एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले वन्य जीव भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली ग्लोबल टाइगर फोरम समेत कई सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं इस पर निगरानी रखे हुए हैं। इसी के मद्देनजर 27 अप्रैल को कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारत के सभी टाइगर रिजर्व पार्कों के निदेशकों के साथ ही भूटान और नेपाल के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि पूरी दुनिया में टाइगर्स की संख्या तेजी से घटी है। जिनके संरक्षण के लिए कई देशों की सरकारों की ओर कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इस योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।