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स्वास्थ्य विभाग : झटका दे सकते हैं 18 चिकित्सक
Updated Fri, 30 Mar 2018 01:59 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला /देहरादून।
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग में 18 विशेषज्ञ डॉक्टर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने की तैयारी में हैं। इन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशालय में वीआरएस (वॉलेंटरी रिटायरमेंट स्कीम) के तहत आवेदन किया है। हालांकि महानिदेशालय ने एक ही आवेदन पर अभी फैसला लिया है। चार शासन को भेज दिए और बाकी सही फार्मेट में न होने की वजह से वापस कर दिए हैं।
प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के मामले में तो और भी बुरा हाल है। हाल यह है कि मात्र 12 फीसदी विशेषज्ञ डॉक्टरों के सहारे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। इनमें भी कई चिकित्सक नौकरी छोड़ने की तैयारी में है। एक ओर सरकार विशेष अभियान चलाकर डॉक्टरों की भर्ती कर रही है। ऐसे में यह घटनाक्रम सरकार के अभियान को झटका दे सकता है।
वीआरएस के लिए आवेदन करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि पद भरने के लिए सरकार नए डॉक्टरों को आकर्षित कर रही है, लेकिन पुराने डॉक्टरों के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है। पुराने डॉक्टरों पर आए दिन नई नीतियां व शर्तें थोपी जा रही हैं, लेकिन सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। इसके अलावा चिकित्सकों की कमी से काम का दबाव, वीआईपी ड्यूटी, यात्रा ड्यूटी के दौरान सुविधाओं का भी नितांत अभाव है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. आनंद शुक्ला ने कहा कि कुछ डॉक्टरों को पहाड़ की वर्षों की सेवा के बाद फिर पहाड़ में भेज दिया गया है। इसके अलावा यात्रा ड्यूटी के दौरान सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। इसके कारण कुछ डॉक्टरों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है।
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वीआरएस आवेदन लटकाने का औचित्य नहीं
वीआरएस के लिए आवेदन करने वाले दून अस्पताल के डॉ. एसडी जोशी का कहना है कि डॉक्टरों के लिए यात्रा ड्यूटी के दौरान पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। सीजन में दो से तीन बार ड्यूटी लगती है, इससे पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसके अलावा तबादलों में मनमानी, डॉक्टरों के साथ अभद्रता आदि से भी जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा वीआरएस के आवेदन लटकाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।
डॉक्टरों को नहीं मिलतीं सुविधाएं
संयुक्त चिकित्सालय ऋषिकेश में कार्यरत डॉ. एस कोठियाल के मुताबिक यात्रा और वीआईपी ड्यूटी के दौरान एसडीएम, तहसीलदार को तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन डॉक्टरों को कोई पूछने वाला नहीं है। कई बार भोजन के लिए भी अन्य लोगों के साथ लाइन में लगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विभाग में 21 साल की सेवा हो चुकी है। इसमें 16 साल संयुक्त चिकित्सालय श्रीनगर में एवं दो साल पौड़ी में सेवा की अब वीआरएस के लिए आवेदन किया है, लेकिन इसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है।
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18 डॉक्टरों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। इनमें से सीएमओ उत्तरकाशी कल्पना गुप्ता का वीआरएस मंजूर कर लिया गया है। इसके अलावा चार प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। जबकि अन्य प्रस्ताव लौटा दिए गए हैं। यह प्रस्ताव सही फॉरमेंट में न आने की वजह से लौटाए गए हैं।
-डॉ.अर्चना श्रीवास्तव, स्वास्थ्य महानिदेशक
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डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग में 18 विशेषज्ञ डॉक्टर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने की तैयारी में हैं। इन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशालय में वीआरएस (वॉलेंटरी रिटायरमेंट स्कीम) के तहत आवेदन किया है। हालांकि महानिदेशालय ने एक ही आवेदन पर अभी फैसला लिया है। चार शासन को भेज दिए और बाकी सही फार्मेट में न होने की वजह से वापस कर दिए हैं।
प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के मामले में तो और भी बुरा हाल है। हाल यह है कि मात्र 12 फीसदी विशेषज्ञ डॉक्टरों के सहारे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। इनमें भी कई चिकित्सक नौकरी छोड़ने की तैयारी में है। एक ओर सरकार विशेष अभियान चलाकर डॉक्टरों की भर्ती कर रही है। ऐसे में यह घटनाक्रम सरकार के अभियान को झटका दे सकता है।
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वीआरएस के लिए आवेदन करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि पद भरने के लिए सरकार नए डॉक्टरों को आकर्षित कर रही है, लेकिन पुराने डॉक्टरों के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है। पुराने डॉक्टरों पर आए दिन नई नीतियां व शर्तें थोपी जा रही हैं, लेकिन सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। इसके अलावा चिकित्सकों की कमी से काम का दबाव, वीआईपी ड्यूटी, यात्रा ड्यूटी के दौरान सुविधाओं का भी नितांत अभाव है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. आनंद शुक्ला ने कहा कि कुछ डॉक्टरों को पहाड़ की वर्षों की सेवा के बाद फिर पहाड़ में भेज दिया गया है। इसके अलावा यात्रा ड्यूटी के दौरान सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। इसके कारण कुछ डॉक्टरों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है।
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वीआरएस आवेदन लटकाने का औचित्य नहीं
वीआरएस के लिए आवेदन करने वाले दून अस्पताल के डॉ. एसडी जोशी का कहना है कि डॉक्टरों के लिए यात्रा ड्यूटी के दौरान पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। सीजन में दो से तीन बार ड्यूटी लगती है, इससे पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसके अलावा तबादलों में मनमानी, डॉक्टरों के साथ अभद्रता आदि से भी जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा वीआरएस के आवेदन लटकाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।
डॉक्टरों को नहीं मिलतीं सुविधाएं
संयुक्त चिकित्सालय ऋषिकेश में कार्यरत डॉ. एस कोठियाल के मुताबिक यात्रा और वीआईपी ड्यूटी के दौरान एसडीएम, तहसीलदार को तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन डॉक्टरों को कोई पूछने वाला नहीं है। कई बार भोजन के लिए भी अन्य लोगों के साथ लाइन में लगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विभाग में 21 साल की सेवा हो चुकी है। इसमें 16 साल संयुक्त चिकित्सालय श्रीनगर में एवं दो साल पौड़ी में सेवा की अब वीआरएस के लिए आवेदन किया है, लेकिन इसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है।
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18 डॉक्टरों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। इनमें से सीएमओ उत्तरकाशी कल्पना गुप्ता का वीआरएस मंजूर कर लिया गया है। इसके अलावा चार प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। जबकि अन्य प्रस्ताव लौटा दिए गए हैं। यह प्रस्ताव सही फॉरमेंट में न आने की वजह से लौटाए गए हैं।
-डॉ.अर्चना श्रीवास्तव, स्वास्थ्य महानिदेशक